‘घनश्याम’ की आस में घनसाली
टिहरी गढ़वाल की घनशाली विधानसभा क्षेत्र अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए जानी जाती है। यहां स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर स्थानीय निवासियों के साथ- साथ देशभर में हिंदू धर्म के अनुयायियों में बड़ी आस्था का केंद्र है। चारधाम यात्रा के मार्ग में स्थित इस विधानसभा सीट में विकास का भारी अभाव है। अस्पताल और शिक्षा यहां भगवान भरोसे है। उद्योग-धंधे न के बराबर हैं। रोजगार का मुख्य साधन खेती, बागवानी और निजी वाहन चालन है। सुरक्षित सीट होने के चलते यहां भाजपा और कांग्रेस में टिकट के दावेदारों की लंबी कतार नहीं है। क्षेत्रीय दल यहां पर हाशिए पर हैं। लेकिन यहां मुकाबला त्रिकोणीय होता नजर आ रहा है
तकरीबन 2 लाख की आबादी और 1 लाख मतदाताओं वाली घनशाली विधानसभा का सूमचा क्षेत्र दो नगर पंचायतों घनशाली और चमियाला के साथ-साथ 11 पट्टी क्षेत्रों की कुल 189 ग्राम पंचायतों में सिमटा हुआ है। पृथक उत्तराखण्ड राज्य गठन बाद घनशाली विधानसभा सीट बनाई गई थी। अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय यह देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा थी। खास बात यह है कि घनशाली विधानसभा का समूचा क्षेत्र महज एक विकासखण्ड भिंलगना तक ही है। यानी जितना क्षेत्रफल विधानसभा का है उतना ही क्षेत्रफल भिंलगना विकासखण्ड का है। आज भी राज्य में सबसे ज्यादा ग्राम पंचायतों वाली विधानसभा घनशाली को माना जाता है। समूची विधानसभा पर्वतीय और प्राकृतिक सांैदर्य से भरपूर होने के साथ-साथ अति दुर्गम भी है।
इस क्षेत्र ने कई राजनीतिक हस्तियों को जन्म दिया है। उत्तराखण्ड के गांधी के नाम से विख्यात स्वर्गीय इंद्रमणी बडोनी इसी क्षेत्र के ग्यारगांव पट्टी के अखोड़ी गांव में पैदा हुए थे। प्रदेश के वरिष्ठ नेता मातबर सिंह कंडारी, मंत्री प्रसाद नैथानी भी इसी क्षेत्र में जन्में हैं। प्रसिद्ध खतलिंक ग्लेशियर का मार्ग भी इसी क्षेत्र से होकर जाता है। प्रदेश की तिवारी सरकार के समय पहली निजी क्षेत्र की भिंलगना जल विद्युत परियोजना भी यहीं स्थापित की गई थी।
राजनीतिक इतिहास की बात करें तो घनशाली क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा के साथ ही जनता दल और एनसीपी एवं भाकपा के अलावा निर्दलियों ने भी इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्र होने के साथ इस क्षेत्र में समस्याओं का अंबार है। पलायन ओैर बेरोजगारी इस क्षेत्र की बड़ी समस्या बनी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि जहां यह क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है, वहीं इस क्षेत्र का नैलचामी पट्टी क्षेत्र को छोटा जापान भी कहा जाता है। इस क्षेत्र के अनेक युवा जापान में होटल आदी संस्थानों में काम करते हैं जिसके चलते उनके परिवार इस क्षेत्र में खासे सम्पन्न है और इन परिवारों में ज्यादातर देहरादून आदी नगरों में अपने आशियाना बना रहे हैं।
पलायन का एक सबसे बड़ा कारण बेहतर स्वास्थ्य और बेहतर शिक्षा की कमी है। इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए केवल एक बाल गंगा डिग्री काॅलेज है। समूचे क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा का कोई संस्थान नहीं है। घनशाली से 25 किमी दूर चिरबिटिया में एक आईटीआई हैे जिसमें कई ट्रेड बंद पड़े हुए हैं। कभी इस क्षेत्र के लिए वरदान रहा 30 बिस्तरों वाला चमिलाया स्थित बालेश्वर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लंबे अर्से से खुद बीमार चल रहा है। पीपीपी मोड में इस अस्पताल का संचालन किया जा रहा है लेकिन यह केवल रेफर सेंटर के तौर पर ही काम कर रहा है। क्षेत्र के पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष गैना सिंह पंवार बताते हैं कि जब यह अस्पताल पीपीपी मोड मंे नहीं था तक यह इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा वरदान बना रहा। अस्पताल में डाक्टर और स्टाफ भरपूर थे लेकिन जेैसे ही पीपीपी मोड में दिया गया। तब से इस अस्पताल के हालत खराब होती चली गई।

