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स्वामी ने कहा-अर्थव्यवस्था सुधार के लिए नोट पर लक्ष्मी की तस्वीर लगाओ, कांग्रेस बोली फिर वित्तमंत्री क्या करेंगी?

भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के माता लक्ष्मी वाले बयान पर राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर स्वामी पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा, “आपने सोचा था कि देश के इकॉनोमिस्ट अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कोई आइडिया देंगे, लेकिन वो नोट बदलने की बात करते हैं। माता लक्ष्मी इस तरह का काम करके अर्थव्यवस्था को ठीक कर देंगी, फिर वित्त मंत्री क्या काम करेंगी?”

स्वामी ने बुधवार को मध्यप्रदेश के खंडवा में बयान दिया कि नोट पर धन की देवी लक्ष्मी की तस्वीर लगाई जाए तो देश की अर्थव्यवस्था की सुधर जाएगी। उन्होंने इंडोनेशिया के करेंसी पर गणेश जी की फोटो का हवाला देते हुए कहा, “इस सवाल का जवाब तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दे सकते हैं। लेकिन मैं इसके पक्ष में हूं। भगवान गणेश विघ्न दूर करते हैं। मैं तो कहूंगा कि देश की करेंसी को सुधारने के लिए लक्ष्मी की फोटो लगाई जा सकती है, इस पर किसी को आपत्ति भी नहीं होगी।”

उसके बाद स्वामी ने कहा कि इंडोनेशिया को ही देख लीजिए उसने अपने नोटों पर गणेश की फोटो लगाई है, उसके बाद उसे काफी फायदा हुआ। भारत को भी ऐसा ही कुछ करना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ इस बयान को लेकर सोशल मीडिया कई लोगों ने तंज का दौर शुरू हो गया है।

स्वामी हमेशा अपने बयानों के लिए सुर्खियों में रहते हैं। ‘स्वामी विवेकानंद व्याख्यानमाला’ विषय पर भाषण के दौरान खंडवा में उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सीएए में कुछ भी नहीं आपत्तिजनक हैं। इसके लिए कांग्रेस और महात्मा गांधी ने खुद अपील की थी।

उन्होंने कहा, “साल 2003 में संसद में कांग्रेस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की अपील की थी। हम तो इसको लेकर आए हैं। अब कांग्रेस इसको स्वीकार नहीं कर रही है। और कह रही है कि हमने पाकिस्तान के मुसलमानों के साथ अन्याय किया है। मेरा सवाल है कि इसमें क्या अन्याय हुआ? पाकिस्तान के मुसलमान यहां नहीं आना चाहते हैं। हम उनको यहां आने के लिए मजबूर भी नहीं कर सकते हैं।”

स्वामी यहीं नहीं रुके और आगे कहा कि ब्राह्मणों और दलितों की तरह मुसलमानों और हिंदुओं का भी डीएनए एक है। उन्होंने इसके आगे दावा किया, “यूनिफॉर्म सिविल कोड जल्द ही लाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट पिछले 70 वर्षों में कई बार यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने के लिए निर्देश दे चुका है। इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 44 में भी यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने का जिक्र किया गया है।”