एक हजार करोड़ की गर्लफ्रेंड’!

दुनिया के सबसे बदनाम सेक्स अपराधियों में शामिल जेफ्री एपस्टीन की मौत को सात वर्ष बीत चुके हैं लेकिन उसका नाम आज भी सुर्खियों से गायब नहीं हुआ है। हर कुछ महीनों में कोई नया दस्तावेज, कोई नई गवाही या कोई नया दावा इस मामले को फिर चर्चा में ला देता है। इस बार चर्चा का केंद्र स्वयं एपस्टीन नहीं बल्कि उसकी कथित प्रेमिका और वर्षों तक उसके साथ रहने वाली यूक्रेन मूल की महिला कारिना शुलियाक (कैरिना) है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यदि कानूनी परिस्थितियां उसके पक्ष में रहीं तो उसे एपस्टीन की लगभग 100 मिलियन अमेरिकी डाॅलर की सम्पत्ति का बड़ा हिस्सा मिल सकता है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 965 करोड़ रुपए बैठती है

जेफ्री एपस्टीन की कहानी किसी हाॅलीवुड फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। एक साधारण शिक्षक के रूप में करियर शुरू करने वाला यह व्यक्ति धीरे-धीरे अरबपतियों, उद्योगपतियों, राजनेताओं और शाही परिवारों तक पहुंच बना लेता है। उसके निजी विमान, आलीशान हवेलियां, निजी द्वीप और प्रभावशाली सम्पर्क दुनिया भर में चर्चा का विषय रहे लेकिन इसी चमक-दमक के पीछे नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण का एक संगठित नेटवर्क चल रहा था। 2019 में गिरफ्तारी के कुछ ही सप्ताह बाद न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई। आधिकारिक तौर पर इसे आत्महत्या बताया गया, हालांकि आज भी अनेक लोग इस निष्कर्ष पर सवाल उठाते हैं।

एपस्टीन की मौत के बाद सबसे बड़ा प्रश्न उसकी सम्पत्ति को लेकर उठा। अनुमान है कि उसके पास लगभग 100 मिलियन डाॅलर की सम्पत्ति थी, जिसमें न्यूयाॅर्क की हवेली, फ्लोरिडा की सम्पत्ति, न्यू मैक्सिको का विशाल रैंच, पेरिस का अपार्टमेंट, निजी द्वीप और अन्य निवेश शामिल थे। इसी सम्पत्ति पर अब कई पक्ष अपना दावा कर रहे हैं।

इन दावेदारों में सबसे चर्चित नाम कारिना शुलियाक का है। यूक्रेन में जन्मी शुलियाक पेशे से दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट) हैं। रिपोर्टों के अनुसार वह कई वर्षों तक एपस्टीन के साथ रहीं और उसके न्यूयॉर्क स्थित आवास में भी उनका आना-जाना था। एपस्टीन की गिरफ्तारी के समय भी वह उसके सम्पर्क में थीं। कई रिपोर्टों में दावा किया गया कि एपस्टीन उन्हें अपनी जीवन संगिनी जैसा मानता था, हालांकि दोनों ने कभी विवाह नहीं किया। यहीं से कानूनी विवाद शुरू होता है। अमेरिका के अधिकांश राज्यों में केवल प्रेमिका होने से किसी व्यक्ति की सम्पत्ति पर स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। यदि मृतक ने वसीयत में स्पष्ट रूप से किसी व्यक्ति का नाम लिखा हो, तभी उसे कानूनी अधिकार मिलता है। यदि वसीयत न हो या उसे अदालत में चुनौती दी जाए तो उत्तराधिकार के नियम पूरी तरह बदल जाते हैं।

