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कोरोना वायरस के मद्देनजर पंजाब के जेलों में बंद 5800 कैदियों किया जाएगा रिहा

कोरोना वायरस से देश में लोग डरे हुए हैं। मॉल, हॉल, स्कूल-कॉलेज सब बंद कर दिए गए हैं। कोरोना वायरस के कारण नोएडा में 144 धारा लागू किया गया। मरीजों की संख्या अब तक लगभग 153 हो चुकी है। तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में पंजाब सरकार ने कैदियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पंजाब सरकार ने 5800 कैदियों को रिहा करने का फैसला किया है। यह बयान पंजाब के जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने दिया है।

सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि मैंने सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में उन्होंने पंजाब की जेलों में कैद कैदियों को रिहा करने की सिफारिश की है। उन्होंने बताया कि जेल में करीब 5800 कैदी हैं जिनमें 2800 कैदी वे हैं, जो स्नैचिंग जैसी छोटी-मोटी वारदातों के लिए बंद हैं। 3000 कैदी वे हैं, जो नशे के साथ पकड़े गए हैं। उनका कहना है कि इन कैदियों को रिहा करने से कानून-व्यवस्था को कोई गंभीर समस्या खड़ी नहीं हो सकती। सूबे के जेलों में ऐसे कैदियों की संख्या करीब 6000 है।

उन्होंने बताया कि इस मसले पर डीजीपी, एडीजीपी और एसपी विचार विमर्श किया जा रहा है। सभी की सहमति इस पर फैसला लिया जाएगा। गौरतलब है कि पंजाब में कोरोना का एक केस सामने आया है। जेलों में बंद कैदियों को लेकर स्वत: संज्ञान के बाद इस संबंध में सरकार को सुप्रीम कोर्ट में जवाब भी दाखिल करने की बात कही गई है।

चिंता जाहिर करते हुए जेल मंत्री एसएस रंधावा ने कहा कि दो-ढाई ग्राम हेरोइन या अन्य ड्रग रखने के दोषी कैदियों को रिहा तो किया जा सकता है। लेकिन उन कैदियों को रिहा नहीं किया जा सकता जो कानून-व्यवसथा का नुकसान करें। उन्हें जेलों में ही बंद रखा जाएगा। उन्होंने ये भी कहा कि पंजाब की जेलों में कैदियों को रखने की कुल क्षमता लगभग 23000 कैदी हैं, लेकिन इस समय जेलों में 24600 कैदी बंद हैं।

रंधावा ने ये भी कहा कि जेलों में बंद कैदियों को सजा अदालतों द्वारा सुनाई गई है। राज्य सरकार इस मुद्दे पर कोर्ट के फैसले को अधिक अहमियत देगी। हालांकि, वे कैदी जो स्नेचिंग और जेब काटने के दोष में सजा काट रहे उन्हें रिहा कर सकते हैं। वे सुबह-शाम जेल में पहुंचकर हाजिरी दें।

जेल मंत्री ने खासकर उन कैदियों को लेकर चिंता जताई है जो नशेड़ी थे या फिर नशीले पदार्थों के साथ पकड़े गए थे। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में उन्हें जेलों से रिहा करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, “देखा गया है कि नशे के आदी लोग शारीरिक तौर पर बहुत कमजोर होते हैं और इन्हें रोग भी जल्दी पकड़ते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कैदियों को जेलों से रिहा कर दिया जाना बहुत जरूरी है ताकि अन्य कैदियों को कोई नुकसान न हो।

भारत की तरह ही ईरान में भी कोरोना के चलते कैदियों को रिहा करने का फैसला लिया गया है। वहां 85,000 कैदियों को रिहा किया गया है। यह फैसला संयुक्त राष्ट्र की ओर से 10 मार्च को कहा गया था कि सभी राजनीतिक बंदियों को फिलहाल छोड़ दिया जाए। इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गई है कि ये कैदी जेल में वापस कब आएंगे।

दरअसल, ईरान में सोमवार को कोरोना वायरस के कारण 129 मौतें हुईं थी। एक दिन में इतने मौत होना आम नहीं था। इसलिए आनन-फानन में कैदियों को रिहा कर दिया गया। ईरान में इस वायरस से मरने वालों की संख्या 853 पहुंच चुकी है और अब तक 14,991 लोग इसकी चपेट में हैं।