जलवा वसुंधरा का

राजस्थान में भले ही भाजपा को सत्ता से हाथ धोना पड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का जलवा पूरी तरह से बरकरार है। भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय करने की नीति पर काम कर रहा है। छत्तीसगढ़ में रमनसिंह के बजाय धारामल कौशिक को नेता विपक्ष बनाया जाना इसी नीति के चलते हुआ है। पार्टी सूत्रों की मानें तो मध्य प्रदेश में भी शिवराज सिंह चौहान के स्थान पर गोपाल भार्गव को इसी नीति के चलते नेता विपक्ष बनाया गया है। राजस्थान में लेकिन वसुंधरा कतई तैयार नहीं तो इसके पीछे एक बड़ा कारण विधानदल में उनके समर्थकों की तादात ज्यादा होना है। खबर है कि चुनाव पूर्व हुई एक बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और राजे के बीच टिकट वितरण को लेकर गर्मागरम बहस हुई थी। राजे किसी भी सूरत में अमित शाह द्वारा तय किए गए टिकटों पर राजी नहीं थी। मामला इतना बिगड़ा कि राजे ने शाह की बनाई सूची को फाड़ तक डाला। इसके बाद अस्सी सीटों पर राजे के उम्मीदवार फाइनल किए गए, जबकि शाह ने एक सौ बीस सीटों पर उम्मीदवारों का चयन किया। इनमें से मात्र ग्यारह ही चुनाव जीत पाए, जबकि राजे के अस्सी उम्मीदवारों में से बासठ ने जीत दर्ज कराई। यही कारण है कि शाह भले ही कितना प्रयास कर लें, राजस्थान में तो राज रानी का ही चलेगा।

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