आसान नहीं धामी की राह

पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री बनते ही खटीमा विधानसभा सीट को वीआईपी सीट का दर्जा मिल गया। विकास योजनाओं की यहां बाढ़ आ गई है जिससे क्षेत्र की जनता को उम्मीद बंधी है कि अब ‘विकास’ नामक विलुप्त चिड़िया के उसे दर्शन हो पाएंगे। यहां धामी का मुख्य मुकाबला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भुवन कापड़ी से होना तय है। कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद खटीमा पहुंचे कापड़ी के स्वागत में उमड़ा जन सैलाब भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। इस सीट पर भाजपा को भीतरघात का खतरा भी है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर का भी इसी सीट से चुनाव लड़ना मुकाबले के खासा रोमांचक बनने की तरफ इशारा कर रहा है

ऊधमसिंह नगर जिले की सभी 9 विधानसभा सीटों में इस बार खटीमा सीट वीआईपी सीट होने के चलते सबसे महत्वपूर्ण बन चुकी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इसी सीट से विधायक हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में महज 2700 वोटों से जीतकर धामी दूसरी बार विधायक बने थे। इस बार इस विधानसभा सीट पर भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के साथ ही बसपा का चुनाव लड़ना तय है। भाजपा के टिकट पर जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तीसरी बार चुनाव मैदान में उतरेंगे तो वहीं कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भुवन कापड़ी दूसरी बार पूरी ताकत से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। एक पार्टी का सीएम दूसरी का प्रदेश अध्यक्ष तो ऐसे में आम आदमी पार्टी कहां पीछे हटने वाली है। आप यहां से अपने प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर को चुनावी मैदान में उतारने जा रही है। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी से एक बार फिर रमेश राणा का चुनाव लड़ना तय है। हालांकि कुछ राजनेता राणा को कांग्रेस में लाने की कोशिशों में भी जुटे हैं, लेकिन राणा एक ही शर्त पर कांग्रेस में जाने को तैयार हैं कि अगर पार्टी उन्हें नानकमत्ता विधानसभा सीट में प्रत्याशी बनाए। फिलहाल पूर्व विधायक गोपाल सिंह राणा के कांग्रेस में रहते यह संभव नहीं दिख रहा है। इस विधानसभा सीट पर अब तक भाजपा, कांग्रेस और बसपा कंडीडेट ही मजबूती के साथ चुनाव लड़ते आए हैं। इसके चलते ही खटीमा में त्रिकोणीय मुकाबला होता रहा है। लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी के चुनावी आगाज से यहां मुकाबला चतुष्कोणीय होने जा रहा है। समाजवादी पार्टी और यूकेडी का यहां कोई न तो खास जनाधार है और न ही कोई नेता इन दलों से अपनी चुनावी ताल ठोकता नजर आ रहा है। खटीमा सीट पर फिलहाल भाजपा और कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर है। सीट पर सबसे ज्यादा संघर्ष मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को करना पड़ेगा क्योंकि उनके कंधों पर एक तरफ पूरे प्रदेश में पार्टी को जिताने और चुनावी कमान संभालने की जिम्मेदारी होगी तो दूसरी तरफ खटीमा में अपनी जीत सुनिश्चित करनी होगी। ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी फंूक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। उन्होंने अपने एक पीआरओ प्रमोद जोशी को खटीमा विधानसभा क्षेत्र में ही लगाया हुआ है। वह जनसमस्याओं का निपटारा करने में जुटे रहते हैं। हालांकि प्रमोद जोशी पर जन समस्याओं का भार ज्यादा पड़ जाने के कारण अब कुंदन सिंह मनोला को भी खटीमा भेजने की तैयारी की जा रही है। मनोला पूर्व में कृषि अधिकारी रहे हैं। उन्हें खटीमा विधानसभा क्षेत्र की बहुत जानकारी है। इसके अलावा भाजपा ने खटीमा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी बागडोर को संभालने का जिम्मा कमलंेद्र सेमवाल को सौंपा है। सेमवाल को खटीमा विधानसभा का प्रभारी बनाया गया है। सेमवाल तराई के बड़े नेताओं में शुमार रहे हैं। यहां यह भी बताना जरूरी है कि ऊधमसिंह नगर के भाजपा प्रभारी मंत्री यतीश्वरानंद हैं जो पूरे जिले के साथ ही खटीमा पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा दौरे पर आए थे तो उन्होंने कपिल सामंत की पार्टी में वापसी कराकर यह संदेश दिया था कि वह रूठे हुए अपनों को मनाकर घर वापसी कराएंगे। कपिल सामंत प्रदेश के पूर्व मंत्री प्रकाश पंत के पीआरओ रहे थे। वह खटीमा विधानसभा क्षेत्र में अपनी अच्छी पकड़ रखते हैं। सामंत पिछले दिनों आम आदमी पार्टी में चले गए थे। खटीमा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के तीन गुट हैं। जिसमें एक गुट पुष्कर सिंह धामी का तो दूसरा गुट राजू भंडारी का बताया जाता है, जबकि तीसरा गुट दान सिंह रावत का है। 2012 में जब खटीमा विधानसभा सीट आरक्षित श्रेणी से बाहर कर सामान्य सीट की गई तो तब राजू भंडारी और पुष्कर सिंह धामी यहां से टिकट के मजबूत दावेदार थे। पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी की पैरवी के चलते धामी को तब यहां से पार्टी प्रत्याशी बनाया गया था।

