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27 साल बाद सबसे बड़ा टिड्डी हमला, 50 हजार हेक्टेयर से अधिक फसल किया खराब

टिड्डी एक बार फिर चर्चा में है। क्योंकि अब टिड्डी दल ने भारत में घुसपैठ शुरू कर दी है। अब तक राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में 50 हजार हेक्टेयर से ज्यादा की फसल टिड्डी दल ने खराब कर दी है। उत्तर प्रदेश के भी कुछ हिस्सों में टिड्डी दल पहुंच गया है। वजन महज 2 ग्राम। खाती भी इतना ही है। लेकिन जब यही टिड्डी लाखों-करोड़ों की तादाद में झुंड बनाकर हमला कर दे, तो चंद मिनटों में ही पूरी की पूरी फसल बर्बाद कर सकती है। फसलों को बर्बाद करने वाली टिड्डों की ये प्रजाति रेगिस्तानी होती है, जो सुनसान इलाकों में पाई जाती है।

कहा जा रहा है कि ये दल अब दिल्ली की तरफ भी आ सकता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि टिड्डियों का झुंड हवा की दिशा में उड़ता है। माना जा रहा है कि अगर हवा दिल्ली की तरफ चली तो अगले कुछ दिनों में टिड्डियां दिल्ली पहुंच जाएंगी। अगर दिल्ली में टिड्डियों का हमला होता है, तो ये बहुत खतरनाक भी होगा, क्योंकि यहां का ग्रीन कवर 22% है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक टिड्डी दिनभर में 100 से 150 किमी तक उड़ सकती और 20 से 25 मिनट में ही पूरी फसल बर्बाद कर सकती है। इन्हीं सब कारणों से इसे 27 साल बाद सबसे बड़ा टिड्डी हमला माना जा रहा है।

आमतौर पर भारत में टिड्डियों का हमला राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में होता है। ये रेगिस्तानी टिड्डे होते हैं, इसलिए इन्हें ब्रीडिंग के लिए रेतीला इलाका पसंद आता है। इन टिड्डों का ब्रीडिंग पीरियड जून-जुलाई से अक्टूबर-नवंबर तक होता है। भारत में टिड्डियां पाकिस्तान के जरिए आती हैं। पाकिस्तान में ईरान के जरिए आती हैं। इसी साल फरवरी में टिड्डियों के हमलों को देखते हुए पाकिस्तान ने नेशनल एमरजेंसी घोषित कर दी थी। इसके बाद 11 अप्रैल से भारत में भी टिड्डियों का आना शुरू हो गया।

फसलों को टिड्डियों से बचाने का वैज्ञानिक तरीका तो किटनाशकों का छिड़काव है। लेकिन, हमारे किसान अपने तरीके भी आजमाते हैं। इस साल पहली बार छत्तीसगढ़ में भी टिड्डियों का हमला होने का अंदेशा है। लिहाजा, लोगों ने पहले ही उन्हें भगाने के लिए डीजे बुक करवा लिए हैं। कई जगहों पर किसान टिड्डियों को भगाने के लिए थालियां पीटते हैं। तेज गाने बजाते हैं।