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सुप्रीम कोर्ट में देश का नाम बदल इंडिया करने की याचिका पर आज होगी सुनवाई

देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। दिल्ली के किसान नमह ने जनहित याचिका दायर कर संविधान के आर्टिकल-1 में बदलाव की मांग की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इंडिया नाम हटाने में भारत सरकार की नाकामी अंग्रेजों की गुलामी का प्रतीक है। देश का नाम अंग्रेजी में भी भारत करने से लोगों में राष्ट्रीय भावना बढ़ेगी और देश को अलग पहचान मिलेगी।

उन्होंने कहा है कि इसी के जरिए देश को अंग्रेजी में इंडिया और हिंदी में भारत नाम दिया गया था। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एसए बोबडे की बेंच में होगी। याचिकाकर्ता का कहना है कि अंग्रेज गुलामों को इंडियन कहते थे। उन्होंने ही देश को अंग्रेजी में इंडिया नाम दिया था।

15 नवंबर 1948 को संविधान के आर्टिकल-1 के मसौदे पर बहस करते हुए एम. अनंतशयनम अय्यंगर और सेठ गोविंद दास ने देश का नाम अंग्रेजी में इंडिया रखने का जोरदार विरोध किया था। उन्होंने इंडिया की जगह अंग्रेजी में भारत, भारतवर्ष और हिंदुस्तान नामों का सुझाव दिया था। लेकिन उस समय ध्यान नहीं दिया गया। अब इस गलती को सुधारने के लिए कोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश दे।

याचिकाकर्ता का कहना कि प्राचीन काल से ही देश को भारत के नाम से जाना जाता रहा है। लेकिन अंग्रेजों की 200 साल की गुलामी से मिली आजादी के बाद अंग्रेजी में देश का नाम इंडिया कर दिया गया। देश के प्राचीन इतिहास को भुलाना नहीं चाहिए। इसलिए देश के असली नाम भारत को ही मान्यता दी जानी चाहिए।

जैन संत आचार्य विद्यासागर भी इंडिया नाम को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। आचार्य कहते हैं कि जब हम मद्रास का नाम बदल कर चेन्नई कर सकते हैं, गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम कर सकते हैं तो इंडिया को हटाकर भारत करने में क्या दिक्कत है? श्रीलंका जैसा छोटा-सा देश पहले सीलोन के नाम से जाना जाता था, अब श्रीलंका के नाम से जाना जाता है, तो हम क्यों गुलामी के प्रतीक इंडिया को थामे हुए हैं। हमें भी अपने गौरवशाली भारत नाम को अपनाना चाहिए।