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मानसिक विक्षिप्त मां कई दिनों से है भूखी, चार माह की बच्ची को नहीं पिला पा रही दूध

कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए 3 मई तक देश में लॉकडाउन लागू है। जिसका सबसे बुरा असर गरीबों पर देखने को मिल रहा है। लॉकडाउन के चलते कई गरीब परिवार दो जून की रोटी को मोहताज हो गया है। कुछ ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में देखने को मिला। 55 वर्षीय राजू शर्मा अतर्रा कस्बे में रहते हैं।

राजू का लॉकडाउन से पहले सड़क किनारे अंडे बेचने का गुमटी चलता था। लॉकडाउन के वजह दुकान बंद है। उनकी एक 4 महीने की बेटी है। बेटी का नाम राजू ने रानी रखा है। पत्नी मानसिक रूप से विक्षिप्त है। अपनी मानसिक बीमार मां की गोदी में पड़ी बेटी रानी हर आने-जाने वाले की ओर ऐसे निहार रही जैसे वो दूध के लिए निहारती है।

रानी की 26 वर्षीय मां मीरा घर में राशन न होने के चलते तीन दिन से न कुछ खाया है और न पीया है। कुछ न खाने-पीने की वजह से मां का दुध नहीं उतर रहा है जिसके चलते बच्ची को भी एक बूंद दूध नहीं मिल पाया है। राजू शर्मा से पत्नी के विक्षिप्त होने का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि करीब 40 साल से वे अतर्रा कस्बे में रह रहे हैं। तीन साल पहले सड़क किनारे एक महिला घूम रही थी। मानसिक रूप से बीमार थी। मैं अकेला हूं, इसलिए मैंने मीरा से शादी कर ली।

राजू ने आगे बताया कि पिछले तीन दिनों से घर में चूल्हा नहीं जला। मेरे पास सिर्फ मतदाता पहचान पत्र है। राशन कार्ड न होने से कोई कोटेदार अनाज भी नहीं देता। अगर कोई अनाज देगा भी तो उसे खरीदने के लिए मेरे पास एक भी पैसा नहीं है। राजू ने बताया कि गुरुवार 16 अप्रैल को एलएलबी की पढ़ाई करने वाला संकल्प कुमार नाम का एक अपरिचित लड़का यहां से गुजर रहा था। हमारी हालत देखकर उन्होंने कुछ घर का राशन दे गया।

राजू रोते हुए कहते हैं कि दो बार तहसीलदार साहब के पास जाकर अपनी समस्या सुना चुका हूं, लेकिन साहब, तहसीलदार साहब ने लंच पैकेट तक नहीं दिलवाए। अतर्रा के उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) जेपी यादव ने कहा, “हमें इस परिवार के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। अब आपके माध्यम से जानकारी मिली है। मेरे व्हाट्सएप्प नम्बर में फोटो सहित पूरा डिटेल भेज दें। मैं किसी के माध्यम से राशन सामग्री भिजवाता हूं।”

सबसे ताज्जुब की बात है कि किसी भी अधिकारी या गरीब-असहायों को राशन बांटने वाले समाजसेवी की नजर इस दुधमुंही बच्ची पर नहीं पड़ी। मां को होस-हवास नहीं। लेकिन मां की गोद में चार माह की दुधमुंही बच्ची हर आने-जाने वाले की तरफ देखती रहती है। मानो यह बच्ची हर किसी से एक बूंद दूध मांग रही हो।