एपस्टीन प्रकरण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल एक अपराधी नहीं बल्कि सत्ता, धन और प्रभाव का पूरा नेटवर्क जांच के दायरे में आया। ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू से लेकर कई उद्योगपति, कारोबारी और प्रभावशाली लोग विभिन्न चरणों में इस मामले से जुड़े आरोपों या पूछताछ के कारण सुर्खियों में रहे। हालांकि सभी मामलों में दोष सिद्ध नहीं हुए लेकिन इस प्रकरण ने यह दिखा दिया कि आर्थिक और राजनीतिक ताकत रखने वाले लोगों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई कितनी जटिल हो सकती है। जेफ्री एपस्टीन की मौत के बाद भी उसके नाम से जुड़े रहस्य समाप्त नहीं हुए हैं। उसकी कथित ‘ब्लैक बुक’, प्रभावशाली सम्पर्क, निजी द्वीप की गतिविधियां और अनेक गोपनीय दस्तावेज आज भी सार्वजनिक बहस का हिस्सा हैं। ऐसे में उसकी कथित प्रेमिका को मिलने वाली सम्भावित 1000 करोड़ रुपए की विरासत केवल एक आर्थिक खबर नहीं बल्कि उस पूरे नेटवर्क की याद दिलाती है जिसने वर्षों तक कानून और समाज दोनों को चुनौती दी।

मुत्यु से पहले बनाया था ट्रस्ट
एपस्टीन ने अपनी मृत्यु से कुछ दिन पहले अपनी अधिकांश सम्पत्ति एक ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दी थी। माना जाता है कि यह कदम सम्भावित मुकदमों और दावों से सम्पत्ति को बचाने के उद्देश्य से उठाया गया था लेकिन बाद में उसकी दर्जनों पीड़ित महिलाओं ने अदालत में दावा किया कि अपराध से अर्जित या अपराध के दौरान नियंत्रित सम्पत्ति पर सबसे पहला अधिकार पीड़ितों का होना चाहिए।

इसी कारण अमेरिका में ‘एपस्टीन विक्टिम्स कम्पेन्सेशन फंड’ बनाया गया। इस फंड के माध्यम से सैकड़ों पीड़ित महिलाओं को करोड़ों डाॅलर का मुआवजा दिया गया। सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार अब तक सैकड़ों मिलियन डाॅलर के दावे निपटाए जा चुके हैं। इसका अर्थ यह है कि भले ही किसी व्यक्ति का नाम वसीयत में हो लेकिन यदि पीड़ितों के वैध दावे पहले से लम्बित हैं तो अदालत पहले उनका निपटारा करेगी।

एपस्टीन की ‘गर्लफ्रेंड’ कौन है?
कारिना (कैरिना) शुलियाक का जन्म यूक्रेन में हुआ था। वह पेशे से एक दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट) हैं और अमेरिका आने के बाद उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में अपना करियर बनाया। सार्वजनिक रिकॉर्ड बताते हैं कि उनकी मुलाकात जेफ्री एपस्टीन से लगभग 2013-14 के दौरान हुई और धीरे-धीरे वह एपस्टीन के बेहद करीबी लोगों में शामिल हो गईं। न्यूयॉर्क के अपर ईस्ट साइड स्थित एपस्टीन की आलीशान हवेली में उनका नियमित आना- जाना था। कई रिपोर्टों में तो यहां तक कहा गया कि एपस्टीन उन्हें अपनी भावी पत्नी के रूप में देखता था, हालांकि दोनों ने कभी विवाह नहीं किया।

2019 में जब एफबीआई ने एपस्टीन को गिरफ्तार किया, तब भी शुलियाक उसके सम्पर्क में थीं। गिरफ्तारी के बाद अदालत में पेशी के दौरान वह कई बार कोर्ट रूम में भी दिखाई दीं। एपस्टीन की मौत के बाद जांच एजेंसियों ने उनसे कई दौर की पूछताछ की। जांचकर्ताओं का उद्देश्य यह जानना था कि क्या उन्हें एपस्टीन के कथित सेक्स ट्रैफिकिंग नेटवर्क की जानकारी थी या नहीं। अब तक उपलब्ध सार्वजनिक रिकाॅर्ड में ऐसा कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिसके आधार पर उन्हें इस अपराध का सह-अभियुक्त माना गया हो।

