Óñ£Óñ«Óñ¥Óññ Óñ©ÓÑç ÓñÁÓñ¥Óñ¬Óñ© ÓñåÓñÅ Óñ▓ÓÑïÓñùÓÑïÓñé ÓñòÓÑÇ ÓññÓñ▓Óñ¥Óñ ÓñòÓñ░Óñ¿ÓÑç ÓñòÓñ¥ Óñ«ÓÑüÓñûÓÑìÓñ»Óñ«ÓñéÓññÓÑìÓñ░ÓÑÇ Óñ»ÓÑïÓñùÓÑÇ Óñ¿ÓÑç ÓñªÓñ┐ÓñÅ Óñ¿Óñ┐Óñ░ÓÑìÓñªÓÑçÓñÂ

दिल्ली में केजरीवाल की जीत ने उड़ाई UP के CM योगी की नींद

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केजरीवाल की जीत के तुरंत बाद ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा है कि जहां-जहां बाबा गए वहां-वहां भाजपा हारी। उनका इशारा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की तरफ था। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आम आदमी पार्टी के दिल्ली में लगातार तीसरी बार हुई जीत से पड़ोसी राज्यों के मुखियाओं की नींद उड़ गई है।

अब तक मोदी मैजिक के सहारे सरकार बनाने और भविष्य में भी इसी के बलबूते सत्ता की सीढियां चढ़ने की सोच रखने वाले नेताओं को करारा झटका लगा है। पहले जब मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो कहा गया कि वह गुजरात माडल की वजह से जीते हैं। लेकिन उसके बाद लगातार गुजरात माडल गुम हो रहा है। मोदी का जादू भी दिनों-दिन कम होता जा रहा है। ऐसे में मोदी के नाम पर वोट पाने का सपना भी धूमिल हो रहा है। इसकी सबसे ज्यादा चिंता यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को है।

लोगों की माने तो वह सूबे की कानून व्यवस्था को लेकर जितना सक्रिय रहे उतना ध्यान उन्होंने किसी पर भी नहीं दिया। बावजूद इसके वह कानून व्यवस्था को सुदृढ़ नहीं कर सके। यूपी के विधानसभा चुनाव में सिर्फ दो साल बचे हैं। ऐसे में योगी का सत्ता के लिए चिंतित होना लाजिमी है। ले-देकर योगी सरकार के पास भी राष्ट्रीय स्तर के मुद्दे ज्यादा प्रभावी रहने वाले है।

गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा के तीन सौ विधायक कैबिनेट मंत्री अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्री सहित दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगा रहा। लेकिन बावजूद इसके भाजपा कोई कमाल नहीं कर सकी। ऐसे में यह परिणाम भाजपा के लिए बड़ी चेतावनी की तरह भी देखा जा रहा है । देखा जाए तो यह चुनाव राजनीतिक दलों के लिए बड़ा सबक है। दिल्ली की जनता ने जाति धर्म संप्रदाय से ऊपर उठकर जनता से जुड़ी उन समस्याओं को लेकर वोट किया है ।

 

 

दिल्ली विधानसभा के नतीजे भाजपा के लिए चेतावनी भी है। खासतौर से उन नेताओं के लिए चेतावनी है जो है दिल्ली में स्टार प्रचारक बनकर पहुंचे थे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी चुनाव से सबक लेना चाहिए। रोजगार, महंगाई की समस्याओं से जनता को निजात दिलानी चाहिए। सांसदों को अपने गोद लिए गांव की तरफ जाकर देखना चाहिए। कितनी सड़कें कितनी गलियां और कितनी नालियां 6 सालों में भी नहीं बनी हैं।

लोगों की माने तो बेरोजगारी भाजपा सरकार की सबसे बड़ी हार का कारण है। सरकार जो राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर चुनावी मैदान में उतरी थी दिल्ली के लोगों के लिए वह उतना महत्वपूर्ण नहीं था। जितना कि उनको मुफ्त बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा मिले। लोगों के अपने क्षेत्र में सुधार को लेकर अरविंद केजरीवाल को वोट किया है। केजरीवाल ने मूलभूत समस्याओं पर नजर रखी उन पर काम किया।

सच कहें तो दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने बड़ी लकीर खींच दी है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो गुजरात मॉडल लेकर आए थे जिसे दिल्ली की जनता ने नकार दिया था। भाजपा के हाथ से कई बड़े राज्य पहले जा चुके हैं। दिल्ली में 21 साल बाद भी भाजपा सत्ता में नहीं आ पाई। वहीं आने वाले बिहार और बंगाल के चुनाव में भी भाजपा को जीत और मेहनत करनी पड़ेगी। क्योंकि भाजपा राष्ट्रीय मुद्दों पर राज्य के चुनाव लड़ने जा रही है।