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दुनियाभर में डिजिटल कामकाज को लेकर सबसे कुशल देश बना भारत: रिपोर्ट

भारत इस वक्त कोरोना वायरस से जंग लड़ रहा है । जिसे देखते हुए देश में ३ मई तक के लिए लॉक डाउन बढ़ा दिया गया है। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच भारत अन्य देशों को भी सहयोग दे रहा है। इसी बीच दुनियाभर में भारत डिजिटल कामकाज को लेकर सबसे कुशल देश बन गया है। ब्रिटेन इसमें दूसरे स्थान पर है तो वहीं विश्व महाशक्ति अमेरिका डिजिटल कामकाज में तीसरे स्थान पर है। 16 अप्रैल गुरुवार को गार्टनर इंक की ओर से जारी एक सर्वे में बताया गया कि 67 प्रतिशत कर्मचारियों ने मशीन लर्निंग, इंटरनेट और एआई ऑफ़ थिंक्स जैसी नई तकनीक को अपने कामकाज के लिए बेहतरीन बताया।

गार्टनर 2019 डिजिटल वर्कप्लेस सर्वे के अनुसार, अधिकतर भारतीय कर्मचारी डिजिटल क्षेत्र में नई तकनीकों को सीखने को लेकर उत्साहित है और रूचि दिखा रहे हैं। वरिष्ठ शोध विश्लेषक रश्मि चौधरी के कहा कि डिजिटली रूप से  27 फीसदी से अधिक कर्मचारी प्रवीण हो चुके हैं। सबसे अच्छी बात की अब 10 में से 7 कर्मचारी नई तकनीकों को उच्च वेतन और बेहतर मौका मानते हैं। बल्कि काम पर अपने डिजिटल कौशल को बढ़ाने के लिए ऑन-द-जॉब (ओटीजे) और जस्ट-इन-टाइम (जेआईटी) प्रशिक्षण लेने के लिए भी तैयार हैं। चौधरी ने कहा, “डिजिटल उपकरण क्राउडसोर्सिंग और क्रॉस-परागण के माध्यम से कर्मचारी सहयोग में सुधार करते हैं, जिससे श्रमिकों की डिजिटल निपुणता में सुधार होता है।”

ज्यादातर तकनीकी पेशेवर मानते हैं कि मैन्युअल या सेमी स्किल्ड कर्मचारियों की तुलना में डिजिटल तकनीक में दक्ष लोगों की मांग अधिक है। भारत और सिंगापूर कर्मचारियों की ओर से रियल टाइम सहयोग के लिए टूल प्रयोग करने में बेहद आगे हैं। जबकि चीन, फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका और ब्रिटेन मेें इसका विकास अभी धीमा है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कर्मचारियों में से 45 फीसदी कर्मचारियों को इस बात से कोई असर नहीं पड़ता कि उनके कामकाज की आदतों की डिजिटल तकनीक निगरानी करता है। भारत में डिजिटल श्रमिकों का मानना है कि एक बुद्धिमान कार्यस्थल अधिक सार्थक, व्यावसायिक-महत्वपूर्ण काम पर ध्यान केंद्रित करने में योगदान देता है। साथ ही, वे उम्मीद करते हैं कि उनका संगठन निगरानी किए जाने से होने वाले जोखिम को कम कर रहा है। गौरतलब है कि भारत डिजिटल होने की तरफ पूर्ण रूप से अग्रसर रहा है।