मुसीबत में मेयर
रुड़की नगर निगम के कई पार्षद अपने मेयर से खफा हैं। इस बीच एक जांच में मेयर को शासनादेश के उल्लंघन पर प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया तो पार्षदों को हमले का मौका मिल गया
रुड़की के मेयर गौरव गोयल को नगर निगम के प्रावधानों, शासनादेश का उल्लंघन किए जाने का प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। शासन ने मेयर को 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण दिए जाने का समय दिया है। जांच के पांच बिंदुओं में से मेयर को दो बिंदुओं पर दोषी माना गया है। गौरतलब है कि झबरेड़ा विधायक देशराज कणर्वाल ने नौ नवंबर 2020 को शहरी विकास विभाग को मेयर गौरव गोयल के खिलाफ पांच बिंदु आधारित शिकायती पत्र भेजा था। इस पर डीएम सी रविशंकर के आदेश पर एडीएम बीके मिश्रा ने नगर निगम पहुंचकर मामले की जांच की थी। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि निगम के कार्यों के निष्पादन और अधीक्षण नगर आयुक्त एवं कार्य समिति में निहित हैं। ऐसे में मेयर के अपने अधिकारों से बाहर जाकर निर्देश दिया जाना प्रतीत होता है। शिकायती पत्र के बिंदु संख्या दो में मेयर को दोषी नहीं माना गया है। बिंदु संख्या तीन में भी मेयर के रजिस्टर अभिलेखों में कटिंग करने को वित्तीय अनियमितता नहीं होना बताया है। हालांकि बिंदु संख्या चार में मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत किए जा रहे निर्माण कार्य में क्षेत्रीय विधायक को आमंत्रित नहीं किए जाने को शासनादेश का उल्लंघन माना गया है। शहरी विकास विभाग के प्रभारी सचिव विनोद कुमार सुमन द्वारा 13 जुलाई को मेयर गौरव गोयल को जारी कारण बताओ नोटिस में शासनादेश का उल्लंघन किए जाने पर प्रथम दृष्टया दोषी बताया गया है। शासन ने मेयर से 15 दिन के अंदर लिखित स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही ये भी स्पष्ट किया है कि स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं होने पर यह समझा जाएगा कि उक्त प्रकरण में उन्हें कुछ नहीं कहना है। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नगर निगम अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
मेयर को घेरेंगे पार्षद
शासन द्वारा मेयर को कारण बताओ नोटिस जारी करते ही पार्षदों का विरोधी खेमा सक्रिय हो गया है। विरोधी पार्षद मेयर गौरव गोयल को घेरने की तैयारी में जुट गए हैं। जानकारों की मानें तो यह प्रकरण मेयर के लिए बड़ी मुसीबत बनेगा और विरोधी इसे भुनाने में कोई कमी नहीं छोड़ेंगे। वहीं, इस प्रकरण को देखते हुए मेयर भी विरोधी खेमे को लेकर सतर्क हो गए हैं। नगर निगम के चुनाव के बाद गौरव गोयल के मेयर बनने के कुछ दिनों बाद ही कई करीबी पार्षद उनके विरोधी बन गए हैं। विरोधी पार्षदों ने मेयर को घेरने के लिए कोई भी मौका नहीं छोड़ा है। नाला गैंग से लेकर मेयर का अपने कर्मचारी के साथ हुए विवाद में विरोधी पार्षदों ने खुलकर विरोध किया है। इतना ही नहीं बोर्ड की बैठक में भी विरोधी पार्षदों ने मेयर की खिलाफत की है। वहीं अब जबकि मेयर शासनादेश का उल्लंघन करने के दोषी पाए गए हैं तो विरोधी गुट के पार्षदों को उन पर हमला करने का एक और मौका मिल गया है। इन पार्षदों ने मेयर को इस मामले में घेरने की तैयारी कर ली है। ये स्पष्ट है कि पार्षद हाथ लगे इस मौके को किसी भी स्थिति में गंवाने नहीं देंगे और मेयर के लेकर पूरी तरह घेरेंगे।
मेयर गौरव गोयल के शासनादेश के उल्लंघन में फंसते ही अन्य राजनीतिक दल भी मेयर को घेरने की तैयारी में जुट गए हैं। मेयर गौरव गोयल के विरोध में भाजपा में उनके विरोधी भी सक्रिय हो गए हैं। माना जा रहा है कि मेयर की पार्टी के कई नेता अंदरखाने उन्हें घेरने की तैयारी में जुट गए हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले दिनों में मेयर की मुसीबतें कम होने के बजाय बढ़ेंगी।
मंत्री से मेयर की शिकायत
जिलाधिकारी की ओर से कराई गई जांच में रुड़की मेयर को शासनादेश के उल्लंघन का दोषी पाए जाने के बाद कई पार्षद उनके खिलाफ हो गए। उन्होंने मेयर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीएम और मंत्री से मुलाकात कर मेयर के अधिकार सीज करने की मांग की है।
यह पुराना मामला है। मेरी ओर से इसमें पहले ही जवाब दे दिया गया है। इसमें अब नया जैसा कोई मामला नहीं है।
गौरव गोयल, मेयर
