कुंभ की आड़ में अवैध खनन
कुंभ तैयारियों की हकीकत/भाग-पांच
बेहद हास्यास्पद है कि एक तरफ केंद्र की भाजपा सरकार कुंभ क्षेत्र को खनन मुक्त रखने का वादा करती है और दूसरी तरफ उत्तराखण्ड की भाजपा सरकार कुंभ के दौरान भी गंगा और उसकी सहायक नदियों में अवैध खनन पर अंकुश नहीं लगाना चाहती। नतीजा यह है कि कुंभ कार्यों और निर्माण कार्यों के बहाने नदियों का बड़ी बेतरतीबी से छलनी किया जा रहा है। मातृ सदन के संतों ने इसके खिलाफ बाकायदा अनशन शुरू कर दिया है। स्वामी शिवानंद ने कुंभ में प्राण त्यागने का संकल्प लिया है
कुंभ की तैयारियां में सरकार और प्रशासन पूरी तरह फेल हुए हैं। कुंभ कार्यों में भ्रष्टाचार की पोल खुद खुल रही है। एक तरफ कुंभ पर भ्रष्टाचार की छाया पड़ चुकी है, तो दूसरी तरफ कुंभ से जुड़े निर्माण कार्यों की आड़ लेकर कुंभ क्षेत्र में नदियों से खनन कर करोड़ों के वारे-न्यारे किये जा रहे हैं। खनन माफिया बड़ी-बड़ी पोकलैंड मशीनों के साथ गंगा में बड़ी बेतरतीबी से खनन कर रहे हैं। कुंभ क्षेत्र में वन विकास निगम के संरक्षण में शुरू कराये गए खनन के खिलाफ मातृ सदन के संतों द्वारा एक बार फिर आवाज बुलंद की है। मातृ सदन के स्वामी आत्मबोधनानंद 23 फरवरी से अनशन पर हैं, तो मातृ सदन के परमाध्यक्ष शिवानंद महाराज ने भी कुंभ क्षेत्र में खनन पर रोक न लगने की दशा में कुंभ के दौरान ही अनशन किया हुआ है। उन्होंने अपने प्राण त्यागने का संकल्प लिया है। यह हाल तब है जब केंद्र सरकार रायवाला से भोगपुर तक के कुंभ क्षेत्र को खनन मुक्त रखने का वादा करते हुए इस क्षेत्र में खनन पर पूर्ण रूप से रोक लगाए जाने का निर्देश पूर्व में ही जारी कर चुकी है।
पिछले वर्ष सितंबर 2020 में कुंभ क्षेत्र को खनन मुक्त बनाए रखने की मांग को लेकर अनशन करने वाले मातृ सदन के संतों की मांगों पर विचार करते हुए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा की ओर से जारी पत्र के माध्यम से मातृ सदन को अवगत कराया गया था कि पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रलय को सख्ती के साथ निर्देश दिए गए हैं कि कुंभ क्षेत्र में खनन पर पूर्णतः रोक लगाई जाए। यही नहीं केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और नेशनल मिशन फाॅर क्लीन गंगा की ओर से भी कुंभ क्षेत्र को खनन मुक्त रखे जाने के दावे किए गए थे। उसी दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने राज्य सभा में मामला उठाए जाने पर केंद्र की मोदी सरकार द्वारा राज्यसभा में भी मातृ सदन की इस मांग को मानते हुए कुंभ क्षेत्र को खनन मुक्त रखने का वादा किया। जल शक्ति राज्य मंत्री की ओर से यह वादा किया गया था। बावजूद इसके केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए तमाम आदेशों-निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए उत्तराखण्ड सरकार ने केंद्र सरकार ने अपनी मनमानी कर डाली।
