यह कैसा जनहित?

एक ओर प्रदेश में जालसाजी, धोखाधड़ी और षड़्यंत्र रचकर अपराध करने की प्रवृति बढ़ रही है तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार ऐसे अपराधियों के मुकदमे वापस लेने का काम कर रही है जिन पर गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गये हैं। उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के द्वारा सूचना के अधिकार के तहत सभी दस्तावेजों को मीडिया के सामने रखते हुये सरकार पर आरोप लगाया है कि कि राज्य में अति गंभीर प्रवृत्ति के अपराधां की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन राज्य सरकार गबन करने, बलवा करने के, चोरी-चकारी करने वालो के साथ साथ सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने वाले अपराधियों के मुकदमों को वापस तो ले ही रही है साथ ही हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर मामलां में दर्ज मुकदमां तक को जनहित बता कर वापस ले रही है।

जनवरी 2021 से लेकर जनवरी 2022 तक राज्य सरकार के द्वारा 7 लोगां पर विभिन्न गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की संस्तुति की है। गृह विभाग के अपर सचिव अतर सिंह के द्वारा जारी आदेश के अनुसार जिला ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा तथा जिला देहरादून के विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमो को वापस लेने के आदेश जिला अधिकारियों को जारी किए गए हैं। सरकार के द्वारा वापस लिए जा रहे मामलों को देखें तो जिला ऊधमसिंह नगर के खटीमा थाने में राजू उर्फ राजेंद्र और नरेंद्र सिंह खोलिया तथा नानक मत्ता थाने में देवेंद्र सिंह पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की संस्तुति की गई है। खटीमा थाने में राजू उर्फ राजेंद्र के खिलाफ बलवा करने, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने, सरकारी काम में बाधा डालने और हत्या का प्रयास करने, जान से मारने की धमकी देने तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 2014 में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी तरह से नरेंद्र खोलिया पर भी खटीमा थाने में ही 2016 में हुडदंग करने, चोट पहुंचाने, के मामले दर्ज किए गए थे।

जबकि नानकमत्ता थाने में 2015 में इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट की धारा 15 तथा भारतीय दंड विधान की धारा 420 के तहत दर्ज किए गए मुकदमों को वापिस लेने के आदेश जारी किए गए हैं। इन मुकदमों की में उपयुक्त धाराओं को देखने से साफ पता चलता है कि आरोप कितने गंभीर थे। पिथौरागढ़ जिले के पिथौरागढ़ कोतवाली में हर्षित जोशी के उपर भी अनेक गंभीर धाराओं में जिसमें हत्या का प्रयास, छल पूर्वक कूट रचना करना जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। साथ ही आपदा प्रबंधन की धारा 269 व 271 में भी केस दर्ज किया गया था। इसी तरह से जिला अल्मोड़ा के द्वाराहाट थाने में 2015 में हर्ष पांडे के खिलाफ गबन करने और धोखाधड़ी करने पर धारा 409 और 420 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। यह मुकदमा भी सरकार बनाम हर्ष पांडे के तहत किया गया था। जिसमें सरकारी धन के गबन करने और धोखाधड़ी करने के आरोप लगाये गए थे। जिनको भी सरकार के द्वारा वापस लिये जाने के आदेश जिला मजिस्ट्रेट को जारी किए गए हैं।

जिला देहरादून के डालनवाला थाने में 2016 में अरुण और अन्य के खिलाफ बलवा करने, मारपीट करने और गंभीर तौर पर बल प्रयोग करने पर मुकदमा दर्ज किया गया था जिसे 17 नवंबर 2021 को मुकदमा वापस लिए जाने की संस्तुति गृह विभाग के द्वारा जारी की गई है। इसी प्रकार से हरिद्वार जिले के लक्सर थाने में विजय के खिलाफ धारा 420 और 120 बी 379 और धारा 411 के तहत जिसमें चोरी के सामान की बरामदगी हुई है जैसे मुकदमे भी वापस लिए जाने के आदेश 23 दिसंबर 2021 को जारी किए जा चुके हैं।

हैरानी इस बात की है कि धोखाधड़ी, गबन और चोरी के साथ साथ हत्या का प्रयास करने तथा कूट रचित अभिलेखों का तैयार करने जैसे अति गंभीर मामलों में दर्ज मुकदमों को भी राज्य सरकार धारा 321 के तहत जनहित में वापस लेने जा रही है जबकि अगस्त 2021 में ही सुप्रीम कोर्ट भी धारा 321 के दुरूपयोग रोकने के लिये राज्यों के हाईकोर्ट को निर्देश जारी कर चुका है साथ ही सुप्रीम कोट भी इस पर गंभीर चिंता जता चुका है कि राज्य सरकार ने धारा 321 के उपयोग से गंभीर प्रवृति के मुकदमों को भी वापस लेने का काम कर रही है जो कि अनुचित है। बावजूद इसके अक्टूबर से लेकर दिसंबर 2021 तक प्रदेश सरकार के द्वारा 4 गंभीर प्रवृति के मुकदमों को वापस लेने की संस्तुति की गई है और 5 जनवरी 2022 को भी एक मुकदमा वापस लेने के आदेश दिए जा चुके है। इससे साफ है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की भी अवहेलना कर रही है।

 

सरकार राज्य में अपराधो में कमी के तमाम दावे कर रही है लेकिन अपराध कम नहीं हो रहे हैं। स्वयं सरकार चोरी- चकारी, बलवा करने वालां के साथ खड़ी है मुझे आश्चर्य तो इस बात का हो रहा है कि सरकार ने ही ऐसे गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज करवाये है, जिसमें चोरी चकारी करने वाले यहां तक की चोरी का सामाने भी आरोपी से बरामद हुआ है। ऐसे मामलों को सरकार जनहित बता मुकदमो को वापस ले रही है। यह तो सरासर कानून का उल्लंघन है। जब सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि धारा 321 का राज्य सरकारें दुरुपयोग कर रही है फिर भी राज्य सरकार ने मुकदमों को वापस लेने का आदेश दिया है। सरकार किस तरह से सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना कर रही है यह इस बात से ही पता चल रहा है कि अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्देश में कहा है कि धारा 321 का दुरुपयोग किया जा रहा है और सभी राज्यों के हाईकोर्ट को दुरूपयोग रोकने के निर्देश जारी किए थे लेकिन सरकार ने अगस्त 2012 के बाद कई मुकदमो को वापस लेने के आदेश दिए हैं। यह साफ तौर पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना तो है ही साथ ही सरकार अपराधियो के साथ खड़ी दिखाई दे रही है।
रघुनाथ सिंह नेगी, अट्टयक्ष उत्तराखंड रक्षा मोर्चा

ए