भूलाए नहीं भूलता मार्च 2016/भाग-7
हरीश रावत
पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड
दल-बदलू और भाजपा के विधायक जब दिल्ली के पांच सितारा होटल में पहुंचे और उनको इस बात की जानकारी मिली कि कांग्रेस पार्टी ने उनकी सदस्यता को समाप्त करने के लिए माननीय स्पीकर महोदय के पास अनुरोध पत्र भेज दिया है। माननीय स्पीकर महोदय के कार्यालय से कभी भी उनको इस आशय की सूचना मिल सकती है। जब उनको इस बात का ज्ञान हुआ कि उनके नेतागणों ने उनकी लुटिया डुबो दी है तो वहां व्याप्त भय के वातावरण में दल-बदलू विधायकों को भरोसा देने के लिए भाजपा नेतृत्व ने एक और ऐसा कुकृत्य किया जो लोकतंत्र के साथ आपराधिक बलात्कार था। खैर मैं उस बिंदु पर आपसे फिर से चर्चा करूंगा क्योंकि उसमें कुछ मामले माननीय न्यायालय द्वारा निर्णित किए जा चुके हैं और एकाध-दो मामले माननीय न्यायालय में अब भी किसी न किसी रूप में लम्बित हैं। मैं पृथक से उस पर लिखूंगा। इस दरम्यान भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने बहुत आक्रामक तौर पर कुछ और विधायकों से सम्पर्क साधा। उनका लक्ष्य, हमारे सपोर्ट कर रहे पीडीएफ के साथी थे। उनके लक्ष्य कुछ ऐसे साथी भी थे जिनकी दल-बदल करने वाले नेताओं के साथ पहले से कुछ आत्मीयता थी। हमने अपने कुछ साथियों को यह दायित्व सौंपा कि वह निरंतर हमारे साथियों के साथ बातचीत करते रहें। हमें हर हालात में अपने साथ रह गए साथियों व सहयोगियों को अपने साथ बनाये रखना था। राजनीतिक दृष्टिकोण से और दल-बदल या समर्थन वापसी घातक होती। दल-बदलू जिनको मैं उज्याड़ू-बल्द कहता हूं उनको डिसक्वालीफाई करने के मोर्चे पर हमने इंदिरा हृदयेश जी, नव प्रभात जी सहित दूसरे वरिष्ठ साथियों को लगाया और उन्होंने एक फुल प्रूफ प्लान के साथ स्पीकर कार्यालय में सारे दस्तावेज जमा किए जिसके आधार पर न केवल नोटिस जारी हुआ और वह नोटिस भी उनके आवासों, उनके मूल निवासों और उनके सम्भावित कार्यालय जहां वह किसी न किसी रूप में बैठते हैं, वहां भी सर्व करवाए गए और उनके फोटो आदि भी लिए गए। इस सारी प्रक्रिया की वीडियो ग्राफी भी की गई। माननीय स्पीकर महोदय ने तदनुरूप उन लोगों से जवाब मांगा और जवाब मांगने के साथ-साथ उनको व्यक्तिगत रूप से उनके सम्मुख उपस्थित होने का नोटिस दिया और उसके लिए 25 मार्च निर्धारित की गई। कांग्रेस पार्टी अपना दायित्व पूरा कर चुकी थी और बहुत सुघड़ता से नियमों का पालन करते हुए हमारे साथियों ने इंदिरा हृदयेश जी के नेतृत्व में उन दस्तावेजों को तैयार किया जिसको हमने सुप्रीम कोर्ट के दो बहुत नामचीन अधिवक्ताओं को दिखाया और उन्होंने भी हमारे दस्तावेजों की सराहना की।
दल-बदल व सरकार गिराने में केंद्र सरकार के खुले खेल का असर ब्यूरोक्रेसी सहित कई संस्थाओं पर पड़ा। मार्च 2016 में घटित घटनाक्रम में कई संस्थाओं ने सकारात्मक या नकारात्मक अपनी भूमिका अदा की, इनमें माननीय स्पीकर, माननीय गवर्नर, माननीय राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, माननीय न्याय पालिका, राजनीतिक दल के रूप में भाजपा व कांग्रेस, अन्य विपक्षी दल, मीडिया, कहीं न कहीं जुड़े हुए हैं। एक प्रसंग का दूसरे प्रसंग से जुड़ाव बनता है और 2016 के घटित घटनाक्रम को समूचे रूप में समझने के लिए