अपने-अपने राम
मेरी बात लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिंद सब फ़लसफ़ी हैं खित्ता-ए-मग़रिब के राम-ए-हिंद ये हिन्दियों की फ़िक्र-ए-फ़लक-रस का है असर रिफ़अत में आसमां से भी ऊंचा है बाम-ए-हिंद इस देस … Read More
मेरी बात लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिंद सब फ़लसफ़ी हैं खित्ता-ए-मग़रिब के राम-ए-हिंद ये हिन्दियों की फ़िक्र-ए-फ़लक-रस का है असर रिफ़अत में आसमां से भी ऊंचा है बाम-ए-हिंद इस देस … Read More