भविष्य की जमीन बचाने को मंत्री पद दांव पर लगा बैठी हरसिमरतकौर
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव में डेढ़ साल से भी कम का समय बचा है और इस समय पंजाब की मुख्य पार्टी अकाली दल एनडीए का घटक दल के तौर पर काम कर रही है। इसी दौरान किसानों के मुद्दे प्रमुखता से उठ रहे हैं। कल ही केंद्र सरकार ने किसानों के 3 अध्यादेशों को संसद में पास किया है । इसको लेकर केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दे दिया है।
हालांकि बादल अभी भी एनडीए के घटक दल का ही सदस्य बने रहेंगी। लेकिन सवाल यह है कि ऐसे समय में जब केंद्र में मजबूती से एनडीए की सरकार चल रही है सरकार को कोई खतरा नहीं है वह अपने बहुमत की वजह से ही किसानों के तीन अन्य देशों को पास करा चुकी है तो शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ने अपने मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दे दिया।
इस सवाल के मूल में कई जवाब दिखाई देते हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण जवाब वह है जो शिरोमणि अकाली दल को वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पंजाब की जनता को देना है। मतलब साफ है कि पंजाब की जनता उनसे किसानों से जुड़े मुद्दे पर बात करती। जिसमें वह जवाब देने में अपने आप को असहज महसूस कर रही होंगी।

यह भविष्य का सवाल है। यानी कि भविष्य में पंजाब के किसान शिरोमणि अकाली दल की जमीन खिसका सकते हैं। क्योंकि पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है। यहां बहुमत में किसानों का वर्चस्व है। किसान फिलहाल केंद्र सरकार के अध्यादेश के खिलाफ तन कर खड़े हुए हैं ।
प्रदेश में किसान अध्यादेशो का जमकर विरोध हो रहा है। धरना प्रदर्शन किए जा रहे हैं। यहा तक कि सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने इसे मुख्य मुद्दा बनाया हुआ है। ऐसे में अगर शिरोमणि अकाली दल की सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल अध्यादेश पास होने पर अपनी सहमति व्यक्त कर देती तो उन्हें इसकी कीमत वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में निश्चित तौर पर चुकानी पड़ती। शायद यही वजह है कि भविष्य की जमीन को बचाने के लिए हरसिमरत कौर ने अपने मंत्री पद को दांव पर लगा दिया।
I have resigned from Union Cabinet in protest against anti-farmer ordinances and legislation. Proud to stand with farmers as their daughter & sister.
— Harsimrat Kaur Badal (@HarsimratBadal_) September 17, 2020
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने कल तीन अध्यादेश पास किए हैं। यह तीन अध्यादेश किसानों से संबंधित है। यह अध्यादेश उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश 2020, किसान सशक्तिकरण और संरक्षण अध्यादेश तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन ) आदि है । अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल का इस संबंध में कहना है कि उनकी पार्टी से इन अध्यादेश को लेकर कोई संपर्क नहीं किया गया । यहां तक कि उन्हें अध्यादेश पास होने से पहले विश्वास में नहीं लिया गया ।
जबकि हरसिमरत कौर ने इसे लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि पंजाब और हरियाणा के किसान इससे खुश नहीं है। फिलहाल अपने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद हरसिमरत कौर बादल ने एक ट्वीट किया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि मैंने केंद्रीय मंत्री पद से किसान विरोधी अध्यादेश और बिल के खिलाफ इस्तीफा दे दिया है। किसानों की बेटी और बहन के रूप में उनके साथ खड़े होने पर मुझे गर्व है।