क्या वास्तव में मिलेंगे 1000 करोड़?
यही सबसे बड़ा सवाल है। अखबारों की सुर्खियों में भले ही ‘100 मिलियन डाॅलर की गर्लफ्रेंड’ लिखा जा रहा हो लेकिन वास्तविक कानूनी स्थिति कहीं अधिक जटिल है। पहला तथ्य यह है कि एपस्टीन की पूरी सम्पत्ति आज भी पूरी तरह मुक्त नहीं है। उस पर वर्षों से पीड़ित महिलाओं के दावे, सिविल मुकदमे और ट्रस्ट से जुड़े कानूनी विवाद चलते रहे हैं। अमेरिका की अदालतों ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अपराध के पीड़ितों को मुआवजा दिया जाना बाकी है तो सम्पत्ति का वितरण उसी प्राथमिकता के आधार पर होगा।

दूसरा तथ्य यह है कि एपस्टीन ने अपनी मृत्यु से ठीक पहले अपनी अधिकांश सम्पत्ति एक ट्रस्ट में डाल दी थी। ट्रस्ट का उद्देश्य ही यह होता है कि सम्पत्ति का प्रबंधन वसीयत से अलग तरीके से किया जाए। इसलिए यदि किसी व्यक्ति का नाम ट्रस्ट के लाभार्थी के रूप में दर्ज है, तब भी अंतिम निर्णय ट्रस्ट की शर्तों और अदालत की व्याख्या पर निर्भर करता है।

तीसरा तथ्य यह है कि 100 मिलियन डॉलर की पूरी सम्पत्ति किसी एक व्यक्ति को मिल जाएगी, ऐसा दावा अभी तक किसी अदालत ने स्वीकार नहीं किया है। यह केवल सम्भावित अधिकतम मूल्य का अनुमान है। वास्तविक वितरण अलग भी हो सकता है।
पीड़ितों को पहले ही मिल चुका है करोड़ों डाॅलर
एपस्टीन की मौत के बाद उसके एस्टेट ने एक Victims Compensation Program  शुरू किया था। इस योजना के तहत सैकड़ों महिलाओं ने आवेदन किया और अनेक मामलों में समझौते के आधार पर मुआवजा दिया गया। सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार इस कार्यक्रम के माध्यम से सैकड़ों मिलियन डाॅलर का भुगतान किया जा चुका है। यही वजह है कि कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति को सम्पत्ति का लाभ मिलता भी है तो वह सभी वैध दावों के निपटारे के बाद ही सम्भव होगा।

क्या एपस्टीन की मौत के साथ खत्म हो गया था मामला? बिल्कुल नहीं…
10 अगस्त 2019 को न्यूयॉर्क की मेट्रोपॉलिटन करेक्शनल सेंटर (MCC) जेल में जेफ्री एपस्टीन मृत पाया गया। आधिकारिक जांच में इसे आत्महत्या बताया गया लेकिन इस निष्कर्ष पर आज तक बहस जारी है। कारण भी थे। मौत से कुछ दिन पहले एपस्टीन पर कथित हमला हुआ था। वह ‘सुसाइड वाॅच’ पर रखा गया था, जिसे बाद में हटा लिया गया। जिस रात उसकी मौत हुई, उस समय जेल के दो सुरक्षाकर्मी कथित रूप से अपनी ड्यूटी पर नहीं थे। कई सीसीटीवी कैमरे ठीक से काम नहीं कर रहे थे। इन परिस्थितियों ने दुनियाभर में साजिश के सिद्धांतों (Conspiracy Theories) को जन्म दिया।

