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नारकोटिक्स आधिकारी को मुख्यमंत्री पर मानहानिकारक टिप्पणी से बचने का आदेश

मणिपुर की एक अदालत ने नारकोटिक्स एंड अफेयर्स ऑफ बॉर्डर ब्यूरो (एनएबी) की महिला आधिकारी थोउनाओजम बृंदा से कहा है कि वो मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के खिलाफ किसी भी तरह का ‘निराधार और मानहानिकारक’ बयान देने से बचें।

दीवानी न्यायाधीश वाई. समरजीत सिंह ने अपने आदेश में बृंदा और समाचार पत्रों सहित 10 अन्य प्रतिवादियों को मौखिक रूप से मानहानिकारक बयान देने, रिपोर्टिंग करने या प्रकाशित करने से बचने का निर्देश दिया।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, कोर्ट ने कहा, “उपरोक्त लेखों में वादी के खिलाफ प्रतिवादियों द्वारा की गई टिप्पणी और आरोप ऐसे हैं कि यह निश्चित रूप से वादी के व्यक्तिगत और राजनीतिक करिअर की प्रतिष्ठा को खराब और नीचा दिखाएगा।”

अपने आदेश में अदालत ने कहा, “ऐसा लगता है कि प्रतिवादियों ने 13 जुलाई को दिए गए हलफनामे की सामग्री के सत्यापन और पुष्टि के बिना ही लेख प्रकाशित किया, जो मणिपुर उच्च न्यायालय में विचाराधीन था।”

दरअसल, बृंदा की तरफ से अखबारों ने दायर एक हलफनामे के आधार पर एक लेख प्रकाशित किया था, जिसमें दावा किया था कि मुख्यमंत्री ने महिला अधिकारी पर एक ड्रग रैकेट के कथित सरगना लुखाउसी जू को छोड़ने का दबाव बनाया था।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इम्फाल हाईकोर्ट के समक्ष 13 जुलाई को एनएबी की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक थोउनाओजम बृंदा ने दायर एक हलफनामे में मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए थे।

जून 2018 में ड्रग्स तस्करी को लेकर की गई यह छापेमारी की गई थी जिसमें पुलिस ने जब्त किए गए नशीले पदार्थों और नकदी की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 28 करोड़ रुपये से अधिक आंकी थी।