Óñ¡Óñ¥Óñ░Óññ ÓñòÓÑï ÓñùÓÑüÓñ▓Óñ¥Óñ«ÓÑÇ ÓñòÓÑç ÓñªÓñ▓ÓñªÓñ▓ Óñ«ÓÑçÓñé ÓñºÓñòÓÑçÓñ▓Óñ¿ÓÑç ÓñÁÓñ¥Óñ▓ÓÑç Óñ░ÓÑëÓñ¼Óñ░ÓÑìÓñƒ ÓñòÓÑìÓñ▓Óñ¥ÓñçÓñÁ ÓñòÓÑÇ Óñ«ÓÑéÓñ░ÓÑìÓññÓñ┐ Óñ╣ÓñƒÓñ¥Óñ¿ÓÑç ÓñòÓÑÇ Óñ«Óñ¥ÓñéÓñù Óñ╣ÓÑüÓñê ÓññÓÑçÓñ£

भारत को गुलामी के दलदल में धकेलने वाले रॉबर्ट क्लाइव की मूर्ति हटाने की मांग हुई तेज

लंदन में भारत को गुलामी के दलदल में धकेलने में अहम भूमिका निभाने वाले रॉबर्ट क्लाइव की मूर्ति हटाने की मांग तेज हो गई। क्लाइव की ये मूर्ति लंदन के श्र्यूसबेरी में है। मूर्ति हटाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म change.org के जरिए सोमवार को एक पिटीशन श्रोपशायर काउंटी काउंसिल को भेजी गई। क्लाइव भारत समेत दक्षिण पूर्व एशिया में ब्रिटिश हुकूमत का विस्तार करने वाले शुरुआती लोगों में था।

एक घंटे में इस पर 1700 लोगों ने दस्तखत यानी सिग्नेचर किए। यह मुहिम अश्वेतों के समर्थन में चलाई जा रही है। पिटीशन के मुताबिक, ब्रिटिश हुकूमत के दौरान इन देशों में लाखों निर्दोष लोगों की हत्या हुई, उन पर जुल्म हुए। ऐसे में ब्रिटिश राष्ट्रवाद का जश्न मनाने के लिए उनकी मूर्ति लगाना गलत है। पिटीशन में ब्रिटिश हुकूमत के समय बंगाल और भारत के संसाधनों को लूटने में क्लाइव की भूमिका बताई गई है।

ब्रिटेन में कुछ दिनों से अश्वेतों के समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं। रविवार को प्रदर्शनकारियों ने दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे विंस्टन चर्चिल की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया था। लंदन के पार्लियामेंट स्क्वेयर पर लगी उनकी मूर्ति पर लिख दिया था कि वे नस्लभेदी थे। इसके साथ ही विरोध करने वालों ने 17वीं सदी के ब्रिटिश मानव तस्कर एडवर्ड कॉल्स्टन की मूर्ति तोड़ दी, इसे नदी में फेंक दिया।

रॉबर्ट क्लाइव ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारी थे। 1757 में प्लासी और 1764 में बक्सर की लड़ाई जीतने में उनकी अहम भूमिका थी। इसके बाद ब्रिटिशों का भारत में पैर जमाने का रास्ता साफ हो गया। इससे पहले तक ब्रिटिश भारत में कारोबारी के तौर पर रह रहे थे।

क्लाइव बंगाल प्रेसिडेंसी के पहले गवर्नर थे। क्लाइव की मौत 22 नवम्बर को 1774 को हुई। इस वक्त उसकी उम्र सिर्फ 28 साल थी। भारत में उसने न सिर्फ ब्रिटिश शासन को मजबूत बनाया बल्कि यहां से कई कीमती सामान ब्रिटेन भी ले गया।