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भारत में बैन टिक टॉक में निवेश करने की तैयारी में अमेरिकी निवेशक

भारत में 59 ऐप्स बैन किए जाने के बाद चीनी ऐप कंपनियों ने सावधानी बरतनी शुरू कर दी है। भारत के बाद ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका भी टिक टॉक सहित अन्य चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगा सकते हैं। ऐसी चर्चा है कि टिक टॉक ने अमेरिका में सोशल मीडिया के बाजार को हाथ से न निकलने देने का बड़ा फैसला किया है।

द गार्जियन के अनुसार, सिकोइया और जनरल अटलांटिका टिक टॉक ऐप खरीद सकते हैं। टिक टॉक में निवेश करने पर यह निर्धारित करने के लिए कि क्या अमेरिका में ऐप को प्रतिबंधित किया जा सकता है, यह निर्धारित करने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के साथ चर्चा चल रही है। ट्रम्प प्रशासन ने कहा था कि टिकटॉक अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा है। भारत ने भी इसी कारण से ऐप पर कार्रवाई की।

टिक टॉक में अमेरिकी निवेश

वर्तमान में अमेरिकी कंपनियों के साथ चर्चा चल रही है और टिक टॉक की मूल कंपनी बाइट डांस, टिकटॉक के कुछ हिस्सों को बेच सकती है। हालांकि, टिकटॉक ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

एक महीने पहले टिकटॉक ने कुछ बदलाव करने का वादा किया था। यहां तक ​​कि टिक टॉक में साझीदारी करने वाली कंपनियों ने भी कोई टिप्पणी नहीं की है। टिक टॉक का प्रबंधन पिछले कुछ दिनों से चीनी सरकार से दूर रहा है।

डिज़नी से जुड़े केविन मेयर को मई से इसका सीईओ नामित किया गया है। इसके अलावा बाइट डांस ने बीजिंग से वाशिंगटन तक अपने मुख्यालय को स्थानांतरित करने के लिए अपनी तत्परता का संकेत दिया है।

पाकिस्तान में बीगो और टिकटॉक पर बैन की तैयारी

चीन के लाइव स्ट्रीमिंग ऍप बीगो को पाकिस्तान टेलिकम्युनिकेशन अथॉरिटी (पीटीए) ने ब्लॉक कर दिया है। पीटीए ने जानकारी दी है कि अब भारत की तरह पाकिस्तान में भी टिकटॉक को बैन किया जा सकता है। आरोप है कि इन दोनों ऐप्स के माध्यम से देश में अश्लीलता का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। जो देश के लिए घातक साबित हो सकता है।

भारत ने 59 एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसमें टिक टॉक भी शामिल है। इनमें बाइट डांस, टिकटॉक और हैलो से जुड़े दो मुख्य ऐप शामिल थे। ये दोनों ऐप भारत में लोकप्रिय हैं। भारत के प्रतिबंध के कारण बाइट डांस को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। यही कारण है कि अन्य देशों में प्रतिबंध से बचने के लिए बाइट डांस कंपनी संघर्ष कर रही है।

संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन व्यापार सौदों और कोरोना के विवाद में उलझे हुए हैं। अमेरिका ने बार-बार चीन को कोरोना प्रकोप के लिए जिम्मेदार ठहराया है। आरोपों से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।

भारत द्वारा ऐप पर प्रतिबंध लगाने के बाद अमेरिका ने भी हुआवेई प्रौद्योगिकी और जेडटीई कॉर्प को दूरसंचार क्षेत्र में व्यापार करने से रोककर चीन को झटका दिया है। हुवावे पर ब्रिटेन के प्रतिबंध से चीन भी कड़ा हो गया है।