आदिवासी किशोरियां ‘अपनों’ की ठगी का ही शिकार

आदिवासी किशोरियां ‘अपनों’ की ठगी का ही शिकार

राजधानी में घरों में काम करने के लिए रखी जाने वाली आदिवासी किशोरियां ‘अपनों’ की ठगी का ही शिकार बन रही हैं। इन किशोरियों को उनकी जान पहचान के लोग अच्छे वेतन का लालच देकर बहला फुसलाकर दिल्ली ले आते हैं और फिर उन्हें प्लेसमेंट एजेंसियों के हाथ बेचकर फरार हो जाते हैं। यह खुलासा समय-समय पर पुलिस एवं गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से छुड़ाई जाने वाली इन किशोरियों से हुई पूछताछ में हुआ है। दिल्ली में घरों में काम करने के लिए सस्ते श्रम के रूप में आदिवासी किशोरियों को रखा जाता है। दिल्ली पुलिस द्वारा छुड़ाई गई अधिकांश किशोरियां झारखंड, बंगाल, ओडिशा और असम के पिछड़े एवं साधनहीन इलाकों से लाई गई होती हैं। इसमें बहुत सी किशोरियों को तो अपने घर का पता तक भी नहीं मालूम होता है।

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