केरल में ‘रामबूटन’ की वजह से फैला Nipah Virus ?, जानें क्या है रामबूटन
केरल में जहां अभी भी कोरोना का प्रसार अधिक है, वहीं अब निपाह वायरस (Nipah Virus ) के मरीज मिलने को लेकर चिंता का माहौल बन गया है। एक बच्चे की मौत के बाद निपाह वायरस फिर से उभर आया है और एक फल शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कहा जा रहा है कि इस फल से Nipah Virus फैलने का संबंध हो सकता है। बताया गया है कि Nipah Virus से संक्रमित सभी लोगों ने इस फल को खाया है। ऐसा माना जाता है कि मरने वाले लड़के ने भी इस फल को खाया था। इसलिए इस फल को जांच के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे भेजा गया है। इस फल का नाम रामबूटन फल है।
फल में लाल बालों वाली पपड़ी होती है। इसके अंदर लीची जैसा मीठा और तीखा फल होता है। कहा जाता है कि इस फलदार पेड़ पर चमगादड़ घोंसला बनाते हैं। यह फल मुख्य रूप से दक्षिण एशियाई देशों में पाया जाता है और लीची जैसा दिखता है। हालांकि इस फल के फायदे और नुकसान दोनों हैं, लेकिन यह नहीं पुष्टि नहीं की जा सकती है कि इससे वायरस फैल सकता है। इस बीच अगर फल चमगादड़ द्वारा खाया जाता है, तो यह वायरस फैला सकता है। आज हम इस फल के बारे में जानेंगे।
इस फल के औषधीय गुण
फल में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, लोहा, फास्फोरस, जस्ता, तांबा, मैंगनीज, राइबोफ्लेविन, नियासिन जैसे पोषक तत्व होते हैं। फाइटोकेमिकल्स नामक यौगिक पाए जाते हैं। उन्हें एंटीडायबिटिक, एंटी-एलर्जी और एंटीमाइक्रोबियल माना जाता है। जो शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में मदद करता है।
शरीर में ऊर्जा को बढ़ाता है
यह फल शरीर में ऊर्जा को बढ़ाता है और तरोताजा महसूस कराता है। इसमें बहुत अधिक कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। यह विटामिन सी और ए से भी भरपूर होता है और यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। रामबूटन फल के सेवन से पाचन क्रिया में सुधार होता है। यह गैस और अपच को कम करने में भी मदद करता है। यह फल सेहत के साथ-साथ खूबसूरती के लिए भी फायदेमंद होता है। इससे बालों को मजबूती और चमक मिलती है। यह बालों की ग्रोथ के लिए भी फायदेमंद होता है।

रामबूटन फल की हानि..
-क्योंकि इसमें पोटैशियम होता है, इसके अधिक सेवन से उल्टी और दस्त हो सकते हैं।
– इसकी लार से निकाले गए अर्क का अत्यधिक उपयोग शरीर में विषाक्त स्तर को बढ़ा सकता है।
-अगर किसी को नए खाद्य पदार्थों से एलर्जी है तो यह फल एलर्जी का कारण भी बन सकता है।
आम तौर पर जहां रामबूटन के फलदार पेड़ होते हैं वहां चमगादड़ ज्यादा पाए जाते हैं। वे इन पेड़ों पर रहते हैं और फलों पर भी बैठते हैं। वह विभिन्न प्रकार के विषाणुओं से संक्रमित होते हैं जो फल के संपर्क में आते हैं।

लीची और रामबूटन फल में अंतर..
लीची आकार में रामबूटन से थोड़ी छोटी होती है। हालांकि दोनों लाल हैं, लीची थोड़ी सख्त है। लीची की भूसी भी सफेद होती है। लेकिन दोनों का स्वाद अलग है। लीची में एक बड़ा बीज होता है। लीची का छिलका ज्यादा गाढ़ा नहीं होता है और इसे छील कर भी निकाला जा सकता है।