राज्यसभा में केंद्र सरकार के किए गए वादों के विपरीत उत्तराखण्ड सरकार ने रायवाला से भोगपुर तक के कुंभ क्षेत्र में खनन को मंजूरी दे दी है। यही नहीं कुछ स्थानों पर तो हरिद्वार ग्रामीण से भाजपा विधायक स्वामी यतीश्वरानंद ने खनन के निकासी गेटों का फीता काटकर शुभारंभ भी किया। कुंभ क्षेत्र में रात-दिन नदियों का सीना चीर कर किए जा रहे खनन को लेकर सरकार की मंशा पर ही सवाल उठ रहे हैं? कंुभ क्षेत्र में खनन खोले जाने को लेकर जो तर्क वन विभाग द्वारा दिए गए उन्हें लोग पचा नहीं पा रहे हैं। वन विभाग के उप वन संरक्षक द्वारा दिए गए तर्कों की बात करें तो लोग यही मान रहे हैं कि हरिद्वार वन प्रभाग द्वारा हास्यास्पद आदेश जारी करते हुए गंगा और सहायक नदियों में कुंभ क्षेत्र में खनन की स्वीकति प्रदान करने की जल्दबाजी की गई है। उप वन संरक्षक द्वारा खनन किऐ जानेे को लेकर जारी स्वीकति पत्र की भाषा ही तमाम खेल की पोल खोलने के लिए काफी है। अफसोसजनक बात यह है कि उप वन संरक्षक की स्वीकøति जारी होते ही खनन का खेल भी शुरू हो गया जो नियम विपरीत रात-दिन धड़ल्ले से जारी है। उप वन संरक्षक हरिद्वार द्वारा जारी स्वीकøति के पत्रांक संख्या 4705/2-3 हरिद्वार दिनांक 25 फरवरी 2021 के अनुसार कुंभ से जुड़े निर्माण कार्यों, राज्य में संचालित निर्माण कार्य, चारधाम परियोजना, आॅल वेदर रोड, ऋषिकेश करर्णप्रयाग रेल लाइन निर्माण परियोजना के लिए अत्याधिक मात्रा में उप खनिज की आवश्यकता होने के दृष्टिगत रायवाला से भोगपुर तक गंगा नदी तल क्षेत्र में स्वीकृत पट्टðों से खनन की स्वीकøति प्रदान की जाती है। उप वन संरक्षक हरिद्वार द्वारा कुंभ क्षेत्र में खनन की स्वीकøति के लिए जारी पत्र में दिए गए तर्क पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि उप वन संरक्षक द्वारा आखिर किन लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए इस प्रकार की स्वीकøति कुंभ क्षेत्र व गंगा की सहायक नदियों में खनन के लिए जारी की गई? उप वन संरक्षक द्वारा खनन की स्वीकøति में उल्लेख किया गया है कि कुंभ से जुड़े निर्माण कार्य के लिए उप खनिज की आवश्यकता है। यहां यह बताना जरूरी होगा की कुंभ से जुड़े तमाम स्थाई निर्माण कार्य फरवरी से पूर्व ही पूर्ण किए जा चुके हैं। यही नहीं चारधाम परियोजना अथवा ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना या फिर आॅल वेदर रोड परियोजना के लिए कुंभ क्षेत्र से उप खनिजों के उठान का दावा किसी के भी गले नहीं उतर रहा है। दरअसल, खनन के इस खेल में तिजोरियां भरने में लगे खनन माफिया और अधिकारियों के नापाक गठजोड़ का अंदाजा भी इसी बात से लगाया जा सकता है कि 25 फरवरी को उप वन संरक्षक द्वारा जारी स्वीकति से पूर्व ही कुंभ क्षेत्र अंतर्गत नदियों से किए जाने वाले खनन की पटकथा वन विभाग के अधिकारियों द्वारा तैयार कर ली गई थी। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार उप वन संरक्षक द्वारा भले ही 25 फरवरी को खनन किए जाने की स्वीकøति जारी की गई परंतु प्रभागीय लैंगिक प्रबंधक हरिद्वार द्वारा इसकी तैयारी 2 सप्ताह पूर्व ही की जा रही थी। ‘दि संडे पोस्ट’ के हाथ लगा प्रभागीय लैंगिक प्रबंधक हरिद्वार का पत्रांक संख्या 2419/खनन जनरल/12/2/21 काफी अहम है। इस पत्र को अति आवश्यक बताते हुए इसमें लिखा गया कि गंगा क्षेत्र बिशनपुर, गंगा चिड़ियापुर, गंगा श्यामपुर, गंगा भोगपुर एवं टांडा भागमल के लिए चार खनन निकासी गेट बनाए जा रहे हैं। इसके लिए वह पत्र में चार अनुभाग अधिकारियों की तैनाती करते हुए स्पष्ट लिखते हैं कि गंगा नदी के खनन के गेटों से उप खनिज निकासी का कार्य प्रारंभ होना प्रस्तावित है, जिसके लिए प्रभागीय लैंगिक प्रबंधक हरिद्वार अनुभाग अधिकारियों से खनिज निकासी को लेकर की जाने वाली व्यवस्थाएं पूर्ण किए जाने का निर्देश जारी कर रहे है। प्रभागीय लैगिंक प्रबंधक और उप वन संरक्षक कार्यालय के बीच खनन खोलने को लेकर पक रही खिचड़ी सीधे-सीधे बड़े खेल की ओर इशारा कर रही है। 25 फरवरी को उप वन संरक्षक हरिद्वार द्वारा जारी स्वीकृति के आधार पर खनन माफिया खुलेआम कुंभ के निर्माण कार्यों की आड़ में दिन-रात कुंभ क्षेत्र में बहने वाली गंगा नदी व सहायक नदियों का सीना चीरने में लगे हुए हैं। खनन के इस खेल में रायवाला से भोगपुर तक के कुंभ क्षेत्र की नदियां हांे या फिर श्यामपुर थाना अंर्तगत कोटावाली या रवासन नदी सभी जगह नियम विपरीत खनन का खेल जारी है। तमाम नदियों में धरातलीय खनन के स्थान पर करीब 10-10 फ्रट गहरे गड्ढे खोद डाले गए हंै। वन विभाग द्वारा तय की गई समय सीमा से इतर भी रात-दिन खनन का खेल जारी है। कोटावाली एवं रावासन की बात करें तो दोनों नदियों से उपखनिज की निकासी के लिए वन विकास निगम द्वारा चार गेट स्थापित कर निकासी की जा रही है। खनन को लेकर वन विकास निगम द्वारा सीमांकन कर निशानी के तौर पर जो पिलर लगाए गए थे माफियाओं ने उन पिलर को ही उखाड़ कर फेंक दिया है। जहां 5 फुट तक खनन की स्वीकृति जारी की गई थी उस स्थान पर 10 फुट गहरे गढ्डे वन विकास निगम द्वारा किए गए सीमांकन को मुंह चिढ़ाते नजर आ रहे हैं। मातृ सदन के संत कुंभ क्षेत्र में खनन पर रोक को लेकर एक बार फिर बड़े बलिदान पर अडिग हैं, तो वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन कंुभ क्षेत्र में खनन पर रोक को लेकर कंुभकर्णी नींद से जागने को तैयार नहीं है।
स्वामी शिवानंद ने लिया जीवन त्यागने का संकल्प हरिद्वार। मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद महाराज और मातृ सदन के संतों द्वारा कंुभ क्षेत्र में होने वाले खनन के विरुद्ध संघर्ष का एक लंबा इतिहास रहा है। इस दौरान मातृ सदन के दो संत स्वामी निगमानंद और स्वामी सानन्द अपने जीवन की आहुति तक दे चुके हैं। अवैध खनन के खिलाफ मातृ सदन के संघर्ष का ही नतीजा है कि खनन माफिया उनके संतों के विरुद्ध तरह-तरह की साजिश रचते हैं। स्वामी शिवानन्द महाराज सहित मातृ सदन के अन्य संतों के जीवन को भी खतरा बना रहता है। खतरे के दृष्टिगत राज्य सरकार द्वारा काफी समय से स्वामी शिवानन्द महाराज को सुरक्षाकर्मी भी उपलब्ध कराया गया था। परन्तु अब राज्य सरकार ने एसएसपी और डीएम हरिद्वार की एक कथित रिपोर्ट पर स्वामी शिवानन्द की सुरक्षा हटा ली है। सुरक्षा हटाए जाने पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। सूचना अधिकार में मिली जानकारी के अनुसार एसएसपी व डीएम हरिद्वार द्वारा 25 फरवरी 2020 को जिस थाना कनखल की जांच आख्या का हवाला देते हुए स्वामी शिवानन्द की जान को कोई खतरा न बताते हुए उनकी सुरक्षा हटाए जाने की संस्तुति की गई, दरअसल 25 फरवरी से पूर्व इस प्रकार की कोई जांच आख्या थाना कनखल से फरवरी माह में प्रेषित ही नहीं की गई। 