2022 के विधानसभा चुनाव में घनशाली सीट पर मुख्यतः मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के इर्द-गिर्द ही दिखाई दे रहा है। अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट होने से जहां पहले भाजपा को मजबूत नेता की कमी दिखाई देती थी वहीं अब स्थितियों में भारी बदलाव देखने को मिल रहा है। भाजपा का अपना संगठन और कार्यकर्ताओं की मजबूत फौज इस क्षेत्र में पार्टी का जनाधार बढ़ा रही हैं।
भाजपा से अखोड़ी गांव के निवासी वर्तमान विधायक शक्तिलाल शाह की ही दावेदारी सबसे मजबूत बताई जा रही है। हालांकि चर्चा यह भी है कि शक्तिलाल शाह सेे स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता और संगठन में कुछ नाराजगी भी है जिसके चलते माना जा रहा हैे कि शक्तिलाल शाह का टिकट कट सकता है ओैर किसी नए चेहरे को भाजपा चुनावी मेैदान में उतार सकती है। इस कारण भाजपा में अनेक दावेदार सक्रिय हो गए हैं। सत्ताधारी विधायक के प्रति नाराजगी भांपते हुए स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहली बार घनशाली पहंुचे और करोड़ों की योजनाओं का शिलान्यास और घोषणाएं की। मुख्यमंत्री के इस कदम को शक्तिलाल शाह के प्रति मतदाताओं और भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी को कम करने का पर्याय के तौर पर देखा जा रहा है।
भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दर्शन लाल शाह भाजपा के आर्थिक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक हैं। मूलतः परम्परागत लोक वाद्य वादक पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले दर्शन लाल होटल उद्योग से जुड़े हैं। जापान में अजंता एलोरा रेस्त्रां की शृ्रंखला चलाते हैं। अनेक राज्यों में उत्तराखण्ड के परंपरागत व्यंजनों के प्रचार-प्रसार के लिए फूड फेस्टिवल का आयोजन कर चुके हंै। साथ ही उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, गंधर्व विद्या एवं हस्तशिल्प के क्षेत्र में विशेष कार्य कर चुके दर्शन लाल 2022 के चुनाव में भाजपा के दूसरे सबसे बड़े दावेदार माने जाते हैं।
कांग्रेस पार्टी में भीमलाल आर्य और धनीलाल शाह ही सबसे बड़े दावेदार के तौर पर सामने आए हंै। जहां भीम लाल एक बार भाजपा ओैर एक बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं तो वहीं धनीलाल शाह भी 1989 और 2012 और 2017 में चुनाव लड़ चुके हैं।
उच्च शिक्षा प्राप्त धनीलाल शाह राज्य आंदोलनकारी रहे हंै। स्वर्गीय इंद्रमणि बड़ोनी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड केन्द्रीय संघर्ष समिति में सदस्य रह चुके हैं। उत्तराखण्ड राज्य योजना आयोग में सदस्य, जिला सहकारी बंैक टिहरी में निदेशक और सहकारी समिति मैंगाधार में प्रशासक भी रह चुके हैं। 2009 में उत्तराखण्ड कांग्रेस कमेटी में अनुसूचित जाति विभाग में महासचिव के पद पर कार्य कर चुके धनीलाल शाह 1989 में देवप्रयाग सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ चुके हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर घनशाली सीट से चुनाव में उतरे थे और दूसरे स्थान पर रहे। 2017 में फिर से निर्दलीय चुनाव में उतरे और दूसरे स्थान पर रहे। वे 2022 के चुनाव में घनशाली सीट से कांग्रेस पार्टी की दावेवारी कर रहे हैं।
