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भारत अभी कोरोना संक्रमण के तीसरे चरण से दूर: ICMR

देश में पहली बार 29 मार्च को कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या एक ही साथ ३० फीसदी से अधिक हो गई। इसी के साथ कुल मरीजों की संख्या २२१ हो गई। यही संख्या शुक्रवार को ७२४ थी जो २४ घंटे में में ही बढ़कर एक हजार के पार चली गई। वहीं इससे पहले २१ मार्च को एक ही दिन में मरीजों की संख्या तुलनात्मक ४० फीसदी यानी ९२ हो गई थी ।

ICMR ने क्या कहा?

अभी तक राहत की खबर यह है कि भारत अभी संक्रमण के तीसरे चरण में नहीं आया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिक डॉ रमन आर गंगाखेड़कर ने संक्रमण के सामुदायिक प्रसार से स्पष्ट इनकार किया है। वह कहते है कि अलग से रैंडम सैंपलिंग आवश्यक नहीं है। कोरोना के सामुदायिक प्रसार के अभी तक कोई सुबूत नहीं मिले है। निरंतर नए लेब को मंजूरी दी जा रही है। अमेरिका द्वारा अभी तक पांच लाख किट भेजी जा चुकी है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन की ओर से कहा गया है कि दिल्ली एम्स में कोरोना केंद्र बना दिया गया है, साथ ही देश भर के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टॉफ को यहाँ ऑनलाइन ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इस समय भारत कोरोना वायरस के सामुदायिक संक्रमण के स्तर पर खड़ा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और ICMR ने जबकि यह तक कहा है कि देश में सामुदायिक संक्रमण के अब तक कोई सबूत नहीं मिले हैं, परन्तु संक्रमित लोगों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।

इस बात को ध्यान में रखकर सरकार हर संभव परिस्तिथि से निपटने के लिए तैयार है। देश की स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनयादी सुविधाओं को मजबूत बनाने के साथ साथ सभी राज्यों में संक्रमित मरीजों के लिए विशेष अस्पताल भी बनवाए जा रहे है। साथ ही साथ वेंटिलेटर भी मंगवाए जा रहे हैं। संक्रमण से बचने के लिए रेलवे और सेना के संसाधनों के प्रयोग की भी योजना बनाई जा रही है। ब्यूरो सेना द्वारा २८ सर्विस हॉस्पिटल भी तैयार किए जा रहे है। इसके अतिरिक्त सेना के पांच अस्पतालों में संक्रमण के लेब टेस्टिंग का काम पहले से ही जारी था। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को वेंटिलेटर उत्पादन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

DRDO और निजी अस्पताल की मदद

साथ ही साथ DRDO ने अपनी ओर से इस जंग में उतरे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित सूट के साथ संक्रमण को रोकने के सैनिटाइजर और फेस मास्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। रेलवे भी हर संभव मदद देने का प्रयास कर रही है। रेलवे ने अब ट्रेन के सामान्य कोच में आइसोलेशन वार्ड तैयार कर दिए हैं।

प्राइवेट अस्पताल भी सुविधाएं बेहतर करने में लगे हुए हैं और कोरोना वायरस से निपटने के लिए विशेष टीमें भी बना रहे हैं। मैक्स हेल्थकेयर के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर संदीप बुद्धिराजा ने जानकारी दी कि ग्रेटर नोएडा यूनिट में कोरोना वायरस मरीजों के लिए अलग से सुविधाएं की जा रही हैं। इसमें 200 बेड, 40 आईसीयू बेड और 160 वार्ड की सुविधा हैं। मैक्स के साकेत और पड़पड़गंज स्थित अस्पतालों में और बीएलके अस्पताल में संक्रमित मरीजों के लिए अलग वार्ड तैयार किए गए है। अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने 26 मार्च को प्रोजेक्ट कवच की शुरुआत की है जिसमें संक्रमण के सभी पक्षों स्क्रीनिंग, टेस्टिंग, सूचना आदि को शामिल किया गया है।

चेयरमैन प्रताप सी रेड्डी ने बताया कि ग्रुप जल्द ही प्रोजेक्ट स्टे आई भी लॉन्च करने वाला है। इसमें आइसोलेशन के लिए होटल और होस्टलों में मेडिकल रूम बनाने का प्रावधान है। ये सुविधा चेन्नई, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता, बंगलूरू और दिल्ली में होगी। हर शहर में 50 बेड होंगे और हर तीन दिन में 50 नए बेड जोड़े जाएंगे। प्रोजेक्ट के तहत पूरे देश में 500 मेडिकल रूम बनाने की योजना का लक्ष्य रखा गया है।