हरियाणा में खट्टर इस बार 75 पार, विपक्ष रोकने को तैयार


जानकारों की माने तो प्रदेश में सीधी लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच है, प्रदेश में छह महीने पहले तक मजबूत माना जाने वाला मुख्य विपक्षी दल इनेलो अब दो-फाड़ हो चुका है। जिससे यहां के राजनीतिक समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं। चौधरी देवी लाल के बनाई हुई पार्टी इनेलो में अब सिर्फ तीन विधायक बचे हैं। जबकि पिछले चुनाव में इसे 19 सीटों पर जीत मिली थी। चौटाला परिवार में आपसी मतभेद के बाद बनी नई पार्टी जननायक जनता दल(जजपा) के लिए यह पहला चुनाव होगा जहां पार्टी को प्रदेश में अपनी राजनैतिक हैसियत का अंदाजा लगेगा।

डेढ दशक से अधिक आरएसएस का प्रचारक रहने के बाद मनोहर लाल खट्टर ने बीजेपी ज्वाइन की थी. बीजेपी से जुड़ने के 20 साल बाद उन्होंने अपना पहला चुनाव लड़ा। 2014 में लोकसभा चुनाव की जीत से जो मोदी लहर का आगाज हुआ था उसकी वजह से बीजेपी हरियाणा में पहली बार विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल करने में कामयाब रही। 2014 में हरियाणा में कैप्टन अभिमन्यू, रामबिलास शर्मा, अनिल विज, कृष्ण पाल बड़े चेहरों के बजाए बीजेपी ने सबको चौंकाते हुए मनोहर लाल खट्टर को राज्य का सीएम बनाया। मनोहर लाल खट्टर बीजेपी का सरप्राइज पैकेज इसलिए थे क्योंकि 2014 में ही उन्होंने अपनी जिंदगी का पहला चुनाव लड़ा और बड़ी जीत हासिल की थी। इस बार मतदाताओं के रुख को देखकर लगता है कि हरियाणा में एक बार फिर खट्टर विजय पताका फहराएंगे। क्योकि फ़िलहाल खट्टर को कोई टक्कर देता तो दिखाई नहीं दे रहा है।
