संसद के बाहर हिंसा बाद सोशल मीडिया ने ट्रम्प को किया डम्प
दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका कल अपने ही बनाए सविधान की उस समय धज्जिया उड़ाता दिखा जब संसद के बाहर निर्वतमान राष्ट्पति डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थक हिंसा पर उतारू हो गए। यहां वोटिंग के 64 दिन बाद जब अमेरिकी संसद बाइडेन की जीत पर मुहर लगाने जा रही थी। ऐसे समय में अमेरिकी लोकतंत्र शर्मसार हो गया। देखते ही देखते ट्रम्प के समर्थक दंगाइयों में तब्दील हो गए। वे न केवल संसद में घुसे बल्कि जमकर तोड़फोड़ और हिंसा की। यही नहीं बल्कि गोलिया भी चली। अब तक हिंसा में कुल चार लोगो के मरने की खबरें आ रही है। सुरक्षा एजेंसियां ट्रम्प समर्थकों के प्लान को समझने में नाकाम रहीं। बामुश्किल मिलिट्री की स्पेशल यूनिट दंगाइयों कर पाई। कई घंटे बाद के बवाल के बाद संसद की कार्यवाही फिर से शुरू की जा सकी। फिलहाल , वाशिंगटन में 15 दिन के लिए आपातकाल लगा दिया गया है।
उधर, दूसरी तरफ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका में हुई हिंसा और हंगामे पर चिंता जताई है। उन्होंने ट्रम्प का नाम लिए बिना सलाह दी है कि सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्व तरीके से कर दिया जाना चाहिए। मोदी ने ट्वीट किया कि वाशिंगटन डीसी में हिंसा की खबर देखकर चिंतित हूँ। सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्वक तरीके से किया जाना जारी रहना चाहिए। एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में इस तरह के गैरकानूनी तरीके स्वीकार नहीं किए जा सकते है।
