पश्चिम बंगाल के साथ ही दक्षिणी राज्यों पर भी भाजपा का फोकस
भारतीय जनता पार्टी ने इस समय पश्चिम बंगाल की सत्ता में आने के लिए पूरी ताकत झोंक डाली है। पार्टी आलाकमान राज्य में सरकार बनाने के लिए हर संभव रणनीति पर काम कर रहा है ,लेकिन पश्चिम बंगाल के साथ ही पार्टी दक्षिण के राज्यों और असम के चुनाव पर भी बराबर नजर रखे हुए है।
इसी साल पांच राज्यों के पश्चिम बंगाल,केरल ,तमिलनाडु , असम और पद्दुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। अप्रैल-मई माह में होने वाले इन पांच विधानसभाओं के चुनावों में भाजपा असम व पश्चिम बंगाल में तो पूरा जोर लगा रही है, जबकि दक्षिण की तीन विधानसभाओं तमिलनाडु, केरल व पद्दुचेरी में भी अपनी मजबूती दर्ज कराने की कोशिश करेगी।असम में सत्तारूढ़ भाजपा को इस बार संयुक्त विपक्ष का सामना करना पड़ सकता है, जबकि पश्चिम बंगाल में वह सत्ता के लिए दावेदारी कर रही है। भाजपा पश्चिम बंगाल में अगले माह सभी 294 क्षेत्रों से गुजरने वाली पांच परिवर्तन रैलियां भी करने जा रही है। पहली परिवर्तन यात्रा पांच फरवरी को शुरू होगी।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हाल में पार्टी महासचिवों के साथ बैठक में चुनाव वाले चारों राज्यों व केंद्र शासित पद्दुचेरी को लेकर भी समीक्षा की थी। सभी राज्यों के लिए भाजपा की चुनावी नियुक्यिों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब चुनावी रणनीतिक दौरे शुरू होने जा रहे हैं। पार्टी के नेताओं के साथ विभिन्न केंद्रीय मंत्री अपने दौरों में चुनावों से जुड़ी गतिविधियों में भी हिस्सा लेंगे। इनमें केंद्र सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में भाजपा राजनीतिक हिंसा से निपटने के साथ -साथ जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए रैलियों के जरिए माहौल बनाएगी। इसके लिए राज्य में अगले माह से पांच परिवर्तन यात्राएं शुरू करने जा रही है। पहली यात्रा पांच फरवरी को होगी जिसे पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा हरी झंडी दिखाएंगे। इसके बाद दूसरी यात्रा दस फरवरी को शुरू होगी, जिसे गृह मंत्री अमित शाह रवाना करेंगे। इन यात्राओं के दौरान जगह- जगह परिवर्तन रैलियां भी होंगी।
असम में भाजपा को इस बार संयुक्त विपक्ष का सामना करना पड़ सकता है। वह इसके लिए पूरी तरह तैयार भी दिख रही है। गृह मंत्री अमित शाह कल 24 जनवरी को राज्य में कोकराझार क्षेत्र से अपने अभियान की शुरुआत भी करने जा रहे हैं। भाजपा का मानना है कि असम में विपक्ष के साथ आने से उसे लाभ मिलेगा। राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा ने अपनी पकड़ मजबूत की है और कांग्रेस इस समय नेतृत्व के संकट से जूझ रही है।
दक्षिण राज्यों में प्रभावी भूमिका में आने की कोशिश
दक्षिण भारत की तीन विधानसभाओं में भाजपा अपनी ताकत बढ़ाने का काम करेगी। तमिलनाडु व केरल में उसकी कोशिश अपने विधायकों को दहाई के आंकड़े तक ले जाने की है। तमिलनाडु में भाजपा अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन में है और उसे कड़े मुकाबले में भी खासी सफलता मिलने की उम्मीद है। केरल में भाजपा ने अपना प्रभाव तो बढ़ाया है, लेकिन अभी भी उसे विधानसभा प्रभावी भूमिका दर्ज कराना बाकी है। अभी उसका एक विधायक ही है।
