ÓññÓñ¼ÓÑìÓñ▓ÓÑÇÓñùÓÑÇ Óñ£Óñ«Óñ¥Óññ ÓñòÓÑÇ IAS ÓñàÓñºÓñ┐ÓñòÓñ¥Óñ░ÓÑÇ Óñ¿ÓÑç ÓñòÓÑÇ ÓññÓñ¥Óñ░ÓÑÇÓñ½, Óñ©Óñ░ÓñòÓñ¥Óñ░ Óñ¿ÓÑç Óñ¡ÓÑçÓñ£Óñ¥ ÓñòÓñ¥Óñ░Óñú Óñ¼ÓññÓñ¥Óñô Óñ¿ÓÑïÓñƒÓñ┐Óñ©

तब्लीगी जमात की IAS अधिकारी ने की तारीफ, सरकार ने भेजा कारण बताओ नोटिस

कर्नाटक सरकार ने प्लाज्मा डोनेट करने वाले तब्लीगियों की तारीफ करने वाले एक आईएएस अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी है। आईएएस अधिकारी मोहम्मद मोहसिन ने पिछले दिनों तब्लीगी जमात के सदस्यों की तारीफ की थी। उन्होंने तारीफ करते हुए एक ट्वीट किए थे। अब उनसे तब्लीगी जमात की गई तारीफ के कारणों का जवाब कर्नाटक सरकार मांग रही है।

नोटिस में सरकार ने कहा, “इस ट्वीट को मीडिया में मिले निगेटिव रिऐक्शन का सरकार ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। कोविड-19 गंभीर मामला है और इससे निपटने के लिए संवेदनशीलता बेहद जरूरी है।” आईएएस अधिकारी मोहम्मद मोहसिन पिछड़ी जाति कल्याण विभाग के सचिव के रूप में कार्यरत हैं। वे साल 1996 के आईएएस बैच के हैं।

मोहसिन मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। उन्होंने पिछले दिनों एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने लिखा, “केवल दिल्ली में 300 से अधिक ‘तब्लीगी हीरो’ देश की सेवा के लिए प्लाज्मा दान कर रहे हैं। लेकिन ‘गोदी मीडिया’ इन हीरो के मानवता कार्य को नहीं दिखाएगा।”

ऐसा पहली बार नहीं है जब मोहसिन चर्चा में आएं हैं। उन्होंने इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान बतौर चुनाव पर्यवेक्षक के नाते पीएम मोदी के हेलीकॉप्टर की जांच करने की कोशिश की थी। जिससे चुनाव आयोग ने उन्हें निलंबित कर दिया था।

गौरतलब है कि मार्च में तबलीगी जमात के लोग कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लोग जुटे थे, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल हुए थे। उनमें कुछ कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इस मामले को लेकर देश में काफी बवाल हुआ। कोरोना संक्रमण से ठीक हुए जमातियों ने अपना ब्लड प्लाज्मा डोनेट की।

मौलाना मोहम्मद साद को भगोड़ा साबित किया गया। ‘कोरोना जिहाद’ और ‘मौलाना आया बम लाया’ जैसे हेडलाइन से न्यूज़ चैनलों ने हिन्दू-मुसलमान करने की कोशिश की। लेकिन तब्लीगी जमात के मुखिया मौलान मोहम्मद साद कंधावली ने न केवल सामने आएं बल्कि कोरोना संक्रमण से ठीक हुए जमातियों को अपना ब्लड प्लाज्मा डोनेट करने की अपील की। ताकि दूसरे लोग इस महामारी से ठीक हो सके। इसके बाद आकर कई जमातियों ने प्लाज्मा दान किया।