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IIT दिल्ली की दो महिला वैज्ञानिकों ने बनाया एंटी वायरस मास्क

कोरोना महामारी के दौरान लोगों को सुरक्षित रखने में मास्क लगाना बहुत जरूरी है। बिना मास्क के बाहर निकलने पर संक्रमण का डर बना रहता है। ऐसे में मुँह पर मास्क या फिर रुमाल कुछ भी लगा कर रखना अनिवार्य बन चुका है। मास्क लगाने पर संक्रमण को फैलने से रोकने में काफी सफलता मिली है।

दोबारा प्रयोग वाला एंटी वायरस मास्क

इसी बीच आईआईटी दिल्ली की दो महिला वैज्ञानिकों ने दोबारा प्रयोग होने वाला एंटी वायरस मास्क तैयार किया है। इस एंटी वायरस मास्क को 50 बार तक प्रयोग किया जा सकता है। दो मास्क की कीमत महज 299 रुपये है।

आईआईटी दिल्ली के स्टार्टअप नैनोसेफ सॉल्यूशंस ने ‘एन सेफ’ नामक इस मास्क को बुधवार को लॉन्च किया। इसे नैनोसेफ सॉल्यूशंस के साथ जुड़ीं आईआईटी दिल्ली की पूर्व छात्रा डॉ. अनसुया रॉय और प्रो. मंगला जोशी ने मिलकर तैयार किया है।

डॉ. अनसुया रॉय नैनोसेफ सॉल्यूशंस की संस्थापक और सीईओ हैं। वहीं प्रो. मंगला जोशी आईआईटी दिल्ली के टेक्सटाइल और फाइबर इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर के अलावा नैनोसेफ सॉल्यूशंस की संस्थापक और निदेशक भी हैं।

मास्क में विशेष क्या है?

एन सेफ मास्क एक अत्यधिक इंजीनियर्ड मास्क है, जिसकी तीन परतें हैं। मास्क की सबसे आंतरिक परत हाइड्रोफिलिक है, जिसे इस बात को ध्यान में रखकर बनाया गया है कि पहनने वाले को सांस लेने में आराम हो। वहीं बीच वाली परत रोगाणुरोधी गतिविधियों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।

सबसे बाहर वाली परत को पानी और तेल विकर्षण के लिए बनाया गया है। इस मास्क में 99.2 प्रतिशत बैक्टीरियल निस्पंदन दक्षता है। यह अमेरिकन सोसायटी फॉर टेस्टिंग एंड मटीरियल (एएसटीएम) के मानकों के आधार पर श्वसन और स्प्लैश प्रतिरोधक क्षमता वाला मास्क है।

इस मास्क को पहनने के बाद इससे सांस लेने में किसी प्रकार की कठिनाई का भी सामना नहीं करना पड़ता है। डॉ. जोशी ने बताया कि यह सूती में बना भारत का पहला माइक्रोबेरियाल मास्क है जिसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे डिटर्जेंट से धोकर और धूप में सुखाकर फिर से प्रयोग किया जा सकता है। इसका उत्पादन भी शुरू हो चुका है।