ÓñÜÓÑÇÓñ¿ÓÑÇ ÓñàÓñûÓñ¼Óñ¥Óñ░ Óñ¿ÓÑç ÓñªÓÑÇ Óñ½Óñ┐Óñ░ ÓñºÓñ«ÓñòÓÑÇ, ÓñàÓñùÓñ░ Óñ¡Óñ¥Óñ░Óññ ÓñàÓñ«ÓÑçÓñ░Óñ┐ÓñòÓñ¥ ÓñòÓÑç Óñ©Óñ¥ÓñÑ ÓñùÓñ»Óñ¥ ÓññÓÑï ÓñÜÓÑÇÓñ¿ ÓñòÓñ░ÓÑçÓñùÓñ¥ ÓñàÓñ¬Óñ¿ÓÑç Óñ╣Óñ┐ÓññÓÑïÓñé ÓñòÓÑÇ Óñ░ÓñòÓÑìÓñÀÓñ¥

भारत ने पड़ोसी देशों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर लगाई पाबंदी, बिलबिलाया चीन

भारत ने चीन और अन्य पड़ोसी देशों से सीधे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर पाबंदी लगा दी है। भारत के इस फैसले पर चीन भड़क गया। भारत के इस फैसले के बाद चीन ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के लिए भारत के नए नियम डब्ल्यूटीओ के गैर-भेदभाव के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं और मुक्त और निष्पक्ष व्यापार के खिलाफ हैं।

सरकार के इस फैसले का कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड सांसद राहुल गांधी ने भी स्वागत किया हैं। जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, इटली भी ऐसा कदम उठा चुके हैं। कोरोना महामारी के चलते अर्थव्यस्था में उथल-पुथल के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू कंपनियों का अधिग्रहण रोकने के लिए यह फैसला लिया है।

चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान की सीमाएं भारत के साथ लगती हैं। हालांकि, सरकार ने जारी लिए नोटिफिकेशन में साफ-साफ चीन का नाम नहीं लिया है, बल्कि यह कहा गया है कि वो देश जिनकी सीमा भारत से लगती है, सभी के लिए निवेश से पहले मंजूरी जरूरी होगी।

पिछले एक साल में चीन की तरफ से देश में करीब 15 हजार करोड़ रुपये का निवेश आया है। यही नहीं, चीन ने बड़े पैमाने पर स्टार्टअप में भी पैसा लगाया है। चीन के निवेश की रफ्तार बाकी देशों के मुताबिक ज्यादा ही तेज रहती है।

चीन के दूतावास प्रवक्ता जी रोंग ने अपने बयान में कहा कि भारतीय पक्ष द्वारा विशिष्ट देशों से निवेश के लिए लगाई गई अतिरिक्त बाधाएं डब्ल्यूटीओ के गैर-भेदभाव वाले सिद्धांन्त का उल्लंघन करती हैं और उदारीकरण तथा व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने की सामान्य प्रवृत्ति के खिलाफ हैं। अधिकारी ने कहा कि अतिरिक्त बाधाओं को लागू करने वाली नई नीति G20 समूह में निवेश के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष, गैर-भेदभावपूर्ण और पारदर्शी वातावरण के लिए बनी आम सहमति के खिलाफ भी है।