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योगी सरकार ने नहीं हटाए वसूली पोस्टर तो बगल में लगा BJP के रेप आरोपी नेताओं के बैनर

उत्तर प्रदेश में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से हिंसा फैलाने वालों के पोस्टर लखनऊ में लगाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और पोस्टर को हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार हटाने को कहा था। उसके बावजूद प्रदेश की योगी सरकार की पुलिस पोस्टर नहीं हटा रही।

सरकार की ओर से कोर्ट के इस आदेश की अनदेखी किए जाने के विरोध में समाजवादी पार्टी के नेता आईपी सिंह ने अनोखी पहल की है। उन्होंने लखनऊ स्थित लोहिया चौराहे पर कुलदीप सिंह सेंगर और आरोपी चिन्मयानंद का पोस्टर लगाया है। ये दोनों रेप के आरोपी हैं। कुलदीप सिंह सेंगर को उम्र कैद की सजा मिली है। वहीं आरोपी चिन्मयानंद बेल पर बाहर हैं।

आईपी सिंह यह कदम योगी सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के हर चौराहे पर सीएए के विरोध में प्रदर्शन करने वालों के पोस्टर के विरोध में उठाया है। कुलदीप सिंह सेंगर और चिन्मयानंद का पोस्टर उन्हीं पोस्टर्स के बगल में लगाया गया है, जहां योगी सरकार ने बाकी के पोस्टर लगा रखे हैं। उनका कहना है कि जब प्रदर्शनकारियों की कोई निजता नहीं है और उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी योगी सरकार होर्डिंग नहीं हटा रही है, तो मैंने भी कोर्ट द्वारा नामित कुछ बालात्कार के आरोपियों का पोस्टर जनहित में जारी कर दिया है। ताकि इनसे बेटियां सावधान रहें। राजनीतिक गलियारों में विरोध के इस अनूठे तरीके की खूब चर्चा हो रही है।

https://twitter.com/IPSinghSp/status/1238175879412322304

आईपी सिंह ने टि्वटर पर लिखा, “मेरे पोस्टर का विरोध वही करेगा, जो महिला विरोधी और बलात्कारियों का समर्थन कर रहा है। सरकार उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का अपमान कर संविधान विरोधी कार्य करेगी, तो फिर उसे अपने गिरेबान में भी झांक कर देख लेना चाहिए, भाजपा महिला विरोधी है।”

https://twitter.com/IPSinghSp/status/1238329718203539456

बता दें कि योगी सरकार और लखनऊ प्रशासन ने सीएए के विरोध में प्रदर्शन करने वालों की एक बड़ी होर्डिंग चौक-चौराहे पर लगवाई है। इस होर्डिंग में प्रदर्शनकारियों की फोटो, उनका नाम और उनका पता लिखा है। इलाहाबाद हाईकार्ट ने इस मामले में जिलाधिकारी को सार्वजनिक स्थलों से होर्डिंग हटाने के निर्देश दिए थे।

जिसको स्वीकार न करते हुए योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही माना और पोस्टर को हटाने का आदेश जारी की। साथ ही न्यायालय ने ये भी कहा कि इस मामले में उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर बड़ी पीठ सुनवाई करेगी।