नहीं रहे बाग्लादेश के तानाशाह इरशाद

बांग्लादेश के तानाशाह एसएम इरशाद की रविवार शाम ढाका के सैन्य अस्पताल में मृत्यु हो गई। 89 वर्षीय इरशाद ने 1982 में सैन्य क्रांति के जरिए देश की कमान अपने हाथों में ले ली थी।

89 वर्षीय इरशाद लंबे समय से फेफड़े और किडनी की बीमारियों से पीड़ित थे। 22 जून को उनकी हालात बिगड़ गई थी जिसके बाद उन्हें यहां सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जातीय पार्टी के प्रमुख और संसद में विपक्ष के नेता इरशाद के निधन पर राष्ट्रपति अब्दुल हामिद, प्रधानमंत्री शेख हसीना और संसद की अध्यक्ष डाॅ शिरीन शर्मिन ने शोक व्यक्त किया है।

इरशाद का जन्म 1930 में भारत के मौजूदा बंगाल के कूचबिहार जिले में हुआ था। भारत विभाजन के एक साल बाद 1948 में उनका परिवार तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान चला गया था। इरशाद 1952 में पाकिस्तान की सेना में भर्ती हुए थे। नेता के साथ ही वह कवि के नाम से मशहूर थे।

1982 में रक्तहीन तख्तापलट के जरिये देश की सत्ता पर काबिज होने वाले इरशाद आठ साल तक बांग्लादेश के राष्ट्रपति रहे। अपने शासनकाल के दौरान उन्होंने धर्मनिरपेक्ष बांग्लादेश को इस्लामिक मुल्क घोषित करने का विवादित निर्णय लिया था। 1990 में हुए लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के बाद उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी। इसके बाद भ्रष्टाचार संबंधी कई आरोपों में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। कई साल जेल में रहने के बाद भी उनका बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा नाम था।

वह पांच बार सांसद चुने गए। उन्होंने एक बार जेल में रहते हुए भी चुनाव जीता था। उनकी जातीय पार्टी देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है और कई बार गठबंधन सरकार बनाने में मुख्य भूमिका निभा चुकी है।

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