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मध्यप्रदेश सियासत पर भूपेश बघेल बोले, कुछ तो मजबूरियां रही होंगी कोई यूं ही बेवफा नहीं होता

मध्यप्रदेश की राजनीति में इस समय सियासी घमासान मचा हुआ है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को अपना इस्तीफा कांग्रेस पार्टी को सौंपा और बुधवार दोपहर को बीजेपी ज्वॉइन कर लिया। राजनीतिक घमासान के बारे में जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मीडिया ने बातचीत की तो उन्होंने कहा कि हमने हमेशा देखा है कांग्रेस से जाने वाले लोग हमेशा गुर्राते हुए जाते हैं और दुम दबाकर आते हैं। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, कोई यूं ही बेवफा नहीं होता।

बघेल आज सुबह दिल्ली के लिए रवाना हो चुके है। भूपेश मध्यप्रदेश में मचे सियासी घमासान को लेकर दिल्ली में पार्टी आलाकमान से बातचीत करेंगे। प्रदेश में दों राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने है इसी सिलसिले में वह पार्टी आलाकमान से चर्चा करने के लिए दिल्ली आ रहे हैं। प्रदेश की दोनों सीटों पर किन्हें उम्मीदवार बनाया जा सकता है। इसके बारें में भी बात करेंगे।

वहीं इस पूरे मामले पर बोलते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को बिल्कुल भी पार्टी से दरकिनार नहीं किया गया था। बुधवार को सिंह ने ट्विटर पर लिखा कि पिछले 16 महीने में ग्वालियर और चंबल संभाग में बिना उनकी सहमति के कुछ नहीं किया गया।

मध्यप्रदेश खासकर ग्वालियर चंबल संभाग के किसी भी कांग्रेस नेता से इसके बारे में पूछा जा सकता है। दिग्विजय सिंह ने कहा यह दुखद है। लेकिन वे कांग्रेस छोड़कर मोदी-शाह की शरण में गए हैं, उनको शुभकामनाएं। मध्यप्रदेश कांग्रेस की तरफ से सिंधिया को निशाना बनाते हुए ट्वीट किया गया है जिसमें लिखा है  कि सिंधिया जी की 18 साल की राजनीति में कांग्रेस ने कहा कि 17 साल सांसद बनाया। 2 बार केंद्रीय मंत्री बनाया। मुख्य सचेतक बनाया। राष्ट्रीय महासचिव बनाया। यूपी का प्रभारी बनाया। कार्यसमिति सदस्य बनाया। चुनाव अभियान प्रमुख बनाया 50+ टिकट, 9 मंत्री दिए फिर भी मोदी-शाह की शरण में?

सिंधिया ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया है। अब उन्हें बीजेपी की तरफ से राज्यसभा भेजे जाने की तैयारी है। केंद्रीय सत्र समाप्त होने के बाद सिंधिया को सरकार में मंत्री बनाया जाएगा। सिंधिया के इस्तीफे की खबर मिलते ही मध्यप्रदेश के 6 मंत्रियों सहित 22 विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। कहा जा रहा है कि सिंधिया के साथ इस्तीफा देने वाले विधायकों को मध्यप्रदेश में सरकार बनने के बाद मंत्री पद दिया जाएगा।