गंगावली में बिछने लगी है चुनावी बिसात

प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज गंगोलीहाट विधानसभा क्षेत्र चंद, कत्यूरी एवं मणकोटी राजवंशों के दौर में राजनीति का केंद्र हुआ करती थी। वर्तमान में यहां बुनियादी सुविधाओं तक का टोटा है। अस्पताल में डॉक्टर और नर्स नहीं हैं, एक्सरे मशीन भी नदारत हैं तो अल्ट्रा साउंड मशीन बगैर कॉर्डियोलॉजिस्ट धूल फांक रही है। पूरी विधानसभा में सड़कों का हाल-बेहाल है। महाविद्यालय में शिक्षकों के पद लंबे अर्से से रिक्त चल रहे हैं। ग्राम पंचायतों के पास अपने पंचायत भवन तक यहां नहीं है। पर्यटन की अपार संभावनाओं वाले इस क्षेत्र का बीते बीस बरस में विकास से कोई वास्ता नहीं रहा जिसके चलते पर्यटन के लिए आमदनी की आस, आस बनकर रह गई है। जनता की नाराजगी अपने नेताओं से चरम पर है। कांग्रेस इस नाराजगी को अपने पक्ष में लाने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक मीना गंगोला की असफलताओं को चुनावी मुद्दा बना रही है तो भाजपा क्षेत्र का सर्वांगीण विकास कराने के वादे को सामने रख 2022 के रण की तैयारी करती नजर आने लगी है

गंगोलीहाट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित है। इस सीट पर फिलहाल मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच है। टिकट न मिलने पर अगर कोई जनाधार वाला नेता वर्ष 2017 के चुनावों की भांति निर्दलीय उतरता है तो फिर यह मुकाबला त्रिकोणीय हो जाएगा। ऐसे में कहा नहीं जा सकता कि कौन इस सीट का विजेता बनकर उभरेगा। लेकिन किस्मत आजमाने को फिलहाल राजनीतिक दलों में दावेदारी करने वालों की कमी नहीं है। फिलवक्त तो भाजपा- कांग्रेस जुबानी जंग के साथ ही तैयारियों के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। संगठन भी सक्रिय हो रहे हैं। बूथ लेबल पर मजबूती के लिए सक्रियता बढ़ी है। दावेदार भी मैदान में जा अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं ताकि उनकी दावेदारी को बल मिल सके। जहां तक इस सीट का सवाल है तो यहां बारी-बारी से कांग्रेस-भाजपा का कब्जा रहा है। वर्ष 2002 में कांग्रेस, वर्ष 2007 में
भाजपा, वर्ष 2012 में कांग्रेस एवं वर्ष 2017 में भाजपा इस सीट को कब्जाने में सफल रही है।

2017 में हुए विधानसभा चुनावों में निर्दलीय खजान चंद्र गुड्डू ने भाजपा-कांग्रेस का राजनीतिक गणित बिगाड़ दिया था। हालांकि भाजपा इस सीट को जीतने में सफल रही लेकिन जीत का अंतर मात्र 805 वोटों का था। बीजेपी से टिकट न मिलने के चलते उन्होंने निर्दलीय दांव खेला जिसके चलते कांग्रेस यह सीट हार गई। वह पिछले चुनाव में 154 बूथों में से 23 बूथों में आगे थे। अगर खजान चंद्र ने दावेदारी नहीं की होती तो हो सकता था कि कांग्रेस इस सीट को निकालने में सफल हो जाती। उसके बाद खजान गुड्डू कांग्रेस में आ गए। अब कांग्रेस से दावेदारी कर रहे हैं। उनका जनता में जनाधार भी है। पिछली बार वह मुकाबला त्रिकोणीय बनाने में सफल रहे थे। तब उन्होंने भाजपा पर विश्वासघात करने का आरोप लगाया था। अगर इस बार टिकट न मिलने पर कांग्रेस से खजान गुड्डू की निष्ठा टूटी और वह निर्दलीय उतर गए तो फिर इस सीट पर मुकाबला अवश्य ही त्रिकोणीय हो जाएगा। ऐसे में खजान गुड्डू की दावेदारी को कमतर नहीं आंकी जा सकती। वहीं नारायण राम आर्य कांग्रेस के काफी अनुभवी राजनेता हैं। दो बार इस सीट से विधायक रह चुके हैं। बतौर विधायक विकास के कामों को गिनाने के लिए उनके पास बहुत कुछ है। जहां तक भाजपा की बात है तो 2017 में भाजपा की उम्मीदवार नई थीं। लोगों को अपेक्षा थी वह बेहतर काम करेंगी। अगर इस बार भाजपा वर्तमान विधायक मीना गंगोला को टिकट देती है तो उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ ही उन क्षेत्रों के मतदाताओं की नाराजगी की कीमत चुकानी पड़ सकती है जहां पर वह विकास करने में सफल नहीं हो पाए। दूसरा उन्हें अपनी उस छवि से भी पार पाना है जिसमें विपक्षी उन पर विधायक कम एवं ठेकेदार ज्यादा होने का आरोप लगाते हैं। ऐसे में मीना गंगोला के समक्ष दोबारा टिकट पाना इतना आसान नहीं होगा। वहीं कांग्रेस विकास के मुद्दे पर विधायक मीना गंगोला को लगातार घेर रही है।

कांग्रेसी नेताओं को कहना है कि उनके समय स्वीकृत कामों को वह अपना काम बता रही है जबकि सच यह है कि एक भी नया काम वह नहीं करा पाई। न ही पूर्व के कामों को आगे बढ़ा पाई। विकास की एक ईट भी विधानसभा क्षेत्र में न लगा पाने के आरोप विधायक के ऊपर हैं। इसके अलावा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी भी उनके रास्ते में अड़ंगा लगा सकती हैं। हाल फिलहाल भाजपा की तरफ से अनुसूचित मोर्चा के प्रदेश मंत्री भुवन चंद भी ताल ठोक रहे हैं। वह लगातार सरकार की उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं। तो वहीं दिनेश आर्या भी जनसंपर्क के जरिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हुए हैं। आने वाले समय में और भी बड़े नाम आगे आएंगे।

कांग्रेस से प्रमुख दावेदारों पर नजर डालें तो पूर्व विधायक नारायण राम आर्य, खजान गुड्डू एवं भीम कुमार प्रमुख दावेदारों में हैं। नारायण राम आर्य एवं खजान गुड्डू के बीच की राजनीतिक अनबन के बीच भीम कुमार भी दावेदारी कर रहे हैं। वह प्रदेश सेवा दल के सचिव और प्रदेश बूथ प्रभारी भी हैं। 1997-98 में वह जिला पंचायत सदस्य रहने के साथ ही गंगोलीहाट विधानसभा के प्रभारी भी रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश सचिव विजय चंद्र पप्पू ने भी दावेदारी पेश की है। आम आदमी पार्टी भी अपनी ताकत बढ़ाने के लिए इस सीट पर सदस्यता अभियान चला रही है। 2017 में भाजपा 72 तो कांग्रेस 59 बूथों पर आगे थी। भाजपा के समक्ष पिछले प्रदर्शन को दोहराना तो कांग्रेस के समक्ष इसमें सुधार करने की बड़ी चुनौती है।

इन मुद्दों पर मुखर है कांग्रेस
कांग्रेस का आरोप रहा है कि भाजपा ने कांग्रेस कार्यकाल में हुए कार्यों की अनदेखी की है। डबल इंजन की सरकार विकास कार्यों को आगे नहीं बढ़ा पाई। राजनीतिक कारणों से वित्तीय अनुदान बंद कर संस्थानों को खत्म करने की साजिश की जा रही है। बेरीनाग महिला चिकित्सालय को समायोजन के नाम पर भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। राईआगर, पांखू आईटीआई बंद हो चुके हैं। बेड़ीनाग, चौकोड़ी के लिए बनने वाली लिफ्टिंग पेयजल योजना पांच साल से बंद है। बेड़ीनाग एवं गणाई पॉलीटेक्निक में फैकल्टी एवं नए ट्रेंड न खुलने से यह तकनीकी संस्थान बंद होने के कगार पर है। राईआगेर- कोटमन्या-पांखू सड़क की बदहाली को लेकर भी कांग्रेस मुखर है। बेड़ीनाग एवं चौकोड़ी के लोगों को भूमि का मालिकाना हक न मिलने के साथ ही महंगाई एवं बेरोजगारी पर भी कांग्रेस भाजपा को कटघरे में खड़ा कर रही है।

पिछला लेखा-जोखा
वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में गंगोलीहाट विधानसभा सीट में 26374 विधिमान्य मत पड़े। जिसमें कांग्रेस के नारायण राम आर्य को 8898 व भाजपा के जोगाराम टम्टा को 8428 मत प्राप्त हुए। बेहद नजदीकी
मुकाबले में कांग्रेस के नारायण राम आर्य को इस सीट से विधायक बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वर्ष 2007 में गंगोलीहाट विधानसभा सीट से 34761 वैध मतों के मुकाबले भाजपा के जोगाराम टम्टा 14755 मत प्राप्त कर विधायक बनने में सफल रहे। वर्ष 2012 में गंगोलीहाट विधानसभा सीट में 48579 लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया। कांग्रेस के नारायण राम आर्य 24648 मत प्राप्त कर विधायक बने। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा की मीना गंगोला ने कांग्रेस के नारायण राम आर्य को 805 वोट से पराजित किया।

धरातल पर नहीं उतर पाया विकास
विकास की घोषणाओं एवं दावों के बाद भी धरातल पर विकास की तस्वीर कुछ और ही बयां करती है। गंगोलीहाट विधानसभा क्षेत्र में गणाई गंगोली, बेरीनाग, गंगोलीहाट में तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। हर केंद्र में 9 विशेषज्ञ डॉक्टर होने चाहिए। लेकिन डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। बेरीनाग में एक्स रे की सुविधा नहीं है। इन तीनों केंद्रों में लंबे समय से बाल रोग विशेषज्ञों के पद लंबे रिक्त पड़े हुए हैं। गंगोलीहाट सीएचसी में रेडियोलॉजिस्ट का पद सृजित है। अल्ट्रा साउंड मशीन भी है। लेकिन रेडियोलाजिस्ट नहीं होने से अल्ट्रा साउंड मशीन का उपयोग वर्षों से नहीं हो पाया है। गंगोलीटाट- राईआगर मार्ग बदहाल है। पाताल भुवनेश्वर को जोड़ने वाली सड़क की स्थिति भी बदहाल है। बेलपट्टी क्षेत्र पेयजल समस्या को लेकर जूझ रहा है। मड़कनाली-सुरखाल पाठक सड़क निर्माण को लेकर क्षेत्रीय जनता पिछले दो महीने से अनशन में हैं।

गंगोलीहाट-बेरीनाग क्षेत्र में सदाबहार पेयजल समस्या रही है। यहां पर पेयजल की दृष्टि से गांव के गांव ड्राई एरिया हैं। पुंगराऊ में लोग विधायक मीना गंगोला से इसलिए नाराज हैं कि उन्होंने इस क्षेत्र की अनदेखी की है। उन्होंने सड़क के गड्डों में फूल एवं आलू के बीज डालकर विरोध प्रदर्शन किया। नारेबाजी की। शहीद पवन सिंह सुगड़ा राजकीय महाविद्यालय गंगोलीहाट का नया भवन सिमलकोट में बनकर तैयार हैं लेकिन वहां तक सड़क नहीं बन पाई है। गंगोलीहाट महाविद्यालय को पीजी का दर्जा नहीं मिल पाया है। बेरीनाग जीजीआईसी में प्रवक्ताओं के 6 पद रिक्त चल रहे हैं। कई सहायक अध्यापकों के पद भी खाली चल रहे हैं। गणाई के लोग अलग विकासखंड की मांग को लेकर मुखर हैं तो गंगावली जिला बनाने की मांग भी लंबे समय से चलती आई है। गंगोलहाट के नाली, टिमटा, चमडुगरा, चौड़ा, बुंगली, सुरखाल पाठक, भामा, सुगड़ी, पाती पत्याल, चौड़ा, रड़कोट, निगल्टी, अस्कोड़ा, खतेड़ा, कोटा, पोखरा, सुंगरखोला, डम्डे, चहज सहित 27 ग्राम पंचायतों के लिए बेलपट्टी पेयजल योजना दो दशक बाद भी शासन में अटकी है। लोग गाड़-गधूेरों का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। विकासखंड के पुंगराऊ घाटी को जोड़ने वाले थल-पांखू- कोटमन्या-मोटर मार्ग का डामरीकरण हो या फिर जीआईसी पांखू का जर्जर भवन व विद्यालय में पानी की कमी, सहित कई मुद्दों पर यहां गठित पुंगराऊ घाटी विकास समिति संघर्षरत है और मांगों पर कोई पहल न होने पर आक्रोशित भी है। इसके अलावा पिंगली मंदिर को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने, चौकोड़ी के लोगों को भूमि का मालिकाना हक दिलाने, दशौली-नाचनी सड़क का विस्तारीकरण एवं मड़कनाली-सुरखाल सड़क का निर्माण इसको लेकर क्षेत्रीय जनता नाखुश दिखती है। गंगोलीहाट के सूदुरवर्ती क्षेत्र चमलेख, बेलगाड़ा, गंतोला, कोल्पा सहित कई लोग लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे हैं। सड़क न होने से यहां के लोगों को स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए कई किमी की दूरी तय करनी पड़ती हैं।

विकासखंड के गणाई गंगोली तहसील पर नजर डालें तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में खून की जांच एवं अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने से लोगों को 80 दूर जिला मुख्यालय की यात्रा करनी पड़ती है। जबकि इस अस्पताल पर पूरी तहसील के 42 ग्राम पंचायतों की 50 हजार की जनता निर्भर है। यहां चिकित्सकों के 03, स्टाफ नर्स के 03 एवं फार्मासिस्ट का एक पद खाली है। तहसील में सड़कों की स्थिति भी दयनीय है। गणाई- खिरमांडे सड़क स्वीकृत के 13 साल बाद भी नहीं बन पाई हैं। 15 गांवों के लोग मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए डोली पर निर्भर हैं। सड़क न बनने पर कई गांवों के लोग चुनाव बहिष्कार की घोषणा कर चुके हैं। तहसील के पभ्या एवं फड़ियाली गांव तक सड़क न पहुंचने से यहां से 65 परिवार पलायन कर चुके हैं। 2014 में यहां के लिए सड़क कटी लेकिन अब भूमि हस्तांतरण इसमें बाधा बना हुआ है। काकड़पानी गांव के लोगों को सड़क सुविधा न मिलने से यहां से 40 परिवार पलायन कर चुके हैं। गणाई में स्थित पशु चिकित्सालय में पशु चिकित्सकों का पद समय-समय पर खाली रहता है जिससे पशुपालकों वाले इस क्षेत्र के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस विकासखंड के 42 ग्राम पंचायतों की विकासखंड की मांग काफी पुरानी है। आज भी यहां के लोगों को विकासखंड मुख्यालय में आने-जाने के लिए 120 किमी से अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है। बनकोट मार्ग भी वर्षों से बदहाल है। विधानसभा क्षेत्र के दुगईआगर, इटाना, सुन्युणा, जजोली, ओलियागांव, डसीलाखेत, गुणाकिटान, रैतौला, सुनखोला, बुंगली, सुरखालपाठक, हाट, खतीगांव, टुण्डाचौड़ा, नैनोलीकांडा, बनेलागांव, बडयूडा ऐसे क्षेत्र हैं जहां ग्राम्या परियोजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च किए गए लेकिन गांव आज भी अपनी पुरानी स्थिति में हैं। गंगोलीहाट में 11 पंचायतों के पास अपने पंचायत भवन नहीं हैं। 8 ग्राम पंचायतों के भवन ध्वस्त हो चुके हैं। 40 ध्वस्त होने के कगार पर हैं। कुनल्ता, सगड़ी, गौलचौरा, जमड़कोट, मड़कनाली, वलीगांव, कूना, चौड़ागोल्थी, मल्लागर्खा, सरिसोली, जखेड़ी में पंचायत भवन नहीं है। शासन एवं विभाग को कई बार प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। वर्ष 194-95 से नए पंचायत घरों का निर्माण नहीं हुआ है। ये लेकिन गांव आज भी अपनी पुरानी स्थिति में हैं। विकास की यह कहानी बताती है कि भले ही जनप्रतिनिधि तमाम उपलब्धियों का बखान करते फिर रहे हों लेकिन हकीकत यह है कि दूर-दूर तक जटिल भौगोलिक क्षेत्र में बसे गांवों में विकास पहुंचना तो दूर की बात है इन्हें नाप पाना ही काफी कठिन है। विधानसभा गंगोलीहाट का अंतिम सच यह है कि कभी इतिहास में चंद, कत्यूरी एवं मणकोटी राजाओं के आधिपत्य एवं हाट कालिका और पाताल भुवनेश्वर जैसे धार्मिक स्थलों के साथ ही गुफा घाटी के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले इस क्षेत्र को पिछले 20 सालों में चार विधायक पर्यटन स्थली के रूप में विकसित नहीं कर पाए। वादों व उपलब्धियों की कितनी भी बढ़ी दास्तान क्यों न हो लेकिन यह क्षेत्र आज भी विकास से कोसों दूर है।

मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं। पार्टी के संविधान के अनुसार टिकट मांगना मेरा संवैधानिक अधिकार है। मैं यहां से पार्टी के टिकट का प्रबल दावेदार हूं। अब यह संगठन को निर्णय करना है कि वह मुझे सेवा का अवसर देते हैं कि नहीं। पार्टी के लिए काम करने वाले हर कार्यकर्ता की इच्छा होती है कि वह भी जनता की सेवा के लिए आगे आए। पार्टी फीड बैक लेगी और देखेगी कि बौद्धिक रूप से परिपक्व कार्यकर्ता को मौका दिया जाए। मैं जनता के बीच लगातार सक्रिय रहा हूं। पार्टी जिसे भी टिकट देगी, हमारा काम मिल-जुलकर भाजपा का कमल खिलाना है। विधानसभा की भौगोलिक स्थितियां जटिल हैं। जिस तरह से विधानसभा को काम होना चाहिए था वह नहीं हो पाया। मेरा प्रयास रहेगा कि अगर पार्टी मुझे मौका देती है तो मैं स्थानीय स्तर पर आजीविका के लिए प्रयास करूंगा ताकि बेरोजगारी के साथ ही पलायन भी रूके। भारत सरकार की भी नीति रही है कि पहाड़ों में बसावटों को सुरक्षित करने के लिए उनकी आर्थिकी को मजबूत करने के लिए काम किया जाए। जहां तक वर्तमान विधायक द्वारा किए गए कामों की बात है तो पूरे क्षेत्र में अच्छा काम हुआ है। सरकार की उपलब्धियों को लेकर हम लगातार जनता से जनसंपर्क कर रहे हैं। जिस तरह से काम हो रहा है उससे हम गंगोलीहाट ही नहीं, बल्कि जनपद की चारों सीटों पर भाजपा का झंडा लहराएंगे। इसके लिए हम पार्टी को आश्वस्त करते हैं।
भुवन चंद्र, प्रदेश मंत्री भाजपा अनुसूचित मोर्चा 

 

मैं पिछले सात साल से इस सीट पर मेहनत कर रहा हूं। गांव-गांव जाकर जनसंपर्क किया है। पार्टी को मजबूत करने का काम किया है। गंगोलीहाट ही नहीं प्रदेश भर में जहां भी लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव हुए हों, वहां एक कार्यकर्ता के नाते समर्पण भाव से काम किया है। धारचूला, सल्ट, हल्द्वानी, सितारगंज विधानसभाओं के साथ ही लोकसभा चुनावों में भी पूरी निष्ठा से काम किया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के हर कार्यक्रमों में हमने भागीदारी की। विधानसभा घेराव से लेकर पार्टी के हर अभियान में मैंने जो भूमिका हो सकती थी वह निभाई। पार्टी हित के लिए रात-दिन काम किया है। कांग्रेस में दी गई सेवाओं के बदले मुझे मौका तो मिलना ही चाहिए। मैंने हाटकालिका एवं कोटगाड़ी दरबार में शपथ ली है कि अगर मैं विधायक बना तो सबसे पहले विधायक के तौर पर मिलने वाले वेतन को अपने क्षेत्र के 20 गरीब बच्चों की शिक्षा पर खर्च करूंगा। इन बच्चों को आईएएस एवं पीसीएस परीक्षाओं की तैयारी कराऊंगा। दूसरा, इस क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। हाटकालिका, पातालभुवनेश्वर सहित तमाम ऐसे स्थल हैं जहां आधारभूत ढांचा अभी तक नहीं बन पाया है। वहां पर सुविधाएं जुटाने प्राथमिकता में होगा। क्षेत्र को पर्यटन से जोड़ना है। स्थानीय स्तर पर लोग पर्यटन क्षेत्र में रोजगार पा सकें इसके लिए उन्हें सब्सिडी आधारित लोन दिलवाना भी मेरी प्राथमिकता में होगी। अपने क्षेत्र में फायर बिग्रेड की स्थापना के साथ ही प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा एवं तकनीकी संस्थानों की स्थिति को सुधारने के साथ ही पशुपालन और स्वास्थ्य जैसे विषय भी मेरी प्राथमिकता होगी।
खजान चन्द्र ‘गुड्डू’, कांग्रेस नेता

 

बहुत अच्छा काम हुआ है। शिक्षा के क्षेत्र में बात करूं तो पूर्ववर्ती सरकारों ने तमाम स्कूल तो खोल दिए लेकिन वहां न शिक्षक तैनात किए न ही भवन बनाने का काम किया। कई भवनों की हालत तो बहुत खराब चल रही थी। 50 वर्ष पुराने भवन थे। कई भवन ध्वस्त हो चुके थे। शिक्षा के लिए लोग बाहर जा रहे थे। हमने क्षेत्र में अटल आदर्श विद्यालय खुलवाए। हमारे सभी सीएचसी में पर्याप्त डॉक्टर हैं। मेरे विधानसभा में 20 से 40 दूर ऐसे क्षेत्र थे जहां पैदल चलना होता था। वहां हमने सड़कें बना दी। पिछले विधानसभा चुनाव में जब मैं प्रचार के लिए गई तो कई किमी. दूरी हमने पैदल नापी थी। आज हम गाड़ी से जा रहे हैं। दो-तीन जगह ही ऐसी रह गई हैं, जहां पर सड़कें कटनी हैं। वहां भी सड़क स्वीकृत हैं। पिछले 70 सालों से जहां पर बिजली नहीं पहुंच पाई। उन सब क्षेत्रों में हमने बिजली पहुंचा दी है। मेरे विधानसभा में पेयजल एक बड़ी समस्या थी। कई एरिया ड्राई एरिया थे। पर्यटन स्थल बेरीनाग, चौकोड़ी में पानी की समस्या थी। गाड़ी से पानी ढोना पड़ता था। वहां पर हमने पेयजल पहुंचाया। ग्वासीकोट में पेयजल की किल्लत थी। जहां पर साढ़े चौदह करोड़ रुपए की योजना पर काम चल रहा है। बेलपट्टी में जहां धोड़े से पानी पहुंचता है वहां भी जल्द ही पेयजल योाजना पर काम शुरू हो जाएगा। वासुकीनाग में पेयजल किल्लत का समाधान शीघ्र हो जाएगा। हमने सोचा भी नहीं था कि इतना बढ़िया काम हम कर सकते हैं। बहुत बढ़िया काम हुआ है। हम इन्हीं उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जाएंगे। महामारी के दौरान भी मेरे क्षेत्र में बहुत अच्छा काम हुआ। रही मेरे पर लग रहे आरोपों की बात तो विपक्ष का काम ही विरोध करना एवं आरोप लगाना है। इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस 10 साल तक रही। उसके दो विधायकों को यहां काम करने का मौका मिला। आप सर्वे करा लीजिए, जो काम पिछले पांच साल में हमने किया उससे जनता बहुत खुश है।
मीना गंगोला, विधायक भाजपा