इन संस्थाओं द्वारा अदा की गई भूमिका का ब्यौरा रखना भी मेरा कर्तव्य है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने किन-किन मामलों में न्यायिक विवेचना हो सकती है! लोकसभा, विधानसभा, स्पीकर और गवर्नर रूपी संस्था के किन-किन कदमों की न्यायिक विवेचना की जा सकती है और कौन-कौन से कदम न्यायिक विवेचना से परे हैं, इस संदर्भ में स्पष्ट व्याख्या की है। उत्तराखण्ड की विधानसभा में स्पीकर महोदय ने उस कठिन क्षण में जिस प्रकार से विधानसभा को संचालित किया उससे हमारी विधानसभा का गौरव बढ़ा। विधानसभा अध्यक्ष रूपी संस्था और प्रभावी हुई है। शक्तिमान की टांग तोड़ने के अपराध में एक-दो भाजपा के राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर सदन को नहीं चलने दिया गया, नारेबाजी से लेकर कागज के गुल्ले बनाकर के स्पीकर महोदय के ऊपर फेंके गए, पुस्तकें विधानसभा के पटल पर उपलब्ध थी उनको स्पीकर महोदय पर फेंका गया। माइक तोड़ करके उसको फैंकने का प्रयास किया गया। विधानसभा सचिव और उनके सहयोगियों की टेबल विधानसभा का अभिन्न अंग होती हैं उस टेबल को उलट दिया गया। टेबलों पर चढ़कर कुछ भाजपा विधायकों ने स्पीकर महोदय तक पहुंचने की कुचेष्टा की। स्पीकर महोदय ने शांत भाव से सब चीजों को झेला। मेरे सुझाव कि ऐसे विधायकों को कुछ दिनों के लिए विधानसभा से निलंबित किया जा सकता है! माननीय स्पीकर और संसदीय कार्य मंत्री ने कहा हमें कोई ऐसी नई शुरुआत अपनी विधानसभा में नहीं करनी चाहिए, ऐसा करेंगे तो कटुता और बढ़ेगी। मैंने उनके कथन को माना। जिस दिन दल-बदल हुआ, उस दिन भी विधानसभा की प्रक्रिया के संचालन और नियमावली में और संविधान द्वारा विधानसभा के संचालन के संदर्भ में जो कुछ निर्देशित किया गया है उसके अनुरूप ही माननीय विधानसभा अध्यक्ष जी ने विनियोग विधेयक को पारित घोषित किया और सदन को 28 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया। क्योंकि पहले से ही बजट सत्र 28 मार्च तक के लिए आहूत किया गया था। माननीय स्पीकर महोदय के इस निर्णय को माननीय न्यायालय ने भी पूर्णतः उचित और नियम व संविधान सम्मत बताया। हमें दिक्कतें आई मगर राज्य की विधानसभा व अध्यक्ष पद का गौरव बढ़ा, मुझे इसका संतोष है।
हमने 18 मार्च को माननीय स्पीकर महोदय द्वारा सदन के स्थगन की घोषणा के तत्काल बाद ही उन सब साक्ष्यों को समेटना प्रारम्भ कर दिया था जो साक्ष्य उज्याड़ू बल्दों को दल बदलू सिद्ध करने में सक्षम थे। हमारे रखे हुए साक्ष्य माननीय स्पीकर महोदय और उसके बाद माननीय हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किए गए और अकाट्य सिद्ध हुए। सदन के संचालन के नियमों से अवगत न होना भाजपा और दल-बदलुओं के लिए जहां सदन के पटल पर 18 मार्च, 2016 को उनकी कुयोजना के विफलता का कारण बना, वहीं उत्तेजना में माननीय गवर्नर को नेता प्रतिपक्ष के लेटर हेड में संयुक्त हस्ताक्षर युक्त पत्र देना एक ऐसा अकाट्य साक्ष्य सिद्ध हुआ जिससे न्यायालय में यह पूर्णतः सिद्ध हो गया कि दल-बदल भाजपा ने करवाया है और दल-बदलू भाजपा का हिस्सा हैं। कांग्रेस विधायक दल ने संसदीय कार्य मंत्री जी के माध्यम से माननीय विधानसभा अध्यक्ष को दल-बदलुओं को नामित कर उनकी सदस्यता रद्द करने का अनुरोध पत्र तत्काल सौंप