एडवांस रूलिंग्स अथॉरिटी ने कहा- पराठा को खाने से पहले करते हैं गरम, इसलिए लगेगा 18% GSP
इंटरनेट पर लगातार रोटी और पराठा में अंतर ढूंढ़ा जा रहा है। लोग इस बात से खासे हैरान हैं कि ऐसा दोनों में क्या अंतर है जिससे रोटी पर टैक्स कम और पराठा पर अधिक टैक्स लगाने की बात हो रही है। भले लोगों को दोनों में अंतर न मालूम हो पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दुनिया में रहने वालों को पता है कि पराठा रोटी नहीं है। शायद उन्हें लगता है कि पराठा कोई शाही व्यंजन और उसे गर्म करके खाया जाता हैं इसलिए इस पर जीएसटी लगाने की बात की जा रही है।
When my dietician said Poori and Parotha are rich food I thought she was talking about calories 🙄 pic.twitter.com/S9ldlfcFqX
— Arun Bothra 🇮🇳 (@arunbothra) June 12, 2020
दरअसल, कर्नाटक की एडवांस रूलिंग्स अथॉरिटी ने पराठे पर 18 फीसदी जीएसटी दर लगाने का फैसला दिया है। जबकि रोटी पर पांच फीसदी जीएसटी दर लागू है। एक याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि कि पराठे को ‘खाखरा, चपाती या रोटी’ की श्रेणी रखा जाए पर अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग्स (कर्नाटक पीठ) ने उनकी मांग को खारिज कर दिया। जीएसटी नोटिफिकेशन के शेड्यूल 1, एंट्री 99 ए के तहत रोटी पर पांच फीसदी की दर से जीएसटी लगता है।
वाणिज्यिक कर के अतिरिक्त आयुक्त (राज्य कर) डॉ. रवि प्रसाद और केंद्रीय कर के संयुक्त आयुक्त मशहूद उर रहमान फारूकी की पीठ ने रोटी और पराठे पर अलग-अलग जीएसटी लगाने का फैसला दिया। फैसले के दौरान पीठ ने दलील दी कि रोटी पहले से ही बना-बनाया या पूरी तरह से पका हुआ उत्पाद है, जबकि पराठा को खाने के लिए परोसने से पहले गरम करना पड़ता है।
पीठ की तरफ से ये भी कहा गया कि रोटी के विपरित पराठे को खाने लायक बनाने के लिए और प्रोसेसिंग करने की जरूरत पड़ती है। कर्नाटक के बेंगलुरू में व्हाइटफील्ड्स रोड स्थित एम/एस आईडी फ्रेश फूड (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, जो पका हुआ भोजन जैसे इडली, डोसा, पराठा, दही और पनीर जैसे खाद्य पदार्थ सप्लाई करने का काम करता है, ने याचिका दायर कर मांग की थी कि गेहूं से बना पराठे और मालाबार पराठे (रोटी) पर एक समान जीएसटी दर लगाने का आदेश दिया जाए।
