जिम्बावे में हिंसा जारी संकट में म्नांगाग्वा सरकार

दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्र जिम्बावे में सरकार के खिलाफ जनाक्रोश अब हिंसक होने लगा है। देश के मुख्य विपक्षी दल ‘मूवमेंट फाॅर डेमोक्रेटिक चेन्ज’ ने गत् शुक्रवार, 16 अगस्त को एक देशव्यापी बंद का आह्नान किया था। जिस पर अदालत द्वारा रोक लगा दी गई थी। इस रोक के बावजूद विपक्षी नेता बड़ी तादात में राजधानी हरारे के अफ्रीकी यूनिटी चैराहे पर इकट्ठा हुए। देखते ही देखते उनका जमावड़ा भारी भीड़ में तब्दील हो गया। कोर्ट की रोक के

बावजूद प्रदर्शन पर पुलिस ने सख्त रूप अपनाते हुए आंसू गैस के गोले और लाठी चार्ज कर डाला। बड़ी संख्या में विपक्षी दलों के नेता और प्रदर्शकारियों को गिरफ्तार भी किया गया है। वृहस्पतिवार की इस घटना के बाद देश में हालात खासे तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। विपक्षी दल ‘मूवमेंट फाॅर डेमोक्रेटिक चेन्ज’ को लगातार मिल रहे जनसमर्थन के पीछे वर्तमान राष्ट्रपति इमर्सन म्नांगाग्वा सरकार की आर्थिक नीतियां हैं जिनके चलते देश की अर्थव्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। दरअसल इस दक्षिण अफ्रीकी देश में 20 लाख से ज्यादा लोग भुखमरी का शिकार है। इस वर्ष जून में सयुक्त राष्ट्र संघ ने अपनी एक रिपोर्ट में देश की एक तिहाई आबादी के भुखमरी की कगार पर पहुंचने की आशंका जताई थी। राष्ट्रपति म्नांगाग्वा ने देश की खराब अर्थव्यवस्था के लिए लगातार होने वाली प्राकøतिक आपदाओं को जिम्मेदार ठहराया है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *