यानी हुजू़र बेज़मीर हो गए

मेरी बात सैय्यद अली रज़ा उर्फ मंज़र भोपाली साहब से परिचय बहुत देर से हुआ। परिचय से तात्पर्य उनकी शायरी, ग़ज़ल, नज़्म इत्यादि से है। कुछ दिन हुए आभासी संसार … Read More