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दिल्ली में एक बार फिर केजरीवाल की पार्टी फेरेगी सब पर झाडू

टाइम्स नाऊ के सर्वे को बाकि के द्वारा किए गए सर्वे में ज्यादा विश्वसनीय माना जाता है। हाल ही में किए गए उसके दिल्ली विधानसभा के सर्वे की माने तो दिल्ली में एक बार फिर केजरीवाल की पार्टी अन्य सभी पार्टियाँ के चुनाव जीतने के सपने पर झाडू फेर रही है। हालांकि इसकी संभावना पहले से ही की जा रही थी। लेकिन अब टाइम्स नाऊ के सर्वे ने भी इस पर अपनी मोहर लगा दी है।

टाइम्स नाऊ द्वारा हाल में कराए गए नए सर्वे की माने तो दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी 54 से 60 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बडी पार्टी बन सकती है। सर्वे के अनुसार बीजेपी को इन चुनावों में 10 से 14 सीटें और कांग्रेस को केवल दो सीटों से ही संतोष करना पड़ा सकता है। सर्वे में यह बात आई है कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को 52 प्रतिशत वोट, भारतीय जतना पार्टी को 34 प्रतिशत और कांग्रेस को केवल चार प्रतिशत वोट मिलने की संभावना है।

अगर सर्वे को देखे तो इसका मतलब यह है कि दिल्ली की जनता पर भाजपा और कांग्रेस के चुनावी वादों का कुछ ज्यादा प्रभाव नही पड़ने वाला है। इस सर्वे की माने तो दिल्ली में अरविंद केजरीवाल एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनने में सफल ही जाएंगे। याद रहे कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव आठ फरवरी को होंगे। और परिणाम 11 फरवरी को सामने आएंगे।

सीएए पर कराए गए सर्वे से पता चलता है कि इस बार 71 प्रतिशत ने विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के लिए समर्थन किया है। जो मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए नागरिकता को आसान बनाने का प्रयास करता है।

जबकि दूसरी तरफ दिल्ली के 51 प्रतिशत लोगों का मानना ​​है कि शाहीन बाग में सीएए का विरोध अनुचित है। हालांकि यह तो 8 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद 11 को मतों के परिणाम से पता चल जाएगा की किसकी सरकार बनने जा रही है। लेकिन यह सच है कि शाहीन बाग दिल्ली में एक चुनावी मुद्दा बन गया है।

सर्वे के अनुसार केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को 52% वोट मिलने का अनुमान है जबकि, भाजपा को 34% वोट मिल सकता है। अगर एक्जिट पोल के अनुमान सीटों में तब्दील होते हैं तो आम आदमी पार्टी के खाते में 60 तक सीटें मिल सकती हैं। देखा जाए तो 2015 चुनाव के मुकाबले आप के वोट शेयर में 2.5 फीसदी का नुकसान है जबकि बीजेपी को भी 1.7 प्रतिशत वोटों का नुकसान होता दिख रहा है।