दिया। लिखित तथा विजुअल, दोनों प्रकार के साक्ष्य भी माननीय विधानसभा अध्यक्ष जी को सौंप दिए। आगे बढ़ते हुए घटनाक्रम के साथ हमारी भी बेचैनी बढ़ रही थी। स्पीकर महोदय ने हमारे प्रार्थना पत्र पर क्या कार्यवाही की है उस संदर्भ में हमें कोई जानकारी नहीं मिल रही थी। स्पीकर महोदय और विधानसभा के सचिव महोदय से हमारा कोई सम्पर्क नहीं था। भाजपा और दल-बदलू, माननीय न्यायालय में पहुंचे। माननीय न्यायालय ने भी उन्हें कोई राहत नहीं दी। दल-बदलुओं के सूत्रों के माध्यम से मालूम हुआ कि माननीय स्पीकर महोदय ने उनके हर सम्भावित पते पर उन्हें नोटिस भेजकर कहा है कि वह 25 मार्च तक अपना पक्ष प्रस्तुत करें ताकि दल-बदल विरोधी कानून के तहत स्पीकर महोदय को प्राप्त अधिकारों का वह निर्वहन कर सकें।
मैं और मेरे सहयोगी भले ही हमारी पिटीशन पर माननीय स्पीकर महोदय द्वारा उठाए जा रहे कदम को लेकर अंधकार में हों, मगर भाजपा और दल-बदलू पक्ष में स्पीकर महोदय के कार्यालय से मिले नोटिसों के बाद हड़कंप मचा हुआ था। उन्होंने पहले माननीय हाईकोर्ट के सामने गुहार लगाई और यह प्रयास किया कि किसी तरीके से माननीय विधानसभा अध्यक्ष को दल-बदल कानून के तहत कदम उठाने से रोका जाए। उन्होंने माननीय हाईकोर्ट के दरवाजे खटखटाए और माननीय हाई कोर्ट ने उनसे कहा कि आप स्पीकर के सम्मुख अपना पक्ष रखें। भाजपा और दल बदलू पक्ष के पास माननीय स्पीकर महोदय के कोर्ट में अपना पक्ष रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया था। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम अधिवक्ता श्री राकेश द्विवेदी एवं श्री सुब्रमण्यम जी सहित लगभग आधा दर्जन से ज्यादा अधिवक्ताओं के माध्यम से कई बार, कई दिन तक माननीय स्पीकर के सम्मुख अपना पक्ष रखा। प्रतिदिन माननीय स्पीकर महोदय प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक उनके पक्ष को सुनते थे, वह दूसरे दिन नए तर्कों के साथ स्पीकर महोदय के कार्यालय में फिर उपस्थित हो जाते थे। इसी दौरान भाजपा ने एक दूसरे मोर्चे पर भी काम करना प्रारम्भ किया। एक पूर्व मुख्यमंत्री जी के शिष्य स्टिंग की कला में दक्ष कलाकार को मेरा स्टिंग करने का दायित्व सौंपा गया, उनको कहा गया कि किसी तरीके से हरीश रावत से विधायकों के दल-बदल पर बातचीत का कुछ संदर्भ ले आओ। दिल्ली में कांग्रेस सर्कल में विशेष तौर पर एआईसीसी में यह माहौल बनाया गया कि हरीश रावत से दुखी लोगों ने दल बदल किया है, उनमें से कुछ लोग विजय बहुगुणा को छोड़कर वापस कांग्रेस में जाना चाहते हैं। यह अभियान 20 मार्च से ही प्रारम्भ हो गया था। मुझसे एक-दो वरिष्ठ नेताओं ने बातचीत भी की। यह भी माहौल बनाया गया कि हरीश रावत ने गढ़वाल में कांग्रेस का सारा नेतृत्व पार्टी से बाहर भगा दिया है। अब कुछ लोग वापस आना चाहते हैं, मगर हरीश रावत उन्हें पार्टी में वापस नहीं लेना चाहते हैं। इसलिए वापसी के इच्छुक विधायकों से बातचीत नहीं कर रहे हैं।
