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लॉकडाउन के बीच दिहाड़ी मजदूर अपने बच्चों को आटा घोलकर पिलाने को मजबूर

भारत सरकार की ओर से आज से अगले 21 दिन तक लॉकडाउन का एलान किया गया है। कोरोना वायरस से अभी तक देश में करीब 600 संक्रमित हुए हैं। इस अलावा 10 लोगों की मौत भी हुई है। इसी को देखते हुए लॉकडाउन का निर्णय लिया गया है। इसका असर अभी से दिखने भी लगा है। इस लॉकडाउन का असर पूरे देश में सामान्य जनजीवन के साथ-साथ गरीब मजदूरों पर सबसे अधिक पड़ रहा है। मजदूरों का जीवनयापन रोज की दिहाड़ी से होता है। ऐसे में दिहाड़ी मजदूर लॉकडाउन के चलते ये घर के बाहर नहीं निकल पा रहे है।

लॉकडाउन के चलते मजदूरों के सामने जीवनयापन का संकट पैदा हो गया है। रोजाना 100-200 रुपये कमाने वाले दिहाड़ी मजदूरों के पास अपने बच्चों और परिवार को खिलाने के लिए राशन तक नहीं हैं। अब इन मजदूरों के पास न ही रोजमर्रा का समान है न ही राशन खरीदने तक के पैसे हैं। अगर समय रहते इन मजदूरों के पास राशन नहीं पहुंचाया गया तो भूख मरने की नौबत आ जाएगी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आउटर में सीतापुर रोड पर जानकीपुरम में बनी झुग्गी-झोपड़ी में तो हालात और भी बुरे हैं। यहां ज़्यादातर रिक्शा और ठेला चलाने वाले लोग रहते हैं।

पहले जनता कर्फ्यू और फिर लॉकडाउन से हालात ऐसी हो गई है कि इनको अपने बच्चों को आटा घोलकर पिलाना पड़ रहा है। क्योंकि घर में कुछ भी खाने के लिए नहीं है। वहीं उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसा दिलाया था कि मैं उत्तर प्रदेश के 23 करोड़ लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारे पास सब्जियों, दूध, दवाइयों का पूरा स्टॉक है। हमने 10 हजार गाड़ियों का खास इंतजाम किया है, जो लोगों के घरों तक दूध, दवाइयों और राशन पहुंचान का काम करेंगी। प्रदेश के 20 लाख मजदूरों, हॉकरों और ई-रिक्शा चालकों को एक हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा गरीबों को राशन उपलब्ध कराने का भी फरमान जारी किए है।