दरअसल, एपस्टीन के खिलाफ मुकदमा केवल उसके व्यक्तिगत अपराधों तक सीमित नहीं था। माना जा रहा था कि मुकदमे के दौरान वह कई प्रभावशाली लोगों के नाम उजागर कर सकता था। यही वजह है कि उसकी मौत के बाद यह सवाल और तेज हो गया कि क्या वह सचमुच आत्महत्या थी या किसी बड़े रहस्य को हमेशा के लिए दफना दिया गया। हालांकि अमेरिकी न्याय विभाग और एफबीआई की आधिकारिक जांच में हत्या के कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आए लेकिन सार्वजनिक बहस आज भी समाप्त नहीं हुई है। सोशल मीडिया से लेकर अमेरिकी कांग्रेस तक यह मामला समय-समय पर उठता रहा है।

‘एपस्टीन लिस्ट’ का सच क्या है?
एपस्टीन का नाम आते ही एक और शब्द अक्सर सुनाई देता है, ‘एपस्टीन लिस्ट’। यही वजह है कि ‘1000 करोड़ की गर्लफ्रेंड’ वाली यह कहानी केवल सनसनी नहीं बल्कि कानून, नैतिकता और न्याय के बीच चल रही एक लम्बी लड़ाई की कहानी है। असल में यह कोई एक आधिकारिक सूची नहीं है। वर्षों के दौरान अदालतों में दाखिल दस्तावेज, उड़ानों के रिकाॅर्ड (Flight Logs), सम्पर्क पुस्तिका (Black Book), ई-मेल, गवाहियों और मुकदमों के दस्तावेज सार्वजनिक होते रहे हैं। इन्हीं दस्तावेजों में दुनिया के कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। किसी दस्तावेज या उड़ान रिकाॅर्ड में किसी व्यक्ति का नाम होना, अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है। कई लोगों के नाम केवल इसलिए सामने आए क्योंकि वे किसी बैठक, यात्रा या सामाजिक कार्यक्रम के दौरान एपस्टीन के सम्पर्क में आए थे। दूसरी ओर कुछ लोगों के खिलाफ गम्भीर आरोप भी लगे, जिनकी अलग-अलग स्तर पर जांच हुई। इसी कारण अमेरिकी अदालतें और मीडिया लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि केवल नाम आने और अपराध सिद्ध होने में बहुत बड़ा कानूनी अंतर है।

गिसलेन मैक्सवेल की सजा के बाद बदला पूरा मामला
एपस्टीन की सहयोगी मानी जाने वाली ब्रिटिश सोशलाइट गिसलेन मैक्सवेल को 2021 में अमेरिकी अदालत ने सेक्स ट्रैफिकिंग से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया और बाद में 20 वर्ष की सजा सुनाई गई। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि मैक्सवेल ने वर्षों तक नाबालिग लड़कियों को एपस्टीन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई। मैक्सवेल की सजा के बाद एक बड़ा सवाल उठा कि यदि एपस्टीन के नेटवर्क में दूसरे लोग भी शामिल थे तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अमेरिकी न्याय विभाग पर इस सम्बंध में लगातार दबाव बना हुआ है। कई पीड़ित आज भी मानते हैं कि पूरा सच अभी सामने आना बाकी है।

1000 करोड़ की विरासत से बड़ा सवाल न्याय का है
कारिना शुलियाक को यदि भविष्य में एपस्टीन की सम्पत्ति का कोई हिस्सा मिलता भी है तो यह केवल एक आर्थिक घटना नहीं होगी। यह अमेरिकी न्याय व्यवस्था की परीक्षा भी होगी क्योंकि अदालतों को यह तय करना होगा कि जिस व्यक्ति की सम्पत्ति का स्रोत और जीवन दोनों गम्भीर आपराधिक मामलों से जुड़े रहे हों, उसकी विरासत का अंतिम हकदार कौन है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में अदालतें केवल उत्तराधिकार कानून नहीं देखेंगी बल्कि यह भी देखेंगी कि क्या सभी पीड़ितों को न्याय और मुआवजा मिल चुका है। यदि नहीं तो सम्पत्ति का पहला अधिकार उन्हीं का होगा।

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