2012 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत कर पहली बार विधायक बने भीमलाल आर्य 2017 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे लेकिन बुरी तरह से चुनाव हार गए। पूर्व विधायक भीम लाल आर्य के आम आदमी पार्टी में जाने के कयास लगाए जा रहे थे। यह निर्मूल साबित हुआ। आम आदमी पार्टी ने अभी तक 24 उम्मीदवारों की सूची जारी की है। इसमें घनशाली सीट से विजय शाह को उम्मीदवार बनाया है। इससे यह साफ हो गया है कि भीमलाल आर्य के आम आदमी पार्टी में जाने के कयास हवा-हवाई ही थे। स्वयं भीमलाल आर्य से ‘दि संडे पोस्ट’ ने आप में जाने के कयासों पर पूछा तो उन्होंने बेहद शायराना अंदाज में कहा है, ‘‘घनशाली में न मंत्र है, न तंत्र है, यह सिर्फ आदमी के साथ आदमी का किया षड्यंत्र है।’’
घनशाली में आम आदमी पार्टी का कोई खास जनाधार दिखाई नहीं दे रहा है। ‘दि संडे पोस्ट’ के हालिया सर्वेक्षण में भी महज 6 फीसदी मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी को 2022 के विधानसभा चुनाव में मत देने की बात कही है। 8 फीसदी मतदाताओं ने उक्रांद को मत देने की बात कही है। इससे यह तो साफ है कि मुख्य मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच ही रहने वाला है। हालांकि उक्रांद को तीसरी ताकत के तौर पर देखा जा रहा है, आम आदमी पार्टी चैथे स्थान के लिए मुकाबला करती दिख रही है। हैरानी इस बात की है कि 2017 के चुनाव में उक्रांद को नोटा से भी कम मत मिले थे। जबकि इस बार ‘दि संडे पोस्ट’ के सर्वेक्षण में इस बार उक्रांद की स्थिति पहले से बेहतर नजर आ रही है।दिलचस्प बात यह रही कि इस चुनाव में निर्दलीय धनीलाल शाह दूसरे स्थान पर रहे।
2022 के चुनाव में भीमलाल आर्य कांग्रेस पार्टी से दूसरे बड़े दावेदार हैं। माना जा रहा है कि जिस तरह से 2017 में भीमलाल धनीलाल शाह से 5 हजार मतों से पीछे रहे थे तो इस बार उनको टिकट मिलना मुश्किल है। इसी के चलते भीमलाल आर्य के बारे में कांग्रेस छोड़ने सरीखी चर्चाएं उठ रही हैं।
स्थानीय मतदाताओं की मानंे तो इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के अलावा किसी अन्य दल का जनाधार नहीं है। लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि क्षेत्र का कोई बड़ा नेता अगर किसी अन्य राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव में उतरता हेै तो उसको उसके व्यक्तिगत जनाधार के चलते वोट जरूर मिल सकते हैं, जैसे पूर्व में मिलते रहे हंै। यही कारण है कि उक्रांद ने अभी 16 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है लेकिन घनशाली में अभी मजबूत उम्मीदवार की खोज के चलते देरी हो रही है। कुछ इसी तरह से आम आदमी पार्टी के बारे में भी कहा जा रहा है कि यदि आप इस सीट पर किसी ऐसे व्यक्ति को चुनाव मंे उतारती है जो पहले से मजबूत रहा हो तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है।
जब कांग्रेस की हरीश रावत सरकार को भाजपा ने षड्यंत्र रचकर गिराने का प्रयास किया था तब मैं ही अकेला वह विधायक था जिसने लोकतंत्र को बचाने के लिए भाजपा को छोड़कर कांग्रेस का साथ दिया। आज वही लोग कांग्रेस में दावेदारी कर रहे हैं जिन्होंने नुकसान पहुंचाया था। लोकतंत्र है तो हर आदमी को अपनी दावेदारी का हक है। मैं कांग्रेस पार्टी का सिपाही हूं और 2022 के चुनाव में घनशाली सीट से उम्मीदवार के तौर पर अपनी दावेदारी कर रहा हूं।
