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लॉकडाउन में बेरोजगारी का दंश, नौकरी गई तो पति पत्नी ने दे दी जान

नरेन्द्र मोदी सरकार ने घोषणा की थी कि किसी भी मज़दूर को उसकी नौकरी से नहीं निकाला जाएगा और तालाबंदी अवधि के दौरान सभी को मालिकों द्वारा वेतन या उनकी मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। केंद्रीय श्रम सचिव और गृह सचिव ने राज्य सरकारों को आधिकारिक रूप से पत्र भेजकर स्पष्ट रूप से इस आशय की सलाह दी थी। प्रधानमंत्री ने स्वयं इस ‘बात’ को दोहराया था। इस सब के बाद भी, ऐसा नहीं हुआ और रोजगार को भी बड़ी तादाद में खत्म कर दिया गया है।

बेरोजगारी के इस संकट का एक और भी गंभीर पहलू यह है कि तालाबंदी शुरू होने के बाद से करीब 14 करोड़ लोग अपनी नौकरी खो चुके हैं। सीएमआईइ सर्वेक्षण ने इन चौंकाने वाले आंकड़े का खुलासा किया है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं कि सरकार ने मजदूरों और कर्मचारियों को भूख और विनाश की भट्टी से बचाने के लिए किसी भी तरह के उपायों की घोषणा नहीं की है। जिसका परिणाम यह है कि बेरोज़गारी इस कद्र बढ़ गई है कि लोग आत्महत्या तक कर रहे हैं।

घटना यूपी के कानपुर के बिधनू थाना क्षेत्र के न्यू आजाद नगर का है। जहां किराये के मकान पर सिक्योरिटी गार्ड राजेंद्र वर्मा का 35 वर्षीय पुत्र लखनऊ की एक दवा कंपनी में काम करता था। वहीं पर उसने देवरिया निवासी चन्द्रिका (30) से फेसबुक पर मिलने के बाद कोर्ट मैरिज कर ली। जिसके कारण उसका पिता के साथ विवाद भी हुआ। लेकिन बेटे की खुशी के लिए वें 2018 में दोनों की धूमधाम से शादी कराई।

कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन में अचानक प्रिंस की नौकरी छूट गई। आर्थिक तंगी के कारण पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने लगा। शुक्रवार की रात भी दोनों के बीच जमकर झगड़ा हुआ। शनिवार सुबह प्रिंस के पिता ड्यूटी पर चले गए और मां राजेश्वरी बेटी शालू के साथ देवकी नगर अपनी बहन कमला के घर गई थीं। दूसरी तरफ मकान मालिक भी परिवार समेत रिश्तेदारी में गए थे।

दोपहर के वक्त दोनों के बीच फिर से झगड़ा हुआ। इसके बाद प्रिंस ने खुद को कमरे में बंद कर पंखे के कुंडे के सहारे साड़ी से फांसी लगा ली। पति को फंदे से झूलता देखकर चंद्रिका ने मौसेरे भाई सत्येंद्र को फोन पर घटना की जानकारी दी। इसके बाद चंद्रिका ने अपने एक साल के बच्चे को दूसरे कमरे में छोड़ कर दुपट्टे से फांसी लगा ली। घर पहुंचने पर मासूम कमरे के बाहर रोते बिलखते मिला। थाना प्रभारी पुष्पराज सिंह के अनुसार आर्थिक तंगी के चलते पारिवारिक कलह की बात सामने आई है। लड़की के परिजनों को सूचना देने के साथ ही दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

इस घटना को लेकर कांग्रेस की यूपी महासचिव प्रियंका गांधी ने एक ट्वीट करके प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घेराबंदी की है। प्रियंका गांधी ने कहा है कि एक तरफ सूबे के मुख्यमंत्री लाखों नौकरियां देने का दम भर रहे है तो दूसरी तरफ कानपुर के युवा दंपति ने लॉकडाउन में गई नौकरी के कारण भूख के कारण मौत को गले लगा लिया। सरकार को संकटकाल मे प्रचार से ज्यादा लोगो की समस्याओं के समाधान पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।