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गुजरात में पिछले दो सालों में 15000 नवजात बच्चों की मौत, कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस ने बीजेपी पर एक बार फिर से निशाना साधा है, कारण है गुजरात में नवजात बच्चों की मौत। कांग्रेस ने गुजरात में पिछले दो सालों में लगभग 15,000 नवजात शिशुओं की मौत पर सवाल उठाया गया है। कांग्रेस ने बुधवार को गुजरात राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधा और सवाल उठाया कि क्या अब इस पर कोई सवाल नहीं उठाएगा।

पार्टी प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘विधानसभा में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों के ‘सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट’ में दो साल के भीतर 15000 से अधिक नवजात शिशुओं की मौत हो गई। यानी रोजाना 20 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘नियम के मुताबिक, दो बच्चों के बीच तीन मीटर का फासला होना चाहिए, लेकिन बच्चों को अगल-बगल लिटाया जाता जिससे संक्रमण फैल रहा है।’’

गोहिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘सबसे बड़े दुख की बात यह है कि स्टंट करने के लिए प्रधानमंत्री भावुक हो जाते हैं। इस पर कुछ नहीं बोलेंगे। उन्हें स्टेट्समैन होना चाहिए, स्टंटमैन नहीं।’’ गोहिल ने दावा किया है कि सबसे ज्यादा मौतें अहमदाबाद में हुई हैं जहां से नरेंद्र मोदी ने विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया और गृहमंत्री अमित शाह का संसदीय क्षेत्र गांधीनगर भी उससे लगता है।  उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद शिशुओं की मौत के दूसरे सर्वाधिक मामले राजकोट से आए जहां से मुख्यमंत्री खुद प्रतिनिधत्व करते हैं। ऐसे मुख्यमंत्री को कुर्सी पर बैठे रहने का अधिकार नहीं है।’’

इससे पहले भी कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक अंग्रेजी दैनिक की खबर का हवाला देते हुए ट्वीट किया, ‘‘गुजरात में भाजपा सरकार के शासन में दो साल में 15,013 बच्चों की मौत हुई। यानी हर रोज 20 शिशुओं की मौत हो रही है। सबसे ज़्यादा 4,322 बच्चों की मौत अहमदाबाद में, ये हालत अमित शाह जी के क्षेत्र में है।” सुरजेवाला ने सरकार से सवाल किया, ‘‘क्या बच्चों की चीख सुनाई देगी? क्या कोई सवाल उठाएगा? क्या टीवी मीडिया के साथी साहस दिखाएंगे?’’

गौरतलब है कि गुजरात में पिछले दो सालों में सरकार ने सदन में मंगलवार को बताया था कि गुजरात में नवजात शिशु देखभाल इकाइयों में बीमारियों के कारण 15,000 से अधिक शिशुओं की मृत्यु हो गई। जिसपर कांग्रेस विधायकों ने सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। उठाए गए सवालों के जवाब में उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि गुजरात में 2018 और 2019 के दौरान भर्ती हुए 1.06 लाख शिशुओं में से 15,013 शिशुओं की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी।

नितिन पटेल ने लिखित बयान दिया है कि इन 1.06 लाख बच्चों में से 71,774 सिविल अस्पतालों में पैदा हुए थे और बाद में इलाज के लिए नवजात शिशु देखभाल इकाइयों में लाए गए थे। उन्होंने कहा कि अन्य अस्पतालों में पैदा होने वाले 34,727 शिशु बाद में इन देखभाल इकाइयों में लाए गए थे। सबसे अधिक शिशुओं की मौत क्रमश: वडोदरा (2,362), अहमदाबाद (4,322) और सूरत (1,986) में हुई। पटेल ने नवजात शिशुओं की देखभाल और सुविधाओं में सुधार के लिए सरकार की ओर उठाए गए विभिन्न कदमों को भी सूचीबद्ध किया।

टेको प्लस के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में दिसम्बर 2019 में कुल 1086 शिशुओं की मौत हुई है। इस माह में 54 प्रसूताओं ने भी दम तोड़ा था। साल भर में जन्म लेने वाले बच्चों में से 1710 बच्चे 1.8 किलो और 8150 शिशुओं ने 2.5 किलो से भी कम वजन के थे। स्वास्थ्य मंत्री ने जनवरी में जो आंकड़े जारी किए उसके मुताबिक, वर्ष 2016-17 में 45,935 अति गंभीर बच्चे भर्ती हुए थे। इनमें 14.8 प्रतिशत यानी 6799 बच्चों की मौत हुई है। इसी तरह से वर्ष 2017-18 में 47,499 बच्चे भर्ती हुए थे। इनमें 15.3 प्रतिशत यानी 7505 बच्चों की मौत हुई थी। वर्ष 2018-19 में 42736 बच्चे भर्ती हुए थे, इनमें 12 प्रतिशत यानी 5128 बच्चों की मौत हुई थी।


ऐसा नहीं है कि सिर्फ गुजरात में ही नवजात शिशुओं की मौत हो रही हैं। आपको हैरानी होगी कि पूरे भारत में नवजात शिशु की मृत्यु दर बहुत अधिक है। 2008 से 2015 के बीच 1 करोड़ 11 लाख बच्चे 5 साल से पहले ही दुनिया छोड़ गए। इनमें से 62 लाख बच्चे जन्म के 28 दिनों के भीतर ही दम तोड़ दिए।


सरकारी अस्पतालों में साल 2017 में करीब 529,976 नवजात बच्चों की मौत हुई थी। इस आंकड़े से पता चलता है कि भारत में  हर दिन 1452 नवजात बच्चों की होती है। वहीं एक घंटे में 60 और एक मिनट में एक नवजात शिशु की मौत अस्पताल में होती है। ये आंकड़े मात्र 28 दिन के बच्चों के हैं। सोचिए 5 साल के बच्चों की मृत्यु जोड़ा जाए तो क्या आंकड़ा निकलेगा। ये आंकड़ा हर साल निकला जाता है। नवजात शिशुओं की मृत्यु सही समय पर इलाज न होने के कारण हो रही है।