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गर्भवती महिला सिपाही कोरोना में करती रही ड्यूटी, खुद हुई बीमार तो अस्पतालों का भर्ती से इंकार, मौत

देश में कोरोना योद्धाओं की कितनी चिंताजनक स्थिति है इसे यूपी के आगरा में हुई घटना से जाना जा सकता है। गर्भवती होने के बावजूद महिला सिपाही ने लॉकडाउन में अपना फर्ज निभाया। कोरोना के खिलाफ जंग में खड़ी रही, लेकिन जब उसे मदद की जरुरत पड़ी तो कोई काम न आया। घर वाले कार में लेकर उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगाते रहे, लेकिन किसी भी डॉक्टर ने देखने की जहमत तक नहीं उठाई।

अंततः महिला सिपाही ने कार में ही दम तौड़ दिया। मौत के तुरंत बाद पता चला वो कोरोना पॉजिटिव है। पाँच घंटे तक शव कार में पड़ा रहा, न परिजनों के हाथ लगाया न स्वास्थ्य विभाग का अमला पहुंचा। बाद में डीएम को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।

आगरा के सिकंदरा में रहने वाली महिला सिपाही कानपुर के बिल्हौर में तैनात थी। गर्भावस्था के दौरान भी वह ड्यूटी कर रही थीं। डिलीवरी का समय नजदीक आया तो 2 अप्रैल को डिलीवरी के लिए छुट्टी लेकर आगरा अपने घर ककरेठा के ईश्वर नगर पहुंची थीं। पांच दिन पहले ही जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दिया।

नॉर्मल डिलीवरी के चलते तीन दिन बाद ही उसे घर भेज दिया गया। छुट्टी से पहले डॉक्टरों एहतियातन महिला सिपाही का सैंपल लेकर कोरोना जांच के लिए भेजा था। घरवाले बच्चे के जन्म की खुशी मना ही रहे थे कि महिला सिपाही के ससुर की मौत हो गई। उन्हें तबीयत खराब होने के चलते दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां उनकी कोरोना की जांच हुई थी, लेकिन वह निगेटिव आई थी। परिवारवाले उनका शव आगरा लेकर आए थे, जहां उनका दाह संस्कार किया गया था।

ससुर की मौत के दूसरे ही दिन महिला सिपाही की अचानक तबीयत खराब हो गई। घर वाले कार में लेकर उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगाते रहे, लेकिन किसी भी अस्पताल ने भर्ती नहीं किया। अंततः महिला सिपाही ने कार में ही दम तौड़ दिया। शव को लेकर घर के दरवाजे पर पहुंचे ही थे कि परिजनों के मोबाइल की घंटी बजी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया कि महिला सिपाही कोरोना पॉजिटिव है, हम उसे लेने आ रहे हैं।

इतना सुनते ही परिजन शव से ऐसे दूर भागे जैसे करंट लगा हो। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बताया कि उसकी तो अभी मृत्यु हो गई। पाँच घंटे तक शव कार में पड़ा रहा, न परिजनों के हाथ लगाया न स्वास्थ्य विभाग का अमला पहुंचा। स्थानीय पार्षद ने जब प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की। डीएम को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। तब टीम मौके पर पहुंची।