दीदी ने पश्चिम बंगाल जीत लिया पर नंदीग्राम का संग्राम अब भी बाकी

सोशल मीडिया पर सुबह से राजनीतिक पोस्ट और चुनाव परिणामों पर मीम वाइरल हो रहे हैं। कोई कह रहा अब यूपी में खेला होबे कोई कह रहा अब पूरे देश में खेला होबे। सबसे अधिक यदि किसी स्टार पर मीम बन रहे हैं तो वो हैं मिथुन चक्रवर्ती। हालांकि यह भी सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में हो रहे चुनावी उत्सव का एक रंग है।

फिलहाल चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों के रुझानों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से पीछे चल रही हैं।

इस पर कई पत्रकारों ने यह भी कहा है कि ममता बनर्जी को नंदीग्राम से चुनाव क्रोध में आकर नहीं लड़ना चाहिए था। जाहिर सी बात है कि इसके पीछे उनका तर्क था कि वो राज्य में तो जीत दर्ज कर रही हैं लेकिन अगर वो अपनी सीट हार जाती हैं तो उससे वो राष्ट्र स्तर पर विपक्ष का चेहरा नहीं बन पाएंगी।

दीदी ने नन्दीग्राम से लड़ने का फैसला तैश में तो नहीं लिया ?

लेकिन यह तो तय हैं कि ममता बनर्जी के नंदीग्राम जाने से उनके कार्यक्रताओं में काफी जोश आया। ममता बनर्जी के इसी उत्साह के कारण तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को जोश मिला। बंगाल के चुनाव में पूरा माइंड गेम चल रहा था। बीजेपी बराबर ममता बनर्जी को चुनौती दे रही थी कि वो नंदीग्राम से चुनाव लड़कर दिखाएं।

अगर ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव नहीं लड़ा होता तो मुझे लगता है कि तृणमूल कांग्रेस उसी दिन चुनाव हार गई होती या अगर ममता किसी और सीट से भी चुनाव लड़ रही होतीं तो यह टीएमसी के कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित करने वाला होता।

उन्हें नहीं लगता कि ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव हार जाएंगी क्योंकि अभी मतगणना जारी है लेकिन अगर वो चुनाव हार भी जाएं तो यह उनकी फ़ाइटर इमेज के कारण ही ऐसा हो पा रहा है।

सोनिया की बैठक का ममता ने किया बहिष्कार

सत्तारूढ़ लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ऐतिहासिक जीत की ओर

उधर केरल में सत्तारूढ़ लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट राज्य विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रही है। राज्य विधानसभा की 140 सीटों में एलडीएफ़ 85 सीटों पर फिलहाल आगे चल रही है. हालांकि मतगणना का काम अभी जारी ही है।

केरल विधानसभा का चुनाव अगर लेफ्ट फ्रंट जीत जाती है तो पिछले चार दशकों से राज्य की राजनीति में चली आ रही सत्ता बदल देने की परंपरा इस बार टूट जाएगी।

केरल में लंबे समय से ये होता रहा है कि एक चुनाव में लेफ्ट जीतती है तो अगले चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाला गठबंधन।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार एलडीएफ़ 85 सीटों पर आगे चल रही है जबकि कांग्रेस नेतृत्व वाला विपक्षी यूडीएफ़ गठबंधन 44 सीटों पर आगे चल रहा है। भारतीय जनता पार्टी इस समय चार सीटों पर आगे चल रही है। राज्य के 14 में से 10 ज़िलों में लेफ्ट फ्रंट अपने नजदीकी उम्मीदवार से निर्णायक बढ़त बनाए हुए है।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन कन्नूर ज़िले के धर्मादम विधानसभा सीट पर अपने निकटम प्रतिद्वंदी से 13 हज़ार मतों से आगे चल रहे हैं।