राजू भंडारी भाजपा के प्रदेश महामंत्री हैं। कहा जाता है कि उनका गुट पुष्कर सिंह धामी के साथ मिलकर नहीं चलता है। जो इन दोनों से इत्तर अपनी राजनीति करता है। दान सिंह रावत
कॉपरेटिव पॉलिटिक्स में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। फिलहाल भी वह कॉपरेटिव बैंक के डायरेक्टर हैं। इस बार यह देखने में आ रहा है कि भाजपा के वह नेता और कार्यकर्ता जो अधिकतर पुष्कर सिंह धामी के विरोध में रहते थे वह अब धामी के सीएम बनते ही सरेंडर कर चुके हैं। खटीमा विधानसभा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से अचानक एक चर्चा बडं़े जोरों से चल रही है कि पुष्कर सिंह धामी 2022 का विधानसभा चुनाव खटीमा से नहीं लड़ेंगे। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि उनका पैतृक गांव पिथौरागढ़ का टुंडी गांव है। यह गांव डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है। कहा जा रहा है कि पुष्कर सिंह धामी 2022 में खटीमा से पलायन करके डीडीहाट से चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि वहां से भाजपा के कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल कद्दावर नेता होने के साथ ही 2022 में फिर से पार्टी के संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं। बहरहाल इन दिनों खटीमा में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। धामी ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट नागरिक चिकित्सालय में
डॉक्टरों की कमी को पूरा कराने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

फिजिशियन की तैनाती करा दी गई है। जबकि सर्जन के भी आदेश हो चुके हैं। खटीमा में कांग्रेस की चुनावी डगर तब से मुश्किल हो गई है जब से पुष्कर सिंह धामी प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं। इससे भाजपा नेताओं में जहां सक्रियता बढ़ी है वहीं कांग्रेस नेताओं में थोड़ी सुस्ती दिखाई दे रही है। धामी के मुख्यमंत्री बनने से पहले कांग्रेस इस सीट को अपनी झोली में मान रही थी। हालांकि अभी भी कांग्रेस का दावा है कि वह खटीमा से जीत दर्ज कराएगीे। भुवन कापडी दूसरी बार यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी बनाएं जायेंगे, यह तय माना जा रहा है। जब से वह पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बने हैं तब से तो इस बात को और भी ज्यादा बल मिला है। सात अगस्त के दिन भुवन कापड़ी के स्वागत में खटीमा में जनसैलाब उमड़ पड़ा था। इस दिन कापड़ी पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार खटीमा पहुंचे थे। तब भारी तादात में लोगों की उपस्थिति देखकर साफ हो गया कि कांग्रेस यहां से कमजोर नहीं है। कांग्रेस खाटीमा विधानसभा सीट को लेकर कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 3 सितंबर को परिवर्तन रैली की शुरुआत खटीमा से ही कराई गई। खटीमा से शुरू होकर कांग्रेस की यह परिवर्तन रैली मसूरी तक जाएगी। भुवन कापड़ी को वैसे तो प्रीतम सिंह गुट का नेता माना जाता है लेकिन खटीमा में हरीश रावत गुट के नेता भी उनका समर्थन करते हुए दिख रहे हैं। खटीमा विधानसभा सीट पर पूर्व में कांग्रेस का खासा वोट बैंक रहा है। यहां से पूर्व में कांग्रेस नेता गोपाल सिंह राणा ने कुमाऊं में सबसे ज्यादा वोट के अंतर से जीतने का रिकॉर्ड ही बना डाला था।

