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पूर्वी लद्दाख के हालात पर प्रधानमंत्री मोदी ने की तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी लद्दाख के हालात पर मंगलवार को बैठक की। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद रहे।

सूत्रों के हवाले से आउटलुक ने लिखा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में विस्तृत रिपोर्ट ली। प्रधानमंत्री ने सीमा पर बाहरी चुनौतियों से निपटने के लिए सैन्य तैयारियों की समीक्षा की। तीनों सेनाओं ने मौजूदा हालातों के मद्देनजर आसपास मौजूद डिफेंस असेट्स और तनाव बढ़ने के हालात में रणनीतिक और सामरिक विकल्पों को लेकर सुझाव दिए।

तीनों सेनाओं ने मौजूदा हालात को लेकर अपनी तैयारियों का ब्लूप्रिंट भी प्रधानमंत्री को सौंपा। तीनों सेनाओं ने पीएम मोदी को पूर्वी लद्दाख में मौजूदा हालात से भी अवगत कराया। आधिकारिक सूत्रों आउटलुक ने लिखा है कि एनएसए डोभाल लद्दाख के साथ-साथ उत्तर सिक्किम और उत्तराखंड में भी एलएसी के साथ उत्पन्न स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास कई क्षेत्रों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव की स्थिति बरकरार है। उच्च पदस्थ सैन्य सूत्रों का कहना है कि भारत ने पैंगोंग त्सो और गलवान घाटी में अपनी स्थिति मजबूत की है। इन दोनों विवादित क्षेत्रों में चीनी सेना ने अपने दो से ढाई हजार सैनिकों की तैनाती की है और वह धीरे-धीरे अस्थायी निर्माण को मजबूत कर रहा है।

बीते पांच मई को पूर्वी लद्दाख के पेगोंग झील क्षेत्र में भारत और चीन के लगभग 250 सैनिकों के बीच लोहे की छड़ों और लाठी-डंडों से झड़प हुई थी। दोनों ओर से पथराव भी हुआ था। इस घटना में दोनों देशों के सैनिक घायल हुए थे। इसी तरह की एक अन्य घटना में नौ मई को सिक्किम सेक्टर में नाकू ला दर्रे के पास दोनों देशों के लगभग 150 सैनिकों के बीच झड़प हो गई थी।

इस घटना में दोनों पक्षों के कम से कम 10 सैनिक घायल हुए थे। चीन असल में पूर्वी लद्दाख इलाके में भारत की सड़क और अन्य सामरिक तैयारियों को लेकर परेशान है। चीन चाहता है कि भारत इस इलाके में सभी तरह के निर्माण को रोक ले। लेकिन भारत किसी भी निर्माण कार्य को रोकने के पक्ष में नहीं है।