कोरोना से कम आत्महत्या से ज्यादा मर रहे हैं अमेरिकी सैनिक

विश्वभर में कोरोना महामारी के चलते एक बार फिर प्रतिबंधों का दौर शुरू हो गया है। कोरोना के नए वेरिएंट ने चिंता और बढ़ा दी है। संक्रमण के साथ साथ कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब तक विश्व भर में कोरोना से लाखों मौतें हो चुकी हैं।

इसके उलट अमेरिका में कोरोना वायरस से ज्यादा आत्महत्या करने से अमेरिकी सैनिकों की मौत हो रही है। केवल 2021 की तीसरी तिमाही में आत्महत्या करने वाले अमेरिकी सैनिकों के आंकड़े अब तक कोविड से मरने वाले सैनिकों की संख्या को पार कर गए हैं। जुलाई से सितंबर 2021 तक अमेरिकी सेना की विभिन्न इकाइयों के 163 सदस्यों ने आत्महत्या की। वहीं कोरोना से अब तक सिर्फ 86 मौतें हुई हैं।

फॉक्स न्यूज ने पेंटागन के हवाले से कहा कि सेना में आत्महत्या से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जुलाई से सितंबर 2021 तक 163 जवानों ने आत्महत्या की है। इनमें 70 सक्रिय सेवा सदस्य, 56 रिजर्व फोर्स और 37 नेशनल गार्ड के जवान शामिल थे। 2021 की दूसरी तिमाही की तुलना में, अमेरिकी सेना के सक्रिय सदस्यों में आत्महत्या दर में कमी आई है, जबकि रिजर्व फोर्स और नेशनल गार्ड में वृद्धि हुई है।

सितंबर 2021 तक अमेरिकी सेना में कोरोना वायरस के कारण होने वाली मौतों की कुल संख्या 43 थी। अमेरिका में डेल्टा वेरिएंट और ओमिक्रॉन के मामलों के कारण 8 जनवरी तक यह मौत का आंकड़ा बढ़कर 86 हो गया था। तीन तिमाहियों तक पिछले वर्ष (2021) की तुलना में, अमेरिकी सेना में आत्महत्या से होने वाली मौतों की कुल संख्या 476 थी। यानी सभी चार तिमाहियों को जोड़कर, यह आंकड़ा 639 तक पहुंच रहा है, पेंटागन के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में अमेरिकी सेना के 701 जवानों ने आत्महत्या की।

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अमेरिका में ब्राउन यूनिवर्सिटी और बोस्टन यूनिवर्सिटी के कॉस्ट ऑफ वॉर प्रोजेक्ट पर किए गए एक शोध में 9/11 के बाद अमेरिकी सैनिकों की आत्महत्या की संख्या बताई गई है। इस शोध में कहा गया है कि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के बाद से अब तक 30,177 अमेरिकी सक्रिय सैनिकों ने आत्महत्या कर ली है। इस अवधि के दौरान युद्धों के दौरान कुल 7,057 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।

सैनिकों की आत्महत्या की कोशिशों को रोकने के लिए अमेरिकी सेना ने कई तरह की काउंसलिंग शुरू की है। इसमें यदि कोई सैनिक मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं पाया जाता है तो उसे अनिवार्य मानसिक जांच के लिए भेजा जाता है। इसके अलावा ऐसे सैनिकों को हथियारों की पहुंच से भी दूर रखा जाता है।