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सऊदी अरब ने मानी नरेंद्र मोदी की सलाह, सार्क की तरह होगा G-20 समिट

भारत 26 मार्च को होने वाली ‘एक्स्ट्राऑर्डिनरी वर्चुअल G-20 लीडर्स समिट’ में शामिल होगा। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समिट का हिस्सा बनेंगे। इस समिट की अध्यक्षता देश सऊदी अरब कर रहा है। समिट गुरुवार को होगी। इस बैठक में Covid-19 और इसके आर्थिक प्रभाव को लेकर चर्चा होगी।

इससे पहले यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को ट्वीट कर बताया कि उन्होंने बैठक की तैयारियों के उपलक्ष्य में मोदी से फोन पर वार्ता की थी। इस बैठक की शुरुआत आज 25 मार्च को G-20 शेरपाओं की एक वर्चुअल बैठक से होगी। शेरपाओं G-20 के सदस्य देश और राज्यों की सरकारों के प्रमुखों के प्रतिनिधियों को कहा जाता है।

भारत के शेरपा पूर्व वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु हैं। इस बार सऊदी अरब G-20 का अध्यक्ष पद संभालेगा। साल 2022 में भारत G-20 की अध्यक्षता करेगा। इस बैठक में यूरोपीय संघ और अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान और दक्षिण कोरिया जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं सम्मिलित होगी।

बैठक को लेकर सऊदी अरब ने जानकारी दी कि प्रिंस सलमान इस बैठक में वैश्विक महामारी बन चुके कोरोना वायरस से निपटने के लिए चर्चा करेंगे। सऊदी अरब 26 मार्च को होने वाली इस बैठक में 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के नेताओं की बैठक की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अध्यक्षता करेगा।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस सम्मलेन का हिस्सा बनेंगे। G-20 सदस्यों में स्पेन, जॉर्डन, सिंगापुर और स्विट्जरलैंड समेत अन्य प्रभावित देशों के नेता भी इसमें हिस्सा लेंगे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इस बैठक में उपस्थित होगा। साथ ही डब्ल्यूटीओ, संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के नेता भी इसमें शामिल होंगे।

बुधवार को जारी एक बयान में कहा गया कि शाह सलमान COVID-19 वैश्विक महामारी और इसके मनुष्यों और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर से निपटने को लेकर आयोजित एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में सार्क देशों की बैठक हुई थी। उसी तर्ज पर नरेंद्र मोदी ने G-20 देशों की बैठक बुलाने का प्रस्ताव रखा था। G-20 के मौजूदा मुखिया सउदी अरब ने इस संगठन की बैठक बुलाने के मोदी के सुझाव को स्वीकार कर लिया है।

दुनिया के सबसे प्रभावशाली 20 देश G-२० में शामिल हैं। वर्ष 2007-08 के वैश्विक मंदी के बाद इसका गठन किया गया था। इससे पूर्व दुनिया के सर्वशक्तिशाली सात देशों का एक संगठन समूह-7 काम करता था।