मैं कांग्रेस का वरिष्ठ कार्यकर्ता हूं। मैंने पूर्व में क्षेत्र के विकास के लिए बहुत काम किया है। मैं लगातार जनता के संपर्क में रहा हूं। ऐसे में मेरी दावेदारी रहेगी। पूर्व के कामों को देखते हुए पार्टी मुझे अवश्य टिकट देगी। मैंने पंडित नारायण दत्त तिवारी जी के कार्यकाल में काम किया। प्रथम कार्यकाल में ही गंगोलीहाट के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सड़कों, अस्पतालों, सड़कों का निर्माण किया। गंगोलीहाट में गरीब तबके के लोगों की शिक्षा को ध्यान में रखकर राजीव गांधी नवोदय विद्यालय और कस्तूरबा गांधी नवोदय विद्यालय खोला। 22 हाईस्कूल एवं इंटर कॉलेजों का उच्चीकरण कराया। दशाईथल, बनकोट, पांखू और चहज में आई.टी.आई. खुलवाए। गणाई एवं गंगोलीहाट में पालीटेक्निक खोले। गणाई और गंगोलीहाट के पीएचसी को उच्चीकृत कर सीएचसी बनाया। गंगोलीहाट एवं बेरीनाग को नगर पंचायत बनाया। गंगोलीहाट में 15 करोड़ रुपए की लागत से पेयजल लिफ्ट योजना बनाई जिससे आज लोगों को पानी मिल रहा है। गणाई एवं गंगोलीहाट में डिग्री कॉलेज स्वीकृत कराए। गंगोलीहाट में पशु चिकित्सालय स्वीकृत कराया। हमने सड़कें काटी तो आज गंगोलीहाट विधानसभा में अब एक किमी. से अधिक दूरी पर कोई गांव नहीं है। मैंने गंगोलीहाट में रजिस्ट्रार कार्यालय को हरीश रावत के समय में स्वीकृति दिलाई थी। गंगोलीहाट में गैस गोदाम खुलवाया, बेरीनाग एवं चौकोड़ी के लिए में 14 करोड़ की लिफ्ट पेयजल योजना बनाई। ग्वासीकोट पेयजल योजना एवं 72 करोड़ की बेलपट्टी पेयजल योजना स्वीकृत कराई। गंगोलीहाट में डिग्री कॉलेज स्वीकृत कराया। राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत लगभग सारे गांवों को रोशन किया। पेयजल, सड़क सहित कई योजनाएं बनाई। 5 करोड़ की जलागम परियोजना भी अपने कार्यकाल में स्वीकृत कराई। मैंने अपने पहले कार्यकाल में गंगोलीहाट में इंजीनियरिंग कॉलेज स्वीकृत कराया था लेकिन हम चुनाव हार गए तो वह कॉलेज पिथौरागढ़ में स्थापित हो गया।
नारायण राम आर्य, पूर्व विधायक कांग्रेस