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जो कहते थे नहीं बिकने दूंगा देश, वही बेच रहे हैं 28 कंपनियां

प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट के बाद पाकिस्तान ने भी इस पर सकारात्मक रुख दिखाया। पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते बहुत ही खराब हैं लेकिन पीएम मोदी के इस प्रस्ताव पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सकारात्मक रुख दिखाया है।
वो लूट रहे हैं सपनों को / मैं चैन से कैसे सो जाऊँ / वो बेच रहे अरमानों को / खामोश मैं कैसे हो जाऊँ / हाँ मैंने कसम उठाई है / मैं देश नहीं बिकने दूंगा / मैं देश नहीं बिकने दूंगा /

इस गीत को उत्तराखंड के मशहूर गीतकार प्रसून जोशी ने लिखा है। इस गीत को 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनाव अभियान का थीम सांग बनाया था। भाजपा के थीम सांग में भी इस गीत की शुरुआती पंक्तियां नरेंद्र मोदी की आवाज में गाई गई थी। 25 मार्च, 2014 को खुद नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर इस कैंपेन एंथम की जानकारी भी दी थी।

 

आज से 6 साल पहले इस गीत को भाजपा का प्रमुख गीत बनाया गया था। तब हर किसी भाजपाई की जुबान पर यह गीत था। लेकिन आज 6 साल बाद इस गीत के मायने बदल रहे है। आज देश की 28 कंपनियां बेची जा रही हैं। ताज्जुब इस बात की है कि देश के प्रधानमंत्री जो कहते थे, “मैं देश नहीं बिकने दूंगा” वह 28 कंपनियों के बेचे जाने के सवाल पर चुप्पी साधे हुए हैं। आखिर क्यों?

दरअसल, तमिलनाडु के डीएमके सांसद पी वेलुसामी ने वित्त मंत्री से घाटे में चल रही उन कंपनियों का ब्योरा मांगा था, जिन्हें हिस्सेदारी बेचने के लिए चिह्न्ति किया गया है। जिस पर वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने लिखित जवाब में बताया कि सरकार हानि और लाभ के आधार पर विनिवेश का फैसला नहीं करती। बल्कि उन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में विनिवेश का फैसला करती है जो प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में नहीं हैं। वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2019-20 के दौरान सरकार ने विनिवेश के लिए 65000 करोड़ का लक्ष्य रखा। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सरकार रणनीतिक बिक्री के साथ हिस्सेदारी बेचने आदि प्रक्रियाओं का सहारा लेती है।

वित्तराज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने लिखित जवाब में 28 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के नाम भी बताए, जिनमें विनिवेश यानी हिस्सेदारी बेचने की सैद्धांतिक मंजूरी मिली है। ये कंपनियां हैं- स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड., प्रोजेक्ट एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड, ब्रिज एंड रुफ कंपनी इंडिया लिमिटेड, हिंदुस्तान न्यूज प्रिंट लिमिटेड, भारत पंप्स एंड कम्प्रेसर्स लिमिटेड, सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड., फेरो अर्थ मूवर्स लिमिटेड, पवन हंस लिमिटेड, एयर इंडिया और उसकी पांच सहायक कंपनियां और एक संयुक्त उद्यम, एचएलएल लाइफकेयर, भारतय पर्यटन विकास निगम, हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड, शिपिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया, बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड। इन कंपनियों में विनिवेश की सैद्धांतिक मंजूरी 2016 से जनवरी 2020 के बीच मिली है। जबकि नीलांचल इस्पात निगम लिमिडेट में विनिवेश की सैद्धांतिक मंजूरी बीते आठ जनवरी को दी गई।

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