गौरतलब है कि पहले यह विधानसभा सीट अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए आरक्षित थी। यह आरक्षण उस समय से ही चला आ रहा है जब यह सीट अविभाजित उत्तर प्रदेश का हिस्सा हुआ करती थी। राज्य बनने के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस के गोपाल सिंह राणा जीते थे। 2002 के इस विधानसभा चुनाव में राणा का मुकाबला बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी दान सिंह राणा से था तब राणा ने दान सिंह को 10 हजार से अधिक वोटों से हराया था। यहां यह भी बताना जरूरी है कि 2002 के विधानसभा चुनाव में भाजपा तीसरे नंबर पर थी। इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनाव में फिर से कांग्रेस प्रत्याशी गोपाल सिंह राणा की जीत हुई थी। इस बार उनकी जीत ने अपना ही पहला रिकॉर्ड तोड़ डाला था। राणा तब भाजपा के गोपाल सिंह राणा चांदा से 20 हजार से अधिक वोटों से चुनाव जीते थे। यह चुनाव रिकॉर्ड कुमाऊं में एक रिकॉर्ड बन गया जो आज तक किसी सीट पर नहीं टूटा है। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में जब खटीमा सीट का आरक्षण खत्म कर इसका परिसीमन किया गया तो कांग्रेस ने यहां से भाजपा के पुष्कर सिंह धामी के सामने देवेंद्र चंद को मैदान में उतारा था। धामी ने देवेंद्र चंद्र को 5000 वोटांे से चुनाव हराया। 2012 के चुनाव में लड़ाई त्रिकोणीय रही। जिसमें बसपा के उम्मीदवार डॉ ़ पीसी पाण्डेय तीसरे नंबर पर थे उन्हें साढ़े नौ हजार मत प्राप्त हुए थे।
भाजपा और कांग्रेस के बाद खटीमा विधानसभा क्षेत्र में बसपा मजबूत स्थिति में है। यहां से 2017 में बसपा ने रमेश राणा को चुनावी मैदान में उतारकर चुनाव को त्रिकोणीय कर दिया था। पूर्व में जिला पंचायत सदस्य रह चुके रमेश राणा को एक बार फिर 2022 में बसपा टिकट देगी इसकी प्रबल संभावनाएं हैं। वैसे भी राणा के अलावा बसपा के पास कोई खास जनाधार वाला नेता नहीं है। राणा थारू समाज से हैं। उन्हें थारू समाज का अच्छा खासा वोट मिलता है। 2002 और 2007 के विधानसभा चुनावों में थारू वोट बैंक पर जहां कांग्रेस का एकछत्र राज था वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में रमेश राणा ने कांग्रेस के इस वोट बैंक में सेंध लगा दी। रमेश राणा बसपा के टिकट पर चुनाव लड़कर 2017 में 17084 वोट पा चुके हैं। भुवन कापड़ी की हार में रमेश राणा की बढ़त ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर रमेश राणा मजबूती से चुनाव नहीं लड़ते तो भुवन कापड़ी की जीत निश्चित थी। शायद यही वजह है कि इस बार रमेश राणा को कांग्रेस अपने पाले में लाने के लिए उतावली है। लेकिन रमेश राणा ने कांग्रेस में आने से पहले यह कहकर कि वह नानकमत्ता से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे कांग्रेस के इस अभियान में ब्रेक लगा दिए हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस नानकमत्ता से एक बार फिर पूर्व विधायक गोपाल सिंह राणा को ही टिकट देगी। ऐसे में माना जा रहा है कि 2022 का चुनाव रमेश राणा बसपा के टिकट पर ही लड़ेंगे। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अगर कांग्रेस रमेश राणा को अपनी पार्टी में शामिल कर उन्हें खटीमा से टिकट दे तो समीकरण उसके पक्ष में आ सकते हैं। विश्लेषक बताते हैं कि रमेश राणा का 17000 का थारू वोट बैंक तो उनके साथ रहेगा ही इसके अलावा कांग्रेस का वोट बैंक मिल जायेगा तो वह भाजपा प्रत्याशी पुष्कर सिंह धामी को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। लेकिन भुवन कापड़ी की दावेदारी के चलते यह संभव नजर नहीं आ रहा है।

