पश्चिम बंगाल मेें ओवैसी के साथ ही भाजपा को लगा बड़ा झटका

पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर देश की राजनीतिक पार्टियों में हलचल पैदा हो गई है। भाजपा, कांग्रेस और ममता बनर्जी की टीएमसी पहले से ही वहां अपने-अपने वोट बैंक को बढ़ाने में जुटी हुई है। वहीं बिहार चुनाव में पांच सीटें जीतने के बाद एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी बंगाल चुनाव में उतरने का फैसला किया है। उन्हें बंगाल में संभावना दिख रही है। लेकिन अब बंगाल के इमाम एसोसिएशन ने एक बयान जारी कर ओवैसी के लिए मुश्किलें पैदा कर दी है। बंगाल इमाम एसोसिएशन के प्रमुख, मोहम्मद याहिया ने एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा समर्थित किसी भी संगठन के पक्ष में अपने-अपने मत का प्रयोग नहीं करने के लिए पश्चिम बंगाल में मतदाताओं से सार्वजनिक अपील की है। उन्होंने कहा, ‘हर वोट बीजेपी को मिलता है। एक हैदराबादी राजनेता केवल उन राज्यों में सक्रिय क्यों हो जाता है जहां भाजपा को चुनाव जीतने में सख्त विरोध का सामना करना पड़ता है।” ऊपरी तौर पर यह ओवैसी के लिए बड़ा झटका है, लेकिन राजनितिक विश्लेषक मानते हैं कि ओवैसी से भी बड़ा झटका यह भाजपा के लिए है।

कई वरिष्ठ मौलवियों, नागरिक समाज समूहों और युवा मंचों ने लोगों को आगाह करना शुरू कर दिया है कि कट्टरपंथी अल्पसंख्यक राजनीतिक संरचनाओं का पश्चिम बंगाल में कोई स्थान नहीं है। पिछले हफ्ते, मौलवियों ने कारी फ़ज़लुर रहमान के नेतृत्व में मुलाकात की, जिन्होंने कहा, “लोग किसी को भी अपना वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं और हम उस फैसले को प्रभावित नहीं करना चाहते हैं। लेकिन याद रखें, इस बार वोट न केवल राज्य का भविष्य तय करेगा, बल्कि लाखों लोग यहां रहेंगे। ऐसी ताकतें हैं जो शांति को बिगाड़ना चाहती हैं और लोगों के बीच एक नफरत का बीजारोपण करती हैं। कई लोगों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के लिए निशाना बनाया जा सकता है। हमें एक आम सहमति पर पहुंचना चाहिए और जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए। औवेसी की पार्टी ने यह भी ऐलान कर दिया है कि वह आने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी अपने प्रत्याशी उतारेंगे। उत्तर प्रदेश में औवेसी सपा के वोटबैंक में सेधमारी कर सकता है, क्योंकि यूपी में मुस्लिम बहुल बोटबैंक इससे पहले कांग्रेस और सपा के खाते में जाता है। लेकिन इस बार औवेसी उसमें सेंध मारने की फिराक में है।

इमाम एसोसिएशन के इस बयान के बाद औवेसी को बंगाल में अपनी जगह बनाना काफी मुश्किल हो सकता है। क्योंकि औवेसी बंगाल के मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में करने की फिराक में है। अ्ब देखना होगा कि क्या औवेसी ममता बनर्जी जिसका वोटबैंक ज्यादातर अल्पसंख्यक है, उसमें सेंधमारी कर पाएंगे या नहीं। बिहार में पांच मुस्लिम बहुल सीटें जीतने के बाद क्या औवेसी बंगाल में अपना बिहार वाला करिश्मा दिखा पाएंगे या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। बहरहाल अभी राजनीतिक विश्लेषक यह मान रहे हैं कि ओवैसी की मजबूती से ममता बनर्जी कमजोर पड़ जाती और भाजपा को फायदा होता,  लेकिन अब इमाम एसोसिएशन का ऐलान भाजपा के मनसूबों पर पानी फेर सकता है।