इस दौरान मेरी तीन बहनों ने 20 और 21 मार्च को लगातार मेरे ऊपर इस बात के लिए मानसिक दबाव पैदा किया कि मैं दो-तीन लोगों को कांग्रेस में वापस लेने के लिए तैयार हो जाऊं। उन्होंने कहा कि उन विधायकों को उनके द्वारा उठाए गए कदम पर गहरा दुख है। मेरे साथ कार्यरत मेरे एक सलाहकार श्री हरिपाल रावत भी इस सारे प्रचार तंत्र व षड्यंत्र के झांसे में आ गए और उन्होंने स्टिंग कलाकार की कुछ इस तरीके से मीटिंग प्लान कर दी कि मेरा स्टिंग कलाकार से आमना-सामना हो गया। मेरा दुर्भाग्य था कि मैं उस कलाकार की कलाकारी के उच्चतम स्तर से ज्यादा परिचित नहीं था। खैर उस स्टिंग में कुछ था या नहीं, भाजपा ने ही अपने कार्यालय में उस स्टिंग का वीडियो जारी किया और यह पवित्र कार्य श्रीमती निर्मला सीतारमण जी के कर कमलों से हुआ। इस तथाकथित वीडियो को स्वीकार्य बनाने हेतु आनन-फानन में केंद्र सरकार ने उसे रविवार की छुट्टी के दिन फाॅरेंसिक जांच के लिए चंडीगढ़ की फाॅरेंसिक लैब में भेजा और चार घंटे के अंदर वह वीडियो क्लिप दिल्ली वापस भी आ गई और उसी दिन 2 दिन की असम यात्रा पर पहुंचे माननीय प्रधानमंत्री जी भी गुवाहाटी से वापस बुला लिए गए और रात देर में मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई गई। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक से काफी समय पहले माननीय स्पीकर महोदय ने दल-बदल पर सुनवाई पूर्ण कर अपना निर्णय दे दिया और उस निर्णय में स्पीकर महोदय ने अपने विस्तृत नौ अलग-अलग आदेशों में सभी दल-बदलुओं की सदस्यता रद्द कर दी और तदसंबंधी आदेश को विधिवत अधिसूचित कर दिया गया। देर रात केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तराखण्ड की निर्वाचित सरकार को बर्खास्त करने और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का निर्णय लिया गया और उसे स्वीकार किए जाने के लिए महामहिम राष्ट्रपति महोदय को भेजा गया। बोमोई केस के आलोक में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को देखते हुए हमें कुछ भिन्न आशा थी, मगर महामहिम राष्ट्रपति जी के हस्ताक्षर के बाद देर अपराहन राष्ट्रपति शासन की अधिसूचना जारी कर दी गई और मानसिक रूप से तत्पर बैठे हुए माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा कार्यभार संभाल लिया गया। इस समस्त घटनाक्रम में केंद्र सरकार, माननीय गवर्नर, माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा विद्युत गति से की गई कार्यवाही ने जाने-अनजाने में कई प्रश्न खड़े कर दिए। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि केंद्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की अतिशय शीघ्रता क्यों की? केंद्र सरकार व भाजपा सहित दल-बदलू, अध्यक्ष महोदय के फैसले की प्रतीक्षा कर सकते थे। सी.आर.पी.एफ. के नियंत्रणताधीन क्षेत्र में स्टिंग कलाकार कैसे पहुंचा? स्टिंग की क्लिप जो एक प्राइवेट प्राॅपर्टी थी, उसकी जांच स्टिंग के बारह घंटे के अंदर एक चडीगढ़ स्थित सरकारी लेब्रोटरी से कैसे करवाई जा सकती है?
माननीय प्रधानमंत्री जी दो दिन के असम दौरेे पर थे। वह दौरा छोड़कर दिल्ली क्यों वापस आए और आनन-फानन में मध्यरात्रि में केवल एक बिंदु पर केंद्रीय मंत्रिमण्डल की बैठक बुलाई गई, क्यों और कैसे दु्रत गति से उस पर माननीय राष्ट्रपति महोदय का अनुमोदन प्राप्त किया गया। उपरोक्त सवाल राजनीतिक, संवैधानिक चर्चाओं में हमेशा उठेंगे और प्रत्येक संस्था से उत्तर मांगेंगे। मैं अपने अगले लेख में इन बिंदुओं पर अपनी समझ को आप से साझा करूंगा।
क्रमशः
(यह लेखक के अपने विचार हैं।)