आम आदमी पार्टी इस बार खटीमा से अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर को चुनावी मैदान में उतारेगी। यह तय हो चुका है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर पूर्व में पार्टी के लिए पूरे प्रदेश में काम कर रहे थे। लेकिन जिस दिन से उन्हें आप आलाकमान से खटीमा विधानसभा का चुनाव लड़ने की हरी झंडी मिली है वह यहीं डेरा डाले हुए हैं। कलेर खटीमा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव मंझोला दाह फार्म के निवासी हैं। कलेर की पार्टी के लोग दावा करते हैं कि उनके प्रदेश अध्यक्ष खटीमा विधानसभा क्षेत्र में डोर टू डोर कंपेनिंग कर रहे हैं। वह खटीमा विधानसभा क्षेत्र के करीब 60 प्रतिशत मतदाताओं से फेस टू फेस मिल चुके हैं। किसी भी पार्टी का प्रत्याशी अभी तक इतने लोगों से नहीं मिला। बताया जा रहा है कि खटीमा विधानसभा में 18000 घर हैं जिनमें से 9000 घरों में वह जा चुके हैं। घर-घर जाकर कलेर लोगों को अपनी पार्टी के एजेंडे से अवगत करा रहे हैं।

 

हमारी पार्टी इस बार सभी आपसी मतभेदों को भुलाकर चुनाव लड़ रही है। सभी में एकता है, कोई किसी गुट का नहीं, सिर्फ एक गुट का है और वो है गांधी गुट। पार्टी ने मेरी मेहनत और कार्य करने की क्षमता देखी है चाहे पूर्व में यूथ कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष रहते या वर्तमान में कांग्रेस का उपाध्यक्ष रहते। प्रदेश में लोग भाजपा की सरकार से आजिज आ चुके हैं। भाजपा भयभीत है इसके कारण ही वह 5 साल में तीन सीएम बदल चुकी है। भाजपा में अंतर्कलह है। मुझे खटीमा की जनता प्रचंड बहुमत से जिताएगी।
भुवन कापड़ी, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष कांग्रेस

 

भाजपा और कांग्रेस ने इस प्रदेश को बारी-बारी से लूटा है। अब आम आदमी पार्टी देवभूमि से लुटेरों को बाहर करने के लिए तैयार बैठी है। हमारी पार्टी दिल्ली एजेंडे पर उत्तराखण्ड में सरकार  बनाएगी। उत्तराखण्ड में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी जैसी समस्याएं हैं। सभी का निदान हमारी पार्टी करेगी। हम गारंटी के साथ निःशुल्क बिजली देंगे और रोजगार भी देंगे।
एस.एस. कलेर, प्रदेश अध्यक्ष आम आदमी पार्टी

 

मैं फिलहाल बहुजन समाज पार्टी में हूं। पिछले दिनों मेरे पास कांग्रेस वाले आए थे और मेरा बायोडाटा ले गए थे। वे मुझे कांग्रेस में शामिल करना चाहते हैं। लेकिन मैंने कहा है कि खटीमा से ही फिर लड़ने के लिए तैयार हूं। अनुसूचित जाति और जनजाति समाज के लिए कई कानूनों को लागू कराने के लिए चुनाव लड़ना जरूरी हो गया है।
रमेश राणा, पूर्व प्रत्याशी बसपा