‘दि संडे पोस्ट’ के पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार थानाध्यक्ष कनखल ने 2 मार्च 2020 को स्वामी शिवानन्द की सुरक्षा के संबंध में एसएसपी हरिद्वार को पत्र के माध्यम से जांच आख्या प्रेषित की। जिससे साफ होता है कि एसएसपी और डीएम स्तर से ही स्वामी शिवानन्द की सुरक्षा हटाने को लेकर प्रपंच रचा गया। क्योंकि 25 फरवरी अथवा उससे पूर्व थाना कनखल से इस प्रकार की कोई जांच आख्या प्रेषित ही नहीं की गई। स्वामी शिवानन्द महाराज की सुरक्षा हटाने को लेकर जिस प्रकार पुलिस विभाग में साजिश की गई उस पर स्वामी शिवानन्द ने हमला बोलते हुए इसके लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने कहा कि मातृ सदन किसी भी रूप में गंगा को अपनी मांगों से कतई भी पीछे नहीं हटेगा। कुंभ क्षेत्र में खनन के खिलाफ स्वामी आत्मबोधानंद का अनशन 23 फरवरी से अनवरत जारी है। 8 मार्च से आत्मबोधानंद ने जल भी त्यागने की घोषणा करते हुए अपने तप को और आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। स्वामी शिवानन्द महाराज ने कुंभ क्षेत्र में केंद्र सरकार के वादे अनुसार पूर्णरूप से प्रतिबंध न लगाए जाने पर कुंभ के दौरान ही अपना जीवन त्यागने का बड़ा संकल्प लिया है। इसके बावजूद सरकार अनशन के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रही है। 23 फरवरी से अनशनरत स्वामी आत्मबोधानंद के अनशन को लेकर राज्य सरकार अथवा जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई कदम न उठाना सरकार की संवेदनहीनता को बयान करने के लिए काफी है।
बात अपनी-अपनी
कुंभ के दौरान खनन खोल दिया है। मातृ सदन के निकट स्थाई पुल का निर्माण होने से जंगल नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है। अरे इन मूर्खों ने कभी कुम्भ देखा भी है। आत्मबोधानंद तपस्या पर है। हमने चेतावनी दी है, लेकिन तपस्या को लेकर सरकार के कानों पर जूं नही रेंग रही है। हम मरने की कगार पर हैं, पर सरकार सुन नहीं रही है। कुंभ को दिव्य भव्य का नाम दिया हुआ है। कहां है दिव्य भव्य? इतने बड़े-बड़े पुल बना दिए हैं। कुंभ निधि में बंदरबांट चल रही है। पीएमओ स्तर से खनन पर रोक के निर्देशों का भी पालन नहीं हो रहा है। गंगा के अस्तित्व को समाप्त किए जाने की साजिश है।
शिवानन्द महाराज, अध्यक्ष मातृ सदन हरिद्वार
नियम के विपरीत खनन होने का सवाल है तो ये वन विकास निगम की जिम्मेदारी है। मैंने खनन को लेकर वन विकास निगम को चिट्ठी भी लिखी है। मैं फिर दिखवाता हूं। हमारी ओर से भले ही स्वीकृति जारी की गई, लेकिन अवैध अथवा नियम विपरीत खनन को रोकने की जिम्मेदारी वन विकास निगम की है। लेकिन आपने बताया है तो औचक निरीक्षण कर कार्यवाही की जाएगी।
नीरज शर्मा, डीएफओ हरिद्वार वन प्रभाग
