शरद का संकट

बिहार के मुख्यमंत्री और उनके दशकों तक सहयोगी रहे शरद यादव में इन दिनों तलवारें खींची हुई हैं। नीतीश कुमार के यकायक ही पाला बदल भाजपा संग चले जाने से कुपित शरद यादव ने नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है। नीतीश ने भी पलटवार कर शरद यादव की राज्यसभा सीट छीन ली। वह तो भला हो अदालत का कि शरद बाबू का दिल्ली स्थित बंगला अभी तक उनके पास ही है। जब तक अपनी सदस्यता खत्म किए जाने के खिलाफ दायर उनकी याचिका का निस्तारण नहीं हो जाता शरद यादव को अदालत ने बंगले में रहने की इजाजत दे दी है। इस बीच खबर है कि जद(यू) शरद यादव की परपंरागत मधेशी संसदीय सीट से पप्पू यादव को लड़ाने का मन बना रहा है। 2014 में उन्होंने शरद यादव को इस सीट से राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर हराया था। बाद में उन्होंने अपनी पार्टी का गठन कर 2015 के विधानसभा चुनाव में चालीस उम्मीदवार उतारे जो जीत न सके। अब खबर है कि नीतीश बाबू जद(यू) के टिकट पर पप्पू यादव को मैदान में उतारने का मन बना रहे हैं ताकि शरद यादव को संसद में पहुंचने से रोका जा सके। राजनीति में कोई स्थाई दोस्त अथवा दुश्मन नहीं होता कहावत यहां चरितार्थ होते दिख रही है।

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