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मीडिया को विज्ञापन न देने की सोनिया गांधी के सुझाव पर समाचार पत्र सोसाइटी नाराज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुझाए गए सोनिया गांधी के विकल्प पर भारतीय समाचार पत्र सोसाइटी (INS) ने नाराजगी जाहिर की है। INS ने मजबूत लोकतंत्र के लिए अपने सुझाव पर पुनर्विचार करने को कहा है। दरअसल, सोनिया ने पत्र लिखकर पीएम मोदी को कुछ सुझाव दिए थे। इनमें दो साल तक मीडिया को दिए जाने वाले विज्ञापनों पर रोक की बात कही गई थी।

INS के प्रेसिडेंट शैलेष गुप्त ने सोसाइटी सदस्यों की ओर से इस प्रस्‍ताव पर अविश्वास व्यक्त किया और कांग्रेस अध्यक्ष के सुझाव की निंदा की है। सरकार ओर विपक्ष के लिए फर्जी खबरों के युग में प्रिंट मीडिया देश और दुनिया के हर कोने में लोगों के लिए समाचार और विचार प्राप्त करने का सबसे अच्छा मंच है। मंदी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ने के कारण पहले से ही विज्ञापन और सर्कुलेशन रेवेन्यू में गिरावट आई है। देशव्यापी लॉकडाउन के कारण समस्या और जटिल हुई है। उद्योग गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है।

उन्‍होंने कहा कि इस तरह का प्रस्ताव वित्तीय सेंसरशिप के समान है। जहां तक सरकार के खर्च का सवाल है, यह बहुत कम राशि है, लेकिन यह समाचार पत्र उद्योग के लिए एक बड़ी राशि है जो किसी भी जीवंत लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। यह एकमात्र ऐसा उद्योग है जहां बाजार की ताकतें वेतन का फैसला नहीं करती हैं। ऐसे में सरकार की इस उद्योग के प्रति एक जिम्मेदारी भी है।

सोनिया ने कहा कि दो साल के लिए सरकार को प्रिंट, टेलीविजन और ऑनलाइन मीडिया को कोई विज्ञापन नहीं देना चाहिए। सोनिया का यह आश्चर्यजनक रुख उस मीडिया के महत्व को जानबूझकर घटाने वाला है जिससे मिलने वाली सूचनाओं पर पूरा देश आश्रित रहता है। कोरोना जैसी आपात स्थिति में मीडिया इसीलिए आवश्यक सेवा में भी शामिल है।

एनबीए के अध्यक्ष रजत शर्मा ने कहा कि हम कांग्रेस अध्यक्ष के इस सुझाव की कड़ी निंदा करते हैं। ऐसे समय में जब मीडिया कर्मी जान जोखिम में डालकर लोगों तक सही समाचार पहुंचाने का काम कर रहे हैं, तब कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से इस तरह का सुझाव आना हताशाजनक है।

जब मीडिया कर्मी अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं और महामारी की स्थिति पर समाचार ला रहे हैं, ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष का पूरे मीडिया के लिए मीडिया विज्ञापनों पर दो साल का प्रतिबंध लगाने का सुझाव पूरी तरह से निराशाजनक है। ऐसे में INS कांग्रेस अध्यक्ष से अपील करता है कि वह एक जीवंत और मुक्त प्रेस के हित में मीडिया विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध के बारे में प्रधानमंत्री को दिए गए सुझाव पर पुनर्विचार करें और उसे वापस लें