भीमलाल आर्य, पूर्व विधायक
मैं 2012 में निर्दलीय चुनाव लड़ा और मुझे दस हजार से ज्यादा वोट मिले थे। 2017 में फिर से निर्दलीय लड़ा। इस बार भी दस हजार से ज्यादा वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहा, जबकि कांग्रेस के भीमलाल आर्य तीसरे नम्बर पर रहे और पांच हजार वोट भी नहीं पा सके। 2019 के लोकसभा चुनाव में मुझे प्रीतम सिंह जी ने कांग्रेस पार्टी में इस शर्त पर शामिल किया था कि कांग्रेस मुझे 2022 के विधानसभा चुनाव में टिकट देगी। मेरे चुनावी ट्रैक रिकाॅर्ड सबसे बेहतर हैं। कांग्रेस से मैं इसी कारण से टिकट की दावेदारी कर रहा हूं और मेरे रिकाॅर्ड को देखकर कांग्रेस मुझे ही टिकट देगी ऐसा मुझे भरोसा है।
धनी लाल शाह, कांग्रेस नेता
जब हमारी मांग पूरी नहीं होगी और हमारे क्षेत्र का विकास नहीं होगा और जिन लोगों पर हमारे क्षेत्र का विकास करने की जिम्मेदारी दी गई है वे अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पा रहे हैं तो किसी न किसी को तो आगे आना ही होगा। हमारे विधायक इस क्षेत्र में काम नहीं करवा पा रहे हैं। जनता उनसे नाराज है। मैं अपने क्षेत्र के लिए वर्षों से काम करता रहा हूं। कोरोनाकाल में प्रवासियों के लिए मैं जी-जान से काम किया। जनता मुझे चाहती है कि मैंने इस बार भाजपा से चुनाव लड़ूं। मैंने पार्टी में अपनी दावेदारी कर दी है। अब टिकट किसे मिला है किसे नहीं मिलता यह तो पार्टी देखेगी। लेकिन मैं इतना कह सकता हूं कि इस बार भाजपा की पहले से भी बड़ी जीत होगी।’’
दर्शनलाल आर्य, भाजपा नेता

जब कांग्रेस की हरीश रावत सरकार को भाजपा ने षड्यंत्र रचकर गिराने का प्रयास किया था तब मैं ही अकेला वह विधायक था जिसने लोकतंत्र को बचाने के लिए भाजपा को छोड़कर कांग्रेस का साथ दिया। आज वही लोग कांग्रेस में दावेदारी कर रहे हैं जिन्होंने नुकसान पहुंचाया था। लोकतंत्र है तो हर आदमी को अपनी दावेदारी का हक है। मैं कांग्रेस पार्टी का सिपाही हूं और 2022 के चुनाव में घनशाली सीट से उम्मीदवार के तौर पर अपनी दावेदारी कर रहा हूं।
मैं 2012 में निर्दलीय चुनाव लड़ा और मुझे दस हजार से ज्यादा वोट मिले थे। 2017 में फिर से निर्दलीय लड़ा। इस बार भी दस हजार से ज्यादा वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहा, जबकि कांग्रेस के भीमलाल आर्य तीसरे नम्बर पर रहे और पांच हजार वोट भी नहीं पा सके। 2019 के लोकसभा चुनाव में मुझे प्रीतम सिंह जी ने कांग्रेस पार्टी में इस शर्त पर शामिल किया था कि कांग्रेस मुझे 2022 के विधानसभा चुनाव में टिकट देगी। मेरे चुनावी ट्रैक रिकाॅर्ड सबसे बेहतर हैं। कांग्रेस से मैं इसी कारण से टिकट की दावेदारी कर रहा हूं और मेरे रिकाॅर्ड को देखकर कांग्रेस मुझे ही टिकट देगी ऐसा मुझे भरोसा है।
जब हमारी मांग पूरी नहीं होगी और हमारे क्षेत्र का विकास नहीं होगा और जिन लोगों पर हमारे क्षेत्र का विकास करने की जिम्मेदारी दी गई है वे अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पा रहे हैं तो किसी न किसी को तो आगे आना ही होगा। हमारे विधायक इस क्षेत्र में काम नहीं करवा पा रहे हैं। जनता उनसे नाराज है। मैं अपने क्षेत्र के लिए वर्षों से काम करता रहा हूं। कोरोनाकाल में प्रवासियों के लिए मैं जी-जान से काम किया। जनता मुझे चाहती है कि मैंने इस बार भाजपा से चुनाव लड़ूं। मैंने पार्टी में अपनी दावेदारी कर दी है। अब टिकट किसे मिला है किसे नहीं मिलता यह तो पार्टी देखेगी। लेकिन मैं इतना कह सकता हूं कि इस बार भाजपा की पहले से भी बड़ी जीत होगी।’’