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भारत से दुश्मनी निभाने के चक्कर में खुद ही मुश्किलों में फंसा पाकिस्तान

पाकिस्तान भारत से दुश्मनी निभाने के चक्कर में खुद ही तमाम मुश्किलों में फंस गया है। अगस्त महीने में जब नरेंद्र मोदी सरकार ने कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किया तो पाकिस्तान ने भारत के साथ व्यापार पर पूरी तरह से बैन लगाने जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया। कोरोना वायरस की महामारी के दौर में अब पाकिस्तान की ही दवा कंपनियां अपनी सरकार को भारत से आयात बैन करने को लेकर आगाह कर रही हैं।

भारत से व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के कुछ दिनों बाद ही पाकिस्तान ने जीवनरक्षक दवाओं के आयात को लेकर छूट दे दी थी। जीवनरक्षक दवाओं की आड़ में भारत से विटामिन्स से लेकर सरसों का तेल भी मंगाया जाने लगा। जब ये बात सामने आई तो पाकिस्तान की सरकार सवालों के घेरे में आ गई। विवाद बढ़ने पर पाकिस्तान की सरकार ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार की संभावित कार्रवाई को लेकर वहां की फार्मा इंडस्ट्री में खलबली मच गई है।

फार्मा एसोसिएशन (पीपीएमए) के वाइस चेयरमैन सैय्यद फारूक बुखारी ने कहा कि जब देश में कोरोना वायरस के मरीज बढ़ रहे हैं तो केंद्रीय कैबिनेट को भारत या किसी भी दूसरे देश से दवाओं और उसके लिए जरूरी कच्चे माल के आयात को बैन करने जैसा कोई फैसला नहीं लेना चाहिए।

बुखारी ने कहा, “ऐसे वक्त में जब केंद्र और प्रांतीय सरकारें देश में बढ़ते कोरोना के मामलों से निपटने के लिए ज्यादा से ज्यादा क्वारंटीन सेंटर्स, आइसोलेशन फैसिलिटी और अस्पतालों में विशेष वार्ड बनाने में जुटी हुई है, तो कोरोना मरीजों के लिए जरूरी दवाओं की आपूर्ति भी सुनिश्चित किए जाने की भी सख्त जरूरत है।”

उन्होंने कहा, “भारत से फार्मा उद्योग के लिए जरूरी कच्चे माल का आयात तमाम नियामक संस्थाओं और प्रशासन की निगरानी में किया जा रहा था। भारत से आयात को वाणिज्य मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) से भी मंजूरी मिली थी।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस सप्लाई चेन को बाधित किया जाता है तो इससे पाकिस्तान में कोरोना वायरस के इलाज पर बेहद बुरा